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पापी कितना भी बलशाली हो, उसका अंत निश्चित है : भारद्वाज
Wed, 13 May 2026 11:49 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Wed, 13 May 2026 11:49 PM IST
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भांजे कृष्ण ने मामा कंस को किया पाप मुक्त
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। ग्राम घराण पंचायत के गांव टिहरी में स्थित शिव मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन कथावाचक पंडित सुरेश भारद्वाज ने कंस वध का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने कहा कि कंस को भय था कि उसके प्राणों का घातक न सिर्फ जन्म ले चुका है बल्कि सुरक्षित स्थान पर पहुंच गया है। शिशु रूप कान्हा को मारने के लिए कंस ने कागासुर, बकासुर तथा पूतना जैसे दुर्दांत राक्षसों को भेजा लेकिन ईश्वर ने उनका वध कर दिया। कंस ने अपने षडयंत्र की पूर्ति करते एक मल युद्ध रखा। नंद बाबा अपने 11 वर्षीय कन्हैया और बलराम को लेकर युद्ध देखने के लिए पहुंच गए। वहां पर सबसे पहले इन बालकों ने जब शिव धनुष तोड़ा तो कंस का भय और बढ़ गया। क्योंकि कंस का मालूम था कि जो इस धनुष को तोड़ेगा वही उसका काल बनेगा। मलयुद्ध भूमि पर चारों ओर बड़े बड़े दुर्दांत योद्धा कंस ने तैनात कर दिए और स्वयं सबसे ऊपर मचान पर बैठकर युद्ध देखने लगा। इन दोनो नौनिहालों ने कंस के सभी योद्धाओं को मार दिया। भगवान श्रीकृष्ण ने एक छलांग लगाई और कंस को पकड़ा तथा भूमि पर पटक दिया। उन्होंने कंस को उसके बालों से पकड़ा तो कंस मृत्यु नजदीक देख जीवन की भिक्षा मांगने लगा। इस पर कृष्ण ने कहा कि जिसे वह पकड़ लेते हैं उसका वे उद्धार करके ही छोड़ते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। ग्राम घराण पंचायत के गांव टिहरी में स्थित शिव मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन कथावाचक पंडित सुरेश भारद्वाज ने कंस वध का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने कहा कि कंस को भय था कि उसके प्राणों का घातक न सिर्फ जन्म ले चुका है बल्कि सुरक्षित स्थान पर पहुंच गया है। शिशु रूप कान्हा को मारने के लिए कंस ने कागासुर, बकासुर तथा पूतना जैसे दुर्दांत राक्षसों को भेजा लेकिन ईश्वर ने उनका वध कर दिया। कंस ने अपने षडयंत्र की पूर्ति करते एक मल युद्ध रखा। नंद बाबा अपने 11 वर्षीय कन्हैया और बलराम को लेकर युद्ध देखने के लिए पहुंच गए। वहां पर सबसे पहले इन बालकों ने जब शिव धनुष तोड़ा तो कंस का भय और बढ़ गया। क्योंकि कंस का मालूम था कि जो इस धनुष को तोड़ेगा वही उसका काल बनेगा। मलयुद्ध भूमि पर चारों ओर बड़े बड़े दुर्दांत योद्धा कंस ने तैनात कर दिए और स्वयं सबसे ऊपर मचान पर बैठकर युद्ध देखने लगा। इन दोनो नौनिहालों ने कंस के सभी योद्धाओं को मार दिया। भगवान श्रीकृष्ण ने एक छलांग लगाई और कंस को पकड़ा तथा भूमि पर पटक दिया। उन्होंने कंस को उसके बालों से पकड़ा तो कंस मृत्यु नजदीक देख जीवन की भिक्षा मांगने लगा। इस पर कृष्ण ने कहा कि जिसे वह पकड़ लेते हैं उसका वे उद्धार करके ही छोड़ते हैं।
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