{"_id":"62b0c0f23c34bf0cb638bff7","slug":"no-road-facility-in-jurasi-village-people-facing-problem-bilaspur-news-sml4127709109","type":"story","status":"publish","title_hn":"पिछले 10 साल से नहीं बन पाई सोलग जुरासी के लिए चार किलोमीटर सड़क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पिछले 10 साल से नहीं बन पाई सोलग जुरासी के लिए चार किलोमीटर सड़क
विज्ञापन
जुरासी गांव में सड़क सुविधा न होने के कारण बुजुर्ग मरीज को पालकी में बैठाकर ले जाते लोग। फाईल फोट?
- फोटो : BILASPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिलासपुर। आजादी का अमृत महोत्सव के जश्न के बीच बिलासपुर की सदर विधानसभा क्षेत्र के जुरासी गांव ग्रामीण आज भी सड़क की बाट जोह रहे हैं। एक दशक (10 साल) की अवधि निकल गई, लेकिन गांव तक चार किलोमीटर सड़क नहीं बन पाई। सरकारी तंत्र की इस धींगामुश्ती का खामियाजा गांव के बाश़िदे भुगत रहे हैं। कई किलोमीटर की खड़ाई चढ़ाई पर पीठ पर बोझा ढोना उनकी नियति बन चुकी है।
बता दें कि गांव तक सड़क निर्माण के लिए करीब दस साल पहले बजट का प्रावधान नाबार्ड के तहत किया गया था। करीब सवा दो करोड़ का बजट पांच किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए मिला भी था। पूरी सड़क में से डेढ किलोमीटर हिस्से का निर्माण करीब 35 लाख रुपये खर्च कर दिया गया। इसके बाद निर्माण कार्य आगे बढ़ने के बजाय ठप होकर रह गया। प्रस्तावित सड़क निर्माण की स्थिति तब से अब यही है। ग्रामीण सरकार और प्रशासन को ज्ञापन पर ज्ञापन सौंप रहे हैं और सरकारी तंत्र और जनता के नुमाइंदों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
0
इनसेट
पालकी पर लाए जाते हैं मरीज
- सड़क के बिना हालात यह है कि अगर गांव में कोई ग्रामीण बीमार हो जाता है तो उसे पालकी में उठाकर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। पालकी में लाना भी आसान नहीं होता। तीखी चढ़ाई के बीच चार लोगों का पालकी एक साथ लेकर चलना बहुत मुश्किल होता है। ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर मरीज को सड़क तक पहुंचाते हैं।
विज्ञापन
0
इनसेट
एनओसी के बिना शुरू हुआ था काम
सोलग से जुरासी के लिए प्रस्तावित सड़क का निर्माण कार्य नाबार्ड के तहत शुरू कराया गया। चुनावों से जुड़ी वोटों की सियासी मजबूरी कहें तिकड़म, प्रभावशाली नेताओं ने वन विभाग से एनओसी लिए बिना ही इस सड़क का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया गया। नतीजा यह हुआ कि सड़क का काम बीच में ही बंद करना पड़ा।
इनसेट
लैप्स हो गया शेष बचा बजट
सोलग से जुरासी तक करीब पांच किलोमीटर सड़क निकलनी थी। इसे लिए 2.10 करोड़ का बजट भी मिला था। डेढ़ किलोमीटर पर 35 लाख खर्च किया और बाद में सालों तक काम पूरा न होने के कारण बाकी बचा बजट लैप्स हो गया।
इनसेट
वन विभाग की एनओसी के लिए लग गए आठ साल
2012 में सड़क का कार्य बंद होने के बाद ग्रामीणों ने इसकी एनओसी के लिए वन विभाग को आवेदन किया। विभाग की लेट लतीफी और प्रशासन की अनदेखी के चलते इस एनओसी को मिलने में आठ साल लग गए। साल 2020 में तत्कालीन उपायुक्त के प्रयासों से सड़क की एनओसी क्लीयर हुई। एनओसी मिलने के बाद भी सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ।
इनसेट
स्कूल तक पैदल सफर करते हैं बच्चे
सड़क न होने के कारण गांव के बच्चों को भी स्कूल जाने के लिए कई किलोमीटर का सफर पैदल ही करना पड़ता है। स्थानीय ग्रामीणों के कई मवेशी सड़क न होने के चलते गांव नहीं पहुंच पाए और बीच में ही पहाड़ी से गिर कर दम तोड़ गए। ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। गांव में शौचालय या अन्य निर्माण कार्य के लिए ग्रामीणों को एक ट्रक माल ढुलाई के लिए 15,000 से 20,000 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ते हैं।
00
कोट्स
इस सड़क का काम पिछले 10 वर्षों से लटक रहा है। सड़क निर्माण के लिए जो पैसा आया था वह वापस चला गया। सरकार और प्रशासन से कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
कुलदीप ठाकुर, समाजसेवी
कोटस
एनओसी मिलने के बाद भी गांव के लिए सड़क का निर्माण कार्य शुरू क्यों नहीं हो पा रहा है, लोक निर्माण विभाग से इसकी जानकारी ली जाएगी। ग्रामीणों को सड़क से जोड़ना मुख्य उद्देश्य है। ग्रामीणों की समस्या का जल्द निवारण किया जाएगा।
