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संशोधित वेतनमान के अनुरूप वित्तीय लाभ न दिया जाना गलत : संघ
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- कृषि और बागवानी सेवानिवृत अधिकारी कल्याण संगठन ने जताया रोष
संवाद न्यूज एजेंसी
जुखाला (बिलासपुर)। कृषि और बागवानी सेवानिवृत्त अधिकारी कल्याण संगठन की बैठक घुमारवीं में हुई। इसकी अध्यक्षता संघ के प्रधान डॉ. अलबेल सिंह ठाकुर ने की। सर्व प्रथम सेवानिवृत्त उन अधिकारियों के लिए दो मिनट का मौन रखा गया जो परलोक सिधार गए हैं।
बैठक में निर्णय लिया गया कि संगठन की बैठक एक या दो महीनों के अंतराल पर आयोजित की जाएगी। ताकि सेवानिवृत्त अधिकारियों की मांगों एवं समस्याओं को सरकार के समक्ष उठाया जा सके। इसी संदर्भ में सेवानिवृत्त अधिकारियों ने सरकार की ओर से सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले वित्तीय लाभ समय पर न देने के बारे में चर्चा की। उन्होंने खेद प्रकट किया कि साल 2016 और 2022 के बीच सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान के अनुरूप मिलने वाले वित्तीय लाभों को न दिया जाना गलत ही नहीं बल्कि न्याय संगत भी नहीं है। सरकार के इस रवैये से जहां अधिकारियों और कर्मचारियों को वित्तीय समस्याओं से जूझना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर से मिलने वाली राशि पर ब्याज का भी नुकसान सहना पड़ रहा है। यदि सरकार का यही रवैया रहता है तो संगठन को इकट्ठा होकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। कुछ एक अधिकारियों ने यह भी व्यक्त किया कि सरकार की ओर से बजट प्रावधान न होने के कारण जिला स्तर पर आहरण और वितरण अधिकारी द्वारा उनके चिकित्सा बिलों का भुगतान समय पर नहीं किया जा रहा है। इसके कारण सेवानिवृत्त कर्मचारी और अधिकारियों में सरकार के प्रति रोष है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
जुखाला (बिलासपुर)। कृषि और बागवानी सेवानिवृत्त अधिकारी कल्याण संगठन की बैठक घुमारवीं में हुई। इसकी अध्यक्षता संघ के प्रधान डॉ. अलबेल सिंह ठाकुर ने की। सर्व प्रथम सेवानिवृत्त उन अधिकारियों के लिए दो मिनट का मौन रखा गया जो परलोक सिधार गए हैं।
बैठक में निर्णय लिया गया कि संगठन की बैठक एक या दो महीनों के अंतराल पर आयोजित की जाएगी। ताकि सेवानिवृत्त अधिकारियों की मांगों एवं समस्याओं को सरकार के समक्ष उठाया जा सके। इसी संदर्भ में सेवानिवृत्त अधिकारियों ने सरकार की ओर से सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले वित्तीय लाभ समय पर न देने के बारे में चर्चा की। उन्होंने खेद प्रकट किया कि साल 2016 और 2022 के बीच सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान के अनुरूप मिलने वाले वित्तीय लाभों को न दिया जाना गलत ही नहीं बल्कि न्याय संगत भी नहीं है। सरकार के इस रवैये से जहां अधिकारियों और कर्मचारियों को वित्तीय समस्याओं से जूझना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर से मिलने वाली राशि पर ब्याज का भी नुकसान सहना पड़ रहा है। यदि सरकार का यही रवैया रहता है तो संगठन को इकट्ठा होकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। कुछ एक अधिकारियों ने यह भी व्यक्त किया कि सरकार की ओर से बजट प्रावधान न होने के कारण जिला स्तर पर आहरण और वितरण अधिकारी द्वारा उनके चिकित्सा बिलों का भुगतान समय पर नहीं किया जा रहा है। इसके कारण सेवानिवृत्त कर्मचारी और अधिकारियों में सरकार के प्रति रोष है।
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