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Bilaspur News: अंतिम दिन कथा में सुनाया सुदामा-कृष्ण की मित्रता का प्रसंग
Fri, 24 Apr 2026 11:52 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 24 Apr 2026 11:52 PM IST
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पिपलेश्वर महादेव मंदिर में कथा समापन पर भंडारे में प्रसाद ग्रहण करते लोग। स्रोत: आयोजक
पिपलेश्वर महादेव मंदिर में भागवत कथा संपन्न
भंडारे में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के डियारा सेक्टर स्थित पिपलेश्वर महादेव मंदिर में जन सहयोग से चल रही श्रीमदभागवत कथा का शुक्रवार को विधिवत समापन हो गया। अंतिम दिन कथा व्यास ने सुदामा-कृष्ण की मित्रता का प्रसंग सुनाया। इस दौरान विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
कथा के अंतिम दिन प्रवचन करते हुए कथा वाचक पंडित हंसराज लोमश ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की अटूट मित्रता का मार्मिक प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि सच्ची मित्रता में धन-दौलत का कोई महत्व नहीं होता, बल्कि भाव और समर्पण ही सबसे बड़ा होता है। उन्होंने कथा के माध्यम से बताया कि सुदामा, जो एक गरीब ब्राह्मण थे, अपने मित्र श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे। फटेहाल अवस्था में पहुंचे सुदामा को जब श्रीकृष्ण ने देखा तो वे नंगे पांव दौड़ते हुए आए और उन्हें गले लगा लिया। श्रीकृष्ण ने स्वयं उनके चरण धोए और अत्यंत प्रेम व सम्मान दिया। पंडित लोमश ने कहा कि सुदामा ने संकोचवश श्रीकृष्ण से कुछ नहीं मांगा, लेकिन सच्चे भाव को समझते हुए भगवान ने उनकी सारी दरिद्रता दूर कर दी। जब सुदामा अपने घर लौटे तो वहां महल और सुख-सुविधाएं देखकर भावुक हो उठे। कथा समापन के अवसर पर श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में भाग लेकर आध्यात्मिक वातावरण का आनंद लिया। आयोजकों ने बताया कि कथा के सफल आयोजन में क्षेत्रवासियों का भरपूर सहयोग मिला।
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भंडारे में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के डियारा सेक्टर स्थित पिपलेश्वर महादेव मंदिर में जन सहयोग से चल रही श्रीमदभागवत कथा का शुक्रवार को विधिवत समापन हो गया। अंतिम दिन कथा व्यास ने सुदामा-कृष्ण की मित्रता का प्रसंग सुनाया। इस दौरान विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
कथा के अंतिम दिन प्रवचन करते हुए कथा वाचक पंडित हंसराज लोमश ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की अटूट मित्रता का मार्मिक प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि सच्ची मित्रता में धन-दौलत का कोई महत्व नहीं होता, बल्कि भाव और समर्पण ही सबसे बड़ा होता है। उन्होंने कथा के माध्यम से बताया कि सुदामा, जो एक गरीब ब्राह्मण थे, अपने मित्र श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे। फटेहाल अवस्था में पहुंचे सुदामा को जब श्रीकृष्ण ने देखा तो वे नंगे पांव दौड़ते हुए आए और उन्हें गले लगा लिया। श्रीकृष्ण ने स्वयं उनके चरण धोए और अत्यंत प्रेम व सम्मान दिया। पंडित लोमश ने कहा कि सुदामा ने संकोचवश श्रीकृष्ण से कुछ नहीं मांगा, लेकिन सच्चे भाव को समझते हुए भगवान ने उनकी सारी दरिद्रता दूर कर दी। जब सुदामा अपने घर लौटे तो वहां महल और सुख-सुविधाएं देखकर भावुक हो उठे। कथा समापन के अवसर पर श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में भाग लेकर आध्यात्मिक वातावरण का आनंद लिया। आयोजकों ने बताया कि कथा के सफल आयोजन में क्षेत्रवासियों का भरपूर सहयोग मिला।
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