पंकज राय, जिला उपायुक्त बिलासपुर।
0
जुरासी सड़क की डीपीआर तैयार कर नाबार्ड को मंजूरी के लिए भेजी गई है। इस सड़क के लिए जिला मिनरल फंड से विभाग को 30 लाख रुपये का बजट मिला है। सीएम ने खुद इस रोड की घोषणा की है। इसे प्राथमिकता के तौर पर पूरा किया जाएगा।
राजेंद्र जुबलानी
अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग
विज्ञापन
बता दें कि गांव तक सड़क निर्माण के लिए करीब दस साल पहले बजट का प्रावधान नाबार्ड के तहत किया गया था। करीब सवा दो करोड़ का बजट पांच किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए मिला भी था। पूरी सड़क में से डेढ किलोमीटर हिस्से का निर्माण करीब 35 लाख रुपये खर्च कर दिया गया। इसके बाद निर्माण कार्य आगे बढ़ने के बजाय ठप होकर रह गया। प्रस्तावित सड़क निर्माण की स्थिति तब से अब यही है। ग्रामीण सरकार और प्रशासन को ज्ञापन पर ज्ञापन सौंप रहे हैं और सरकारी तंत्र और जनता के नुमाइंदों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
विज्ञापन
0
इनसेट
पालकी पर लाए जाते हैं मरीज
- सड़क के बिना हालात यह है कि अगर गांव में कोई ग्रामीण बीमार हो जाता है तो उसे पालकी में उठाकर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। पालकी में लाना भी आसान नहीं होता। तीखी चढ़ाई के बीच चार लोगों का पालकी एक साथ लेकर चलना बहुत मुश्किल होता है। ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर मरीज को सड़क तक पहुंचाते हैं।
विज्ञापन
0
इनसेट
एनओसी के बिना शुरू हुआ था काम
सोलग से जुरासी के लिए प्रस्तावित सड़क का निर्माण कार्य नाबार्ड के तहत शुरू कराया गया। चुनावों से जुड़ी वोटों की सियासी मजबूरी कहें तिकड़म, प्रभावशाली नेताओं ने वन विभाग से एनओसी लिए बिना ही इस सड़क का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया गया। नतीजा यह हुआ कि सड़क का काम बीच में ही बंद करना पड़ा।
इनसेट
लैप्स हो गया शेष बचा बजट
सोलग से जुरासी तक करीब पांच किलोमीटर सड़क निकलनी थी। इसे लिए 2.10 करोड़ का बजट भी मिला था। डेढ़ किलोमीटर पर 35 लाख खर्च किया और बाद में सालों तक काम पूरा न होने के कारण बाकी बचा बजट लैप्स हो गया।
इनसेट
वन विभाग की एनओसी के लिए लग गए आठ साल
2012 में सड़क का कार्य बंद होने के बाद ग्रामीणों ने इसकी एनओसी के लिए वन विभाग को आवेदन किया। विभाग की लेट लतीफी और प्रशासन की अनदेखी के चलते इस एनओसी को मिलने में आठ साल लग गए। साल 2020 में तत्कालीन उपायुक्त के प्रयासों से सड़क की एनओसी क्लीयर हुई। एनओसी मिलने के बाद भी सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ।
इनसेट
स्कूल तक पैदल सफर करते हैं बच्चे
सड़क न होने के कारण गांव के बच्चों को भी स्कूल जाने के लिए कई किलोमीटर का सफर पैदल ही करना पड़ता है। स्थानीय ग्रामीणों के कई मवेशी सड़क न होने के चलते गांव नहीं पहुंच पाए और बीच में ही पहाड़ी से गिर कर दम तोड़ गए। ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। गांव में शौचालय या अन्य निर्माण कार्य के लिए ग्रामीणों को एक ट्रक माल ढुलाई के लिए 15,000 से 20,000 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ते हैं।
00
कोट्स
इस सड़क का काम पिछले 10 वर्षों से लटक रहा है। सड़क निर्माण के लिए जो पैसा आया था वह वापस चला गया। सरकार और प्रशासन से कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
कुलदीप ठाकुर, समाजसेवी
कोटस
एनओसी मिलने के बाद भी गांव के लिए सड़क का निर्माण कार्य शुरू क्यों नहीं हो पा रहा है, लोक निर्माण विभाग से इसकी जानकारी ली जाएगी। ग्रामीणों को सड़क से जोड़ना मुख्य उद्देश्य है। ग्रामीणों की समस्या का जल्द निवारण किया जाएगा।
पंकज राय, जिला उपायुक्त बिलासपुर।
0
जुरासी सड़क की डीपीआर तैयार कर नाबार्ड को मंजूरी के लिए भेजी गई है। इस सड़क के लिए जिला मिनरल फंड से विभाग को 30 लाख रुपये का बजट मिला है। सीएम ने खुद इस रोड की घोषणा की है। इसे प्राथमिकता के तौर पर पूरा किया जाएगा।
राजेंद्र जुबलानी
अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग

जुरासी गांव के लिए जाने वाला रास्ता।संवाद- फोटो : BILASPUR