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Bilaspur News: स्वारघाट के जंगलों में 5 हजार खैर के पेड़ों के कटान में अब तक नहीं हुई कार्रवाई
Sat, 09 Aug 2025 11:44 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sat, 09 Aug 2025 11:44 PM IST
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विभाग, ठेकेदार की मिलीभगत के आरोप, जनवरी से अप्रैल के बीच काटे हरे-भरे पेड़
सूखे की आड़ में माफिया का खेल, पांच ट्रक की थी अनुमति, निकली हैं 150 से ज्यादा गाड़ियां
कल्लर बीट के संवेदनशील ट्राई फेंसिंग प्लांटेशन क्षेत्र से भी हुआ था खैर का अवैध कटान
मंगल ठाकुर
बरठीं (बिलासपुर)। स्वारघाट वन परिक्षेत्र के छड़ोल, कचौली और कल्लर जंगलों में जनवरी से अप्रैल के बीच करीब पांच हजार हरे-भरे खैर के पेड़ों का अवैध कटान हुआ। वन माफिया ने सूखे पेड़ों की आड़ में कटान को अंजाम दिया, लेकिन छह माह बीतने के बाद भी वन विभाग कार्रवाई नहीं कर सका। न तो बीट गार्ड पर गाज गिरी, न ही ठेकेदारों पर शिकंजा कसा गया।
वन विभाग ने अवैध कटान को स्वीकारते हुए करीब आठ लाख रुपये की डीआर काटी है, लेकिन लोगों का कहना है कि यह कटान विभाग–ठेकेदार की मिलीभगत से हुआ है। कल्लर बीट के ट्राई फेंसिंग प्लांटेशन जैसे संवेदनशील क्षेत्र से 50 साल पुराने पेड़ तक काट दिए गए। जमीन में तीन-तीन फीट तक खोदकर पेड़ों की जड़ें उखाड़ दी गईं। शिकायतों में आरोप है कि ठेकेदारों ने निजी भूमि पर सूखे पेड़ काटने की अनुमति ली, लेकिन सरकारी जंगल से हजारों हरे पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला दी गई। नियमों के मुताबिक जंगल झाड़ी श्रेणी की भूमि चाहे निजी हो या सरकारी से खैर का कटान पूरी तरह प्रतिबंधित है। वन विभाग ने केवल पांच ट्रकों को लकड़ी ले जाने की अनुमति दी थी, लेकिन 150 से ज्यादा गाड़ियां लकड़ी ढोकर बाहरी राज्यों में भेजी गईं। कटान के बाद लकड़ी को खड्ड तक पहुंचाया गया और वहां से गाड़ियों में लादकर बाहरी राज्यों में भेजा गया। हिमाचल–पंजाब बॉर्डर पर नाकाबंदी के बावजूद खैर से लदी गाड़ियां सीमा पार कैसे निकल गईं, यह भी विभाग के लिए बड़ा सवाल है।
शिकायतकर्ताओं ने इस मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय, स्टेट विजिलेंस और प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट को भेजी है। गंभीरता को देखते हुए प्रदेश वन विभाग ने जांच टीम मौके पर भेजी थी। डीएफओ बिलासपुर राजीव कुमार ने बताया कि स्वारघाट रेंज की तीनों बीट में हुए अवैध कटान की जांच पूरी हो चुकी है, रिपोर्ट शिमला मुख्यालय को भेज दी गई है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
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सूखे की आड़ में माफिया का खेल, पांच ट्रक की थी अनुमति, निकली हैं 150 से ज्यादा गाड़ियां
कल्लर बीट के संवेदनशील ट्राई फेंसिंग प्लांटेशन क्षेत्र से भी हुआ था खैर का अवैध कटान
मंगल ठाकुर
बरठीं (बिलासपुर)। स्वारघाट वन परिक्षेत्र के छड़ोल, कचौली और कल्लर जंगलों में जनवरी से अप्रैल के बीच करीब पांच हजार हरे-भरे खैर के पेड़ों का अवैध कटान हुआ। वन माफिया ने सूखे पेड़ों की आड़ में कटान को अंजाम दिया, लेकिन छह माह बीतने के बाद भी वन विभाग कार्रवाई नहीं कर सका। न तो बीट गार्ड पर गाज गिरी, न ही ठेकेदारों पर शिकंजा कसा गया।
वन विभाग ने अवैध कटान को स्वीकारते हुए करीब आठ लाख रुपये की डीआर काटी है, लेकिन लोगों का कहना है कि यह कटान विभाग–ठेकेदार की मिलीभगत से हुआ है। कल्लर बीट के ट्राई फेंसिंग प्लांटेशन जैसे संवेदनशील क्षेत्र से 50 साल पुराने पेड़ तक काट दिए गए। जमीन में तीन-तीन फीट तक खोदकर पेड़ों की जड़ें उखाड़ दी गईं। शिकायतों में आरोप है कि ठेकेदारों ने निजी भूमि पर सूखे पेड़ काटने की अनुमति ली, लेकिन सरकारी जंगल से हजारों हरे पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला दी गई। नियमों के मुताबिक जंगल झाड़ी श्रेणी की भूमि चाहे निजी हो या सरकारी से खैर का कटान पूरी तरह प्रतिबंधित है। वन विभाग ने केवल पांच ट्रकों को लकड़ी ले जाने की अनुमति दी थी, लेकिन 150 से ज्यादा गाड़ियां लकड़ी ढोकर बाहरी राज्यों में भेजी गईं। कटान के बाद लकड़ी को खड्ड तक पहुंचाया गया और वहां से गाड़ियों में लादकर बाहरी राज्यों में भेजा गया। हिमाचल–पंजाब बॉर्डर पर नाकाबंदी के बावजूद खैर से लदी गाड़ियां सीमा पार कैसे निकल गईं, यह भी विभाग के लिए बड़ा सवाल है।
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शिकायतकर्ताओं ने इस मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय, स्टेट विजिलेंस और प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट को भेजी है। गंभीरता को देखते हुए प्रदेश वन विभाग ने जांच टीम मौके पर भेजी थी। डीएफओ बिलासपुर राजीव कुमार ने बताया कि स्वारघाट रेंज की तीनों बीट में हुए अवैध कटान की जांच पूरी हो चुकी है, रिपोर्ट शिमला मुख्यालय को भेज दी गई है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
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