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Bilaspur News: एम्स में दर्द और शारीरिक अक्षमता से जूझ रहे मरीजों को मिल रहा विशेषज्ञ परामर्श
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पीएमआर विभाग में लकवे, दुर्घटना और शल्यक्रिया के बाद मरीजों का पुनर्वास, चलने-फिरने में परेशानी का भी उपचार
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कमर, गर्दन, कंधे और घुटनों के दर्द से परेशान मरीजों को एम्स बिलासपुर में विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श मिल रहा है। बीमारी, दुर्घटना, लकवे या शल्यक्रिया के बाद चलने-फिरने, संतुलन बनाने और रोजमर्रा के काम करने में परेशानी झेल रहे मरीज भी यहां उपचार एवं पुनर्वास संबंधी सलाह ले सकते हैं। एम्स के शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास (पीएमआर) विभाग में मरीजों की शारीरिक स्थिति का आकलन कर उनकी जरूरत के अनुसार उपचार योजना तैयार की जाती है।
पीएमआर चिकित्सा की विशेषज्ञ शाखा है। इसमें दर्द और शारीरिक अक्षमता के प्रभाव को कम करने के साथ मरीज की कार्यक्षमता में सुधार लाने पर ध्यान दिया जाता है, ताकि वह दैनिक गतिविधियों में अधिक आत्मनिर्भर बन सके। विभाग में जोड़ों की जकड़न, नसों से संबंधित दर्द, हाथ-पैरों में कमजोरी और चलने-फिरने में कठिनाई जैसी समस्याओं के लिए विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध है। विभाग में सहायक प्रोफेसर एवं प्रभारी डॉ. हिमांशु अग्रवाल, सहायक प्रोफेसर डॉ. रामबीर घुलेलिया और सहायक प्रोफेसर डॉ. सेंटिमोआ जमीर मरीजों को परामर्श दे रहे हैं।
हड्डी टूटने या शल्यक्रिया के बाद शारीरिक कार्यक्षमता प्रभावित होने पर भी मरीज यहां सलाह ले सकते हैं। लकवे और रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण चलने-फिरने, संतुलन बनाने और दैनिक कार्य करने में परेशानी झेल रहे मरीजों को उनकी स्थिति के अनुसार मार्गदर्शन दिया जाता है। सिर की गंभीर चोट के बाद होने वाली शारीरिक समस्याओं के लिए भी पुनर्वास संबंधी सलाह उपलब्ध है।
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मरीजों की चिकित्सकीय स्थिति के अनुसार औषधीय उपचार, चिकित्सकीय व्यायाम, फिजियोथेरेपी और सहायक उपकरणों के इस्तेमाल पर परामर्श दिया जाता है। दर्द के मूल्यांकन और प्रबंधन के लिए जरूरत के अनुसार सोनोग्राफी और सी-आर्म निर्देशित इंटरवेंशनल प्रक्रियाओं जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जाता है। प्रत्येक मरीज की जरूरत और शारीरिक क्षमता के अनुरूप उपचार एवं पुनर्वास की योजना बनाई जाती है।
एम्स के रजिस्ट्रार राकेश कुमार सिंह ने बताया कि बच्चों को बैठने, खड़े होने, चलने अथवा हाथों का उपयोग करने में कठिनाई होने पर भी विभाग में विशेषज्ञ मूल्यांकन और पुनर्वास संबंधी परामर्श उपलब्ध है। बुजुर्ग जोड़ों के दर्द, शारीरिक कमजोरी, संतुलन में कमी और बार-बार गिरने जैसी समस्याओं के लिए सलाह ले सकते हैं। पुनर्वास प्रक्रिया में परिजनों की सहभागिता भी महत्वपूर्ण है। नियमित अभ्यास और मरीज को उसकी क्षमता के अनुसार दैनिक गतिविधियों में शामिल करना इसमें सहायक होता है।
सोमवार से शनिवार तक मरीज ले सकते हैं विशेषज्ञों से परामर्श
