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Bilaspur News: रेल टनल के ऊपर क्षतिग्रस्त घरों की एनआईटी टीम कर रही जांच

Sun, 17 Aug 2025 11:22 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 17 Aug 2025 11:22 PM IST
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NIT team is investigating the damaged houses above the railway tunnel
रेल लाइन टनल के बाहर धरने पर बैठे नोग गांव के लोग। संवाद
78वें दिन भी जारी हरा प्रभावित ग्रामीणों का धरना
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चार मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त, कई में दरारें बढ़ीं
ग्रामीण बोले-टनल ब्लास्टिंग से हुआ नुकसान, चाहिए मुआवजा
प्रशासन ने पहले पीडब्ल्यूडी से कराई जांच, लेकिन नहीं निकला निष्कर्ष
17 जून को मंत्री ने दिया था समाधान का आश्वासन, अब तक नहीं हुई कार्रवाई
बरसात में दरारों से दहशत में ग्रामीण, लिखित आश्वासन पर अड़े


संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। रेल लाइन की टनल के ऊपर क्षतिग्रस्त घरों का एनआईटी विशेषज्ञों ने अध्ययन शुरू कर दिया है। शहर के साथ लगते बध्यात में भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेल लाइन की निर्माणाधीन टनल नंबर-17 के ऊपर नोग गांव में घरों क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसकी एनआईटी हमीरपुर के विशेषज्ञ पड़ताल कर रहे हैं। विशेषज्ञों की रिपोर्ट मिलने के बाद प्रशासन कार्रवाई शुरू करेगा।
प्रशासन ने पहले लोक निर्माण विभाग के विशेषज्ञों से क्षतिग्रस्त घरों की जांच कराई थी, लेकिन कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल पाया। विभाग की रिपोर्ट में स्पष्ट नहीं हो सका कि घरों को नुकसान टनल निर्माण के दौरान हो रही ब्लास्टिंग से हुआ है या फिर प्राकृतिक रूप से जमीन धंसने के कारण। इसके बाद प्रशासन ने प्रभावित लोगों के साथ बैठक की। बैठक में ग्रामीणों ने एनआईटी के विशेषज्ञों से जांच कराने की मांग की। प्रशासन ने उनकी मांग को स्वीकार करते हुए एनआईटी हमीरपुर की टीम से सहायता ली।
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एनआईटी की टीम अब तक चार बार घरों का निरीक्षण कर चुकी है, लेकिन भारी बारिश और सीलन के चलते अध्ययन में दिक्कत आ रही है। इस बीच, निर्माणाधीन टनल के बाहर प्रभावित लोगों का 78वें दिन में भी धरना जारी रहा। लोग क्रमिक भूख हड़ताल भी कर रहे हैं। रविवार को अजय कुमार, सुखमणि देवी, विजय कुमार, बंटी देवी और मीना देवी भूख हड़ताल पर बैठे। उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से अब तक कोई लिखित आश्वासन नहीं दिया गया है। ऐसा लगता है जैसे प्रशासन आंखें मूंदकर बैठा है। टीमें निरीक्षण के लिए आती हैं, लेकिन समाधान नहीं निकलता। 15 दिन पहले आई टीम ने मिट्टी की जांच का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक सैंपल भी नहीं लिए गए। एक साल से अधिक समय से समस्या जस की तस बनी हुई है। घरों की दरारें लगातार बढ़ रही हैं और लोग बरसात में भय के साए में रह रहे हैं।
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नोग गांव में कई घरों में दरारें आई हैं। चार मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि टनल निर्माण में हो रही भारी ब्लास्टिंग से उनके घर क्षतिग्रस्त हुए हैं। प्रभावित लोग मुआवजे की मांग कर रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर पिछले साल पहली बार धरना दिया गया था। इस साल मार्च में भी धरना हुआ, जिसमें समस्या समाधान के लिए कमेटी बनाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसके बाद जून में फिर से धरना और भूख हड़ताल शुरू हुई। कई दिनों तक रेल लाइन का काम भी बंद रहा। 17 जून को प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और उसके बाद मंत्री राजेश धर्माणी भी प्रभावितों से मिले। उन्होंने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया था। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिलता, उनका धरना जारी रहेगा।

17 जून के बाद से ही प्रशासन नोग गांव में क्षतिग्रस्त मकानों को लेकर कार्रवाई कर रहा है। अब इन घरों का एनआईटी हमीरपुर के विशेषज्ञ अध्ययन कर रहे हैं। विशेषज्ञों की रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. राजदीप सिंह, एसडीएम सदर
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