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Bilaspur News: झंडूता में महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के एक तिहाई पद खाली
Wed, 29 Jan 2025 11:37 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Wed, 29 Jan 2025 11:37 PM IST
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-कर्मचारियों के अभाव में स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा प्रतिकूल असर
-मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण संबंधी जागरुकता और सुरक्षित प्रसव में निभाती हैं अहम भूमिका
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। स्वास्थ्य खंड झंडूता में महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की भारी कमी के चलते क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की ड्यूटी निभाने वाली इन कर्मचारियों के 32 प्रतिशत पद खाली हैं। लगभग 12 स्वास्थ्य उपकेंद्रों में कर्मचारियों के न होने का सीधा असर 30,000 से अधिक लोगों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की जाती है। वे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच, पोषण संबंधी जागरुकता, सुरक्षित प्रसव, 16 साल तक के बच्चों को टीकाकरण के जरिए रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करना, टीबी उन्मूलन, ओपीडी सेवाएं, बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, और स्वास्थ्य सेवाओं का डिजिटलीकरण जैसे अहम कार्य करती हैं। स्वास्थ्य उपकेंद्रों को अब 'आयुष्मान आरोग्य केंद्र' के रूप में नामित किया गया है, लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण इन केंद्रों की सेवाएं बाधित हैं। धनी, कोट, ढोलग, धराड़, बल्ही मरेटा, खालसाई, डोहक-बड़गांव, मूंडखर, करलोटी और बैहल उप केंद्रों में महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के पद रिक्त हैं। इस स्थिति के चलते महिलाओं को दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं में गिरावट दर्ज की जा रही है।
स्वास्थ्य जागरण मंच बिलासपुर के संयोजक रमेश चंद नेवी ने कहा कि इन पदों के खाली रहने से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चों की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को इन पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरना चाहिए ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति सुधर सके। खंड चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर परविंद्र सिंह ने बताया कि इन पदों को भरने के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। उन्होंने कहा कि जैसे ही अनुमति मिलेगी, इन केंद्रों पर महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की तैनाती कर दी जाएगी।
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-मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण संबंधी जागरुकता और सुरक्षित प्रसव में निभाती हैं अहम भूमिका
संवाद न्यूज एजेंसी
बरठीं (बिलासपुर)। स्वास्थ्य खंड झंडूता में महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की भारी कमी के चलते क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की ड्यूटी निभाने वाली इन कर्मचारियों के 32 प्रतिशत पद खाली हैं। लगभग 12 स्वास्थ्य उपकेंद्रों में कर्मचारियों के न होने का सीधा असर 30,000 से अधिक लोगों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की जाती है। वे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच, पोषण संबंधी जागरुकता, सुरक्षित प्रसव, 16 साल तक के बच्चों को टीकाकरण के जरिए रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करना, टीबी उन्मूलन, ओपीडी सेवाएं, बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, और स्वास्थ्य सेवाओं का डिजिटलीकरण जैसे अहम कार्य करती हैं। स्वास्थ्य उपकेंद्रों को अब 'आयुष्मान आरोग्य केंद्र' के रूप में नामित किया गया है, लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण इन केंद्रों की सेवाएं बाधित हैं। धनी, कोट, ढोलग, धराड़, बल्ही मरेटा, खालसाई, डोहक-बड़गांव, मूंडखर, करलोटी और बैहल उप केंद्रों में महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के पद रिक्त हैं। इस स्थिति के चलते महिलाओं को दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं में गिरावट दर्ज की जा रही है।
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स्वास्थ्य जागरण मंच बिलासपुर के संयोजक रमेश चंद नेवी ने कहा कि इन पदों के खाली रहने से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चों की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को इन पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरना चाहिए ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति सुधर सके। खंड चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर परविंद्र सिंह ने बताया कि इन पदों को भरने के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। उन्होंने कहा कि जैसे ही अनुमति मिलेगी, इन केंद्रों पर महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की तैनाती कर दी जाएगी।
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