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Bilaspur News: प्रवासी मजदूरों को कुष्ठ रोग निवारण के लिए दिलाई शपथ
Fri, 14 Feb 2025 11:57 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 14 Feb 2025 11:57 PM IST
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बिलासपुर की ग्राम पंचायत रोहल के तहत नंद नगराओं पुल में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद मजदूर व अन्य
-नंद नगराओं पुल के पास हुआ कुष्ठ रोग अभियान कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। स्वास्थ्य खंड झंडूता की ओर से विश्व कुष्ठ रोग अभियान के तहत ग्राम पंचायत रोहल के तहत नंद नगराओं के पुल निर्माण में कार्यरत प्रवासी मजदूरों के बीच कार्यक्रम कराया गया, जिसकी अध्यक्षता अभियंता शुभम ने की। इस दौरान उपस्थित सभी लोगों को कुष्ठ रोग निवारण के लिए शपथ दिलाई गई।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से शिक्षक दीप कुमार ने लोगों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि भारत में 30 जनवरी का दिन महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के साथ ही यह दिवस महात्मा गांधी के कुष्ठ रोगियों के प्रति प्रेम, सद्भाव और कुष्ठ रोगियों के प्रति समर्पण के रूप में भी मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य कुष्ठ रोग के प्रभाव और उपचार विकल्पों के बारे में जागरुकता बढ़ाना है। साथ ही समाज में इस रोग के कलंक और भेदभाव को समाप्त करना है। कुष्ठ रोग माइक्रो बैक्टीरिया लेप्रो नामक जीवाणु के कारण होने वाला एक पुराना संक्रामक रोग है। कुष्ठ रोग को हैनसेन रोग के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष का थीम एकजुट हो जाओ, काम करो, कुष्ठ रोग को समाप्त करो एक वैश्विक अनिवार्यता है। यह रोग लोगों की जागरुकता व एकजुटता से ही समाप्त किया जा सकता है। इस रोग की पहचान सबसे पहले स्पेनिश डॉक्टर फोलोर ने 1954 में की थी। भारत में कुष्ठ रोग के मामले की प्रसार दर घटकर प्रति 10,000 जनसंख्या पर 0.45 मामले पर रह गई है। 2021-22 के अनुसार भारत में 75,394 मामले सामने आए थे। वहीं हिमाचल की बात करें तो अप्रैल 2021 से 31 जनवरी 2022 तक हिमाचल में 101 मामले दर्ज हैं। जिले में कुष्ठ रोगियों की संख्या चार है। इसलिए भारत सरकार की ओर से राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (एनएलईपी) चलाया गया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। स्वास्थ्य खंड झंडूता की ओर से विश्व कुष्ठ रोग अभियान के तहत ग्राम पंचायत रोहल के तहत नंद नगराओं के पुल निर्माण में कार्यरत प्रवासी मजदूरों के बीच कार्यक्रम कराया गया, जिसकी अध्यक्षता अभियंता शुभम ने की। इस दौरान उपस्थित सभी लोगों को कुष्ठ रोग निवारण के लिए शपथ दिलाई गई।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से शिक्षक दीप कुमार ने लोगों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि भारत में 30 जनवरी का दिन महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के साथ ही यह दिवस महात्मा गांधी के कुष्ठ रोगियों के प्रति प्रेम, सद्भाव और कुष्ठ रोगियों के प्रति समर्पण के रूप में भी मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य कुष्ठ रोग के प्रभाव और उपचार विकल्पों के बारे में जागरुकता बढ़ाना है। साथ ही समाज में इस रोग के कलंक और भेदभाव को समाप्त करना है। कुष्ठ रोग माइक्रो बैक्टीरिया लेप्रो नामक जीवाणु के कारण होने वाला एक पुराना संक्रामक रोग है। कुष्ठ रोग को हैनसेन रोग के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष का थीम एकजुट हो जाओ, काम करो, कुष्ठ रोग को समाप्त करो एक वैश्विक अनिवार्यता है। यह रोग लोगों की जागरुकता व एकजुटता से ही समाप्त किया जा सकता है। इस रोग की पहचान सबसे पहले स्पेनिश डॉक्टर फोलोर ने 1954 में की थी। भारत में कुष्ठ रोग के मामले की प्रसार दर घटकर प्रति 10,000 जनसंख्या पर 0.45 मामले पर रह गई है। 2021-22 के अनुसार भारत में 75,394 मामले सामने आए थे। वहीं हिमाचल की बात करें तो अप्रैल 2021 से 31 जनवरी 2022 तक हिमाचल में 101 मामले दर्ज हैं। जिले में कुष्ठ रोगियों की संख्या चार है। इसलिए भारत सरकार की ओर से राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (एनएलईपी) चलाया गया है।
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