{"_id":"664b373434e68c00620b1ba5","slug":"patients-wait-for-their-turn-sitting-on-the-floor-in-the-hospital-bilaspur-news-c-92-1-bls1001-117623-2024-05-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: अस्पताल में फर्श पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bilaspur News: अस्पताल में फर्श पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं मरीज
विज्ञापन
घुमारवीं अस्पताल में नहीं हो पाया मरीजों के बैठने का उचित प्रबंध
- भीषण गर्मी में मरीजों को झेलनी पड़ रही समस्या
संवाद न्यूज एजेंसीघुमारवीं (बिलासपुर)। भीषण गर्मी में जिले के दूसरे बड़े सिविल अस्पताल घुमारवीं में मरीजों के बैठने का उचित प्रबंध नहीं हो पाया है। समस्या को लेकर अस्पताल प्रशासन द्वारा हर बार सिर्फ कोरे आश्वासन दिए जाते हैं। मरीज इन आश्वासनों के बीच अव्यवस्था के शिकार हो रहे हैं।
अस्पताल आने वाले मरीजों में खासकर महिलाओं को जांच और इलाज के लिए घंटों फर्श, सीढिय़ों, अस्पताल परिसर के दरवाजे और जमीन पर बैठकर इंतजार करना पड़ता है। गर्मी में अस्पताल आने वाले मरीजों की संख्या में भी वृद्धि हो जाती है। ऐसे में सभी चिकित्सकों के कमरे के बाहर मरीजों की भीड़ लगी रहती है। दूसरा जो महिलाएं जांच के लिए पहुंच रही है, उनके बैठने तक की व्यवस्था सही नहीं है। सबसे ज्यादा लाइन एक्स रे रूम के बाहर देखी जा सकती है। जहां पर एक्सरे करवाने वाले मरीज दीवार के सहारे खड़े होकर या फिर जमीन पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करने को मजबूर होते हैं। दूसरी तरफ ओपीडी के बाहर बरामदे में रखे बेंच मरीजों के लिए पर्याप्त नहीं हैं। मजबूरन उन्हें छोटे-छोटे बच्चों के साथ फर्श पर ही बैठना पड़ता है। इस समय अस्पताल में शल्य रोग, हड्डी रोग, स्त्री रोग, चर्म रोग और शिशु रोग विशेषज्ञ सहित सभी चिकित्सक मौजूद हैं। ऐसे में गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चे इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। बैठने की उचित व्यवस्था न होने के कारण इन्हें समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं। यही नहीं शिशु रोग, हड्डी रोग विशेषज्ञ की ओपीडी भी दूसरे और तीसरी मंजिल पर होने के कारण लोगों को मजबूरन बार-बार सीढि़यां उतरनी और चढ़नी पड़ रही हैं। यहां तक कि टूटी टांगों पर प्लास्टर चढ़ाए मरीज भी घंटों दीवार के सहारे खड़े होने को मजबूर हैं। बढ़ती गर्मी और बैठने की उचित व्यवस्था न होने के कारण छोटे-बच्चों को रोते बिलखते देखा जा सकता है। दूसरी ओर घुमारवीं अस्पताल प्रशासन इस मामले में कुछ भी बोलने मना कर रहा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वह ऐसे किसी भी मामले पर अपना बयान नहीं देंगे। अधिकारियों से इसके बारे में संपर्क किया जाए, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। ऐसे में हालात कैसे सुधरेंगे यह तो स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी की बता सकते हैं।
विज्ञापन
- भीषण गर्मी में मरीजों को झेलनी पड़ रही समस्या
संवाद न्यूज एजेंसीघुमारवीं (बिलासपुर)। भीषण गर्मी में जिले के दूसरे बड़े सिविल अस्पताल घुमारवीं में मरीजों के बैठने का उचित प्रबंध नहीं हो पाया है। समस्या को लेकर अस्पताल प्रशासन द्वारा हर बार सिर्फ कोरे आश्वासन दिए जाते हैं। मरीज इन आश्वासनों के बीच अव्यवस्था के शिकार हो रहे हैं।
अस्पताल आने वाले मरीजों में खासकर महिलाओं को जांच और इलाज के लिए घंटों फर्श, सीढिय़ों, अस्पताल परिसर के दरवाजे और जमीन पर बैठकर इंतजार करना पड़ता है। गर्मी में अस्पताल आने वाले मरीजों की संख्या में भी वृद्धि हो जाती है। ऐसे में सभी चिकित्सकों के कमरे के बाहर मरीजों की भीड़ लगी रहती है। दूसरा जो महिलाएं जांच के लिए पहुंच रही है, उनके बैठने तक की व्यवस्था सही नहीं है। सबसे ज्यादा लाइन एक्स रे रूम के बाहर देखी जा सकती है। जहां पर एक्सरे करवाने वाले मरीज दीवार के सहारे खड़े होकर या फिर जमीन पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करने को मजबूर होते हैं। दूसरी तरफ ओपीडी के बाहर बरामदे में रखे बेंच मरीजों के लिए पर्याप्त नहीं हैं। मजबूरन उन्हें छोटे-छोटे बच्चों के साथ फर्श पर ही बैठना पड़ता है। इस समय अस्पताल में शल्य रोग, हड्डी रोग, स्त्री रोग, चर्म रोग और शिशु रोग विशेषज्ञ सहित सभी चिकित्सक मौजूद हैं। ऐसे में गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चे इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। बैठने की उचित व्यवस्था न होने के कारण इन्हें समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं। यही नहीं शिशु रोग, हड्डी रोग विशेषज्ञ की ओपीडी भी दूसरे और तीसरी मंजिल पर होने के कारण लोगों को मजबूरन बार-बार सीढि़यां उतरनी और चढ़नी पड़ रही हैं। यहां तक कि टूटी टांगों पर प्लास्टर चढ़ाए मरीज भी घंटों दीवार के सहारे खड़े होने को मजबूर हैं। बढ़ती गर्मी और बैठने की उचित व्यवस्था न होने के कारण छोटे-बच्चों को रोते बिलखते देखा जा सकता है। दूसरी ओर घुमारवीं अस्पताल प्रशासन इस मामले में कुछ भी बोलने मना कर रहा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वह ऐसे किसी भी मामले पर अपना बयान नहीं देंगे। अधिकारियों से इसके बारे में संपर्क किया जाए, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। ऐसे में हालात कैसे सुधरेंगे यह तो स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी की बता सकते हैं।
विज्ञापन