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Bilaspur News: बिलासपुर की 101 पंचायतों में बनेंगी दुग्ध सहकारी समितियां
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पहले चरण में 25 पंचायतों का हुआ चयन, क्लस्टर स्तर पर होंगे कलेक्शन सेंटर
किसानों को मिलेगा दूध का उचित मूल्य, सरकार कराएगी गुजरात एक्सपोजर विजिट
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले की 101 पंचायतों में दुग्ध सहकारी समितियों के गठन की तैयारी शुरू हो गई है। उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रथम चरण में 25 पंचायतों में समितियों का गठन किया जाएगा। प्रक्रिया अंतिम दौर में है और शीघ्र ही इन समितियों को आवश्यक लाइसेंस जारी कर दिए जाएंगे।
बैठक में मिल्कफेड मंडी के विवेक ठाकुर, परियोजना अधिकारी डीआरडीए, जिला पशुपालन अधिकारी और सहकारिता विभाग के सहायक पंजीयक भास्कर सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। उपायुक्त ने बताया कि पशुपालन विभाग के सर्वेक्षण के अनुसार जिले की पंचायतों में प्रतिदिन औसतन 200 लीटर अतिरिक्त दूध का उत्पादन हो रहा है। इसके प्रभावी संग्रहण और विपणन के लिए पंचायत स्तर पर समितियां बनाई जा रही हैं। साथ ही क्लस्टर स्तर पर मिल्क कलेक्शन सेंटर स्थापित होंगे, जहां से दूध को चिलिंग प्वाइंट तक पहुंचाया जाएगा। कहा कि दूसरे चरण में उन पंचायतों को शामिल किया जाएगा, जहां प्रतिदिन 100 लीटर से अधिक सरप्लस दूध का उत्पादन होता है। सरकार किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने के लिए दुग्ध उत्पाद निर्माण को बढ़ावा दे रही है। राज्य सहकारी डेयरी उत्पादक समितियों के माध्यम से दूध और दुग्ध उत्पादों की खरीद, प्रसंस्करण और विपणन की संपूर्ण प्रक्रिया को सशक्त बनाया जाएगा। किसानों को सहकारी तंत्र से परिचित कराने के लिए सरकार गुजरात जैसे अग्रणी राज्यों में एक्सपोजर विजिट की भी व्यवस्था करेगी। उपायुक्त ने कहा कि पशुपालन और डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने इच्छुक पंचायतों से आग्रह किया कि वे पशुपालन विभाग से संपर्क कर समितियों के गठन की प्रक्रिया में शामिल हों।
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किसानों को मिलेगा दूध का उचित मूल्य, सरकार कराएगी गुजरात एक्सपोजर विजिट
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले की 101 पंचायतों में दुग्ध सहकारी समितियों के गठन की तैयारी शुरू हो गई है। उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रथम चरण में 25 पंचायतों में समितियों का गठन किया जाएगा। प्रक्रिया अंतिम दौर में है और शीघ्र ही इन समितियों को आवश्यक लाइसेंस जारी कर दिए जाएंगे।
बैठक में मिल्कफेड मंडी के विवेक ठाकुर, परियोजना अधिकारी डीआरडीए, जिला पशुपालन अधिकारी और सहकारिता विभाग के सहायक पंजीयक भास्कर सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। उपायुक्त ने बताया कि पशुपालन विभाग के सर्वेक्षण के अनुसार जिले की पंचायतों में प्रतिदिन औसतन 200 लीटर अतिरिक्त दूध का उत्पादन हो रहा है। इसके प्रभावी संग्रहण और विपणन के लिए पंचायत स्तर पर समितियां बनाई जा रही हैं। साथ ही क्लस्टर स्तर पर मिल्क कलेक्शन सेंटर स्थापित होंगे, जहां से दूध को चिलिंग प्वाइंट तक पहुंचाया जाएगा। कहा कि दूसरे चरण में उन पंचायतों को शामिल किया जाएगा, जहां प्रतिदिन 100 लीटर से अधिक सरप्लस दूध का उत्पादन होता है। सरकार किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने के लिए दुग्ध उत्पाद निर्माण को बढ़ावा दे रही है। राज्य सहकारी डेयरी उत्पादक समितियों के माध्यम से दूध और दुग्ध उत्पादों की खरीद, प्रसंस्करण और विपणन की संपूर्ण प्रक्रिया को सशक्त बनाया जाएगा। किसानों को सहकारी तंत्र से परिचित कराने के लिए सरकार गुजरात जैसे अग्रणी राज्यों में एक्सपोजर विजिट की भी व्यवस्था करेगी। उपायुक्त ने कहा कि पशुपालन और डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने इच्छुक पंचायतों से आग्रह किया कि वे पशुपालन विभाग से संपर्क कर समितियों के गठन की प्रक्रिया में शामिल हों।
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