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Bilaspur News: 14 साल में पांच गुना बढ़ी ओपिओइड उपयोगकर्ताओं की संख्या

Tue, 25 Jun 2024 11:44 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 25 Jun 2024 11:44 PM IST
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Number of opioid users increased five times in 14 years
अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस पर विशेष
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-अवैध नशा बाजार में ओपिओइड और भांग का अधिक बोलबाला, चिट्टे के मामलों में दर्ज की गई है सर्वाधिक वृद्धि

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। देश के अवैध नशा बाजारों में भांग और ओपिओइड का अधिक बोलबाला है। भारत में ओपिओइड उपयोगकर्ताओं की संख्या 14 साल में पांच गुना बढ़ गई है। सबसे अधिक वृद्धि मिलावटी हेरोइन (चिट्टा) के मामलों में हुई है। देश में नशीली दवाओं की लत एक गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। एम्स बिलासपुर में मनोचिकित्सक लोगों को इस विषय को लेकर जागरूक रहे हैं।
हर साल 26 जून को नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है। ओपिओइड को अफीम (डोडा, भुक्की), हेरोइन (ब्राउन शुगर), स्मैक और ट्रामाडोल जैसे फार्मास्यूटिकल ओपिओइड के रूप में बेचा जाता है। हिमाचल प्रदेश में नशा मुक्ति केंद्रों के 1,150 कैदियों पर किए गए 2020 के सर्वेक्षण के अनुसार 15 से 30 वर्ष की आयु में चिट्टा की लत ने भांग (चरस) और अन्य नशीले पदार्थों को पीछे छोड़ दिया है। अधिकांश शोधकर्ताओं के अनुसार 12 से 17 वर्ष की आयु मादक पदार्थों के सेवन की शुरुआत के लिए सबसे महत्वपूर्ण जोखिम वाली आयु है। इनहेलेंट पदार्थ पदार्थों की एकमात्र श्रेणी है, जिसका प्रचलन बच्चों और किशोरों में वयस्कों की तुलना में दोगुना है। फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी दिल्ली की 2019 की एक रिपोर्ट के अनुसार हेरोइन के साथ इस्तेमाल किए जाने वाले विभिन्न मिलावटी पदार्थों में से एक ट्राइमेथोप्रिम था जो पीडब्लूआईडी द्वारा प्रयोग की जाने वाली खुराक में महीनों तक प्लेटलेट काउंट कम कर सकता है।
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नशे के लिए एक ही सिरिंज का करते हैं प्रयोग
भारत में इंजेक्शन से नशा करने वाले करीब 27 प्रतिशत लोगों (पीडब्ल्यूआईडी) ने बताया है कि वे अपनी सुइयों और सिरिंजों का प्रयोग अपने साथियों के साथ करते हैं। इससे एचआईवी और हेपेटाइटिस सी और बी जैसे संक्रमणों के फैलने का खतरा पैदा होता है। एम्स बिलासपुर के मनोचिकित्सक ओपीडी में देखे गए पीडब्ल्यूआईडी (चिट्टा) की एक बड़ी संख्या हेपेटाइटिस सी वायरस से ग्रस्त पाई गई। हालांकि सटीक आंकड़े वर्तमान में उपलब्ध नहीं हैं।
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इनसेट
प्रदेश में 91 उपचार केंद्र पंजीकृत
वर्तमान में एम्स के अतिरिक्त हिमाचल प्रदेश राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण (स्रोत एसएमएचए वेबसाइट) के तहत मादक द्रव्यों के सेवन संबंधी विकार एवं पुनर्वास के लिए 91 उपचार केंद्र पंजीकृत हैं। ये सात मेडिकल कॉलेज और सरकारी अस्पतालों के अतिरिक्त हैं, जहां मनोचिकित्सक उपलब्ध हैं, जो हिमाचल प्रदेश में मादक द्रव्यों के सेवन संबंधी विकार के लिए उपचार प्रदान करते हैं। नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस हर साल 26 जून को मनाया जाता है। इस वर्ष का विषय है साक्ष्य स्पष्ट है रोकथाम में निवेश करें।

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रोकथाम के लिए उठाए जा रहे कदम
शराब और मादक द्रव्यों के सेवन की रोकथाम के लिए नशीली दवाओं की मांग में कमी (एनएपीडीडीआर) पर राष्ट्रीय कार्य योजना लागू की गई है। एनएपीडीडीआर के तहत नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) लागू किया जा रहा है। इसमें आपूर्ति पर अंकुश, आउटरीच, जागरूकता और मांग में कमी के प्रयास और उपचार को शामिल किया गया है। मादक द्रव्यों के सेवन की समस्या से निपटने के लिए साक्ष्य आधारित मादक द्रव्यों के सेवन की रोकथाम कार्यक्रम सबसे प्रभावी रणनीति है। इसका उद्देश्य मादक द्रव्यों के सेवन की शुरुआत को रोकना है।



कोट
वर्तमान में नशीली दवाओं का सेवन करने वाले व्यक्ति, उसके परिवार और समाज के लिए भयानक परिणाम सामने आ रहे हैं। पिछले कुछ साल में मादक पदार्थों की उपयोगिता की बहुत बड़ी वृद्धि हुई है। सर्वोत्तम रोकथाम रणनीतियों में सामान्य रूप से परिवारों, स्कूलों और समुदायों के साथ काम करना शामिल है। साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे और युवा वयस्कता तक स्वस्थ और सुरक्षित रहें, ताकि वे अपनी क्षमता का एहसास कर सकें और अपने समुदाय और समाज के लिए बेहतरीन सदस्य बनें। सुरक्षात्मक कारकों को बढ़ाने के लिए सभी के प्रयासों की आवश्यकता है।

-डॉ. ज्योति गुप्ता सहायक प्रोफेसर, मनोचिकित्सा, एम्स बिलासपुर
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