एम्स बिलासपुर का पीएमआर विभाग ओपीडी ब्लॉक-बी की चौथी मंजिल पर कक्ष संख्या 736 और 737 में संचालित है। यहां सोमवार से शनिवार तक मरीज विशेषज्ञ परामर्श ले सकते हैं। ओपीडी में आते समय मरीज पुराने उपचार संबंधी दस्तावेज, जांच रिपोर्ट, अस्पताल से छुट्टी के समय मिले कागजात और वर्तमान में इस्तेमाल की जा रही दवाओं का विवरण साथ लाएं। ओपीडी पंजीकरण और अवकाश संबंधी जानकारी संस्थान की आधिकारिक सूचनाओं से प्राप्त की जा सकती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कमर, गर्दन, कंधे और घुटनों के दर्द से परेशान मरीजों को एम्स बिलासपुर में विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श मिल रहा है। बीमारी, दुर्घटना, लकवे या शल्यक्रिया के बाद चलने-फिरने, संतुलन बनाने और रोजमर्रा के काम करने में परेशानी झेल रहे मरीज भी यहां उपचार एवं पुनर्वास संबंधी सलाह ले सकते हैं। एम्स के शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास (पीएमआर) विभाग में मरीजों की शारीरिक स्थिति का आकलन कर उनकी जरूरत के अनुसार उपचार योजना तैयार की जाती है।
पीएमआर चिकित्सा की विशेषज्ञ शाखा है। इसमें दर्द और शारीरिक अक्षमता के प्रभाव को कम करने के साथ मरीज की कार्यक्षमता में सुधार लाने पर ध्यान दिया जाता है, ताकि वह दैनिक गतिविधियों में अधिक आत्मनिर्भर बन सके। विभाग में जोड़ों की जकड़न, नसों से संबंधित दर्द, हाथ-पैरों में कमजोरी और चलने-फिरने में कठिनाई जैसी समस्याओं के लिए विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध है। विभाग में सहायक प्रोफेसर एवं प्रभारी डॉ. हिमांशु अग्रवाल, सहायक प्रोफेसर डॉ. रामबीर घुलेलिया और सहायक प्रोफेसर डॉ. सेंटिमोआ जमीर मरीजों को परामर्श दे रहे हैं।
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हड्डी टूटने या शल्यक्रिया के बाद शारीरिक कार्यक्षमता प्रभावित होने पर भी मरीज यहां सलाह ले सकते हैं। लकवे और रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण चलने-फिरने, संतुलन बनाने और दैनिक कार्य करने में परेशानी झेल रहे मरीजों को उनकी स्थिति के अनुसार मार्गदर्शन दिया जाता है। सिर की गंभीर चोट के बाद होने वाली शारीरिक समस्याओं के लिए भी पुनर्वास संबंधी सलाह उपलब्ध है।
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मरीजों की चिकित्सकीय स्थिति के अनुसार औषधीय उपचार, चिकित्सकीय व्यायाम, फिजियोथेरेपी और सहायक उपकरणों के इस्तेमाल पर परामर्श दिया जाता है। दर्द के मूल्यांकन और प्रबंधन के लिए जरूरत के अनुसार सोनोग्राफी और सी-आर्म निर्देशित इंटरवेंशनल प्रक्रियाओं जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जाता है। प्रत्येक मरीज की जरूरत और शारीरिक क्षमता के अनुरूप उपचार एवं पुनर्वास की योजना बनाई जाती है।
एम्स के रजिस्ट्रार राकेश कुमार सिंह ने बताया कि बच्चों को बैठने, खड़े होने, चलने अथवा हाथों का उपयोग करने में कठिनाई होने पर भी विभाग में विशेषज्ञ मूल्यांकन और पुनर्वास संबंधी परामर्श उपलब्ध है। बुजुर्ग जोड़ों के दर्द, शारीरिक कमजोरी, संतुलन में कमी और बार-बार गिरने जैसी समस्याओं के लिए सलाह ले सकते हैं। पुनर्वास प्रक्रिया में परिजनों की सहभागिता भी महत्वपूर्ण है। नियमित अभ्यास और मरीज को उसकी क्षमता के अनुसार दैनिक गतिविधियों में शामिल करना इसमें सहायक होता है।
सोमवार से शनिवार तक मरीज ले सकते हैं विशेषज्ञों से परामर्श
एम्स बिलासपुर का पीएमआर विभाग ओपीडी ब्लॉक-बी की चौथी मंजिल पर कक्ष संख्या 736 और 737 में संचालित है। यहां सोमवार से शनिवार तक मरीज विशेषज्ञ परामर्श ले सकते हैं। ओपीडी में आते समय मरीज पुराने उपचार संबंधी दस्तावेज, जांच रिपोर्ट, अस्पताल से छुट्टी के समय मिले कागजात और वर्तमान में इस्तेमाल की जा रही दवाओं का विवरण साथ लाएं। ओपीडी पंजीकरण और अवकाश संबंधी जानकारी संस्थान की आधिकारिक सूचनाओं से प्राप्त की जा सकती है।