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Bilaspur News: दाल और चीनी पर थोक में 2.5, खुदरा में 5.5 फीसदी तक मार्जिन तय
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जिला दंडाधिकारी ने थोक और खुदरा विक्रेताओं के लिए लाभ की सीमा की तय, दुकानों पर मूल्य सूची लगाना अनिवार्य
सब्जियों पर 24 से 39 फीसदी तक लाभ की सीमा, उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जरूरी सामान की बिक्री पर दुकानदार अब मनमाना मुनाफा नहीं कमा सकेंगे। जिला दंडाधिकारी राहुल कुमार ने हिमाचल प्रदेश जमाखोरी और मुनाफाखोरी निवारण आदेश, 1977 के तहत जिले में विभिन्न आवश्यक वस्तुओं के लिए थोक और खुदरा बिक्री की अधिकतम लाभ सीमा तय कर दी है। साथ ही सभी खुदरा विक्रेताओं को दुकानों में ऐसी जगह मूल्य सूची लगाने के निर्देश दिए हैं, जहां ग्राहक उसे आसानी से देख सकें।
नई व्यवस्था के तहत गेहूं, चना, जौ, चावल, गुड़, शक्कर, खांडसारी, चीनी, दालें, कागज, मोटे ऊनी कपड़े और चाय पत्ती की थोक बिक्री पर अधिकतम 2.5 फीसदी और खुदरा बिक्री पर 5.5 फीसदी तक लाभ लिया जा सकेगा। कॉपियों और अभ्यास पुस्तिकाओं पर थोक में चार और खुदरा में 7.5 फीसदी मार्जिन तय किया गया है। अंडों पर थोक में पांच और खुदरा में 7.5 फीसदी लाभ सीमा रहेगी। ब्रेड की बिक्री में थोक विक्रेता अधिकतम 7.5 फीसदी और खुदरा विक्रेता 8.5 फीसदी या अंकित मूल्य, जो भी लागू हो, के अनुसार ही कीमत वसूल सकेंगे। प्याज, आलू, लहसुन, अदरक, अरबी और जिमीकंद जैसी फल एवं जल्द खराब न होने वाली सब्जियों पर थोक विक्रेताओं के लिए पांच फीसदी लाभ मार्जिन तय किया गया है। इसमें एक फीसदी बाजार शुल्क भी शामिल होगा। खुदरा विक्रेताओं के लिए इन वस्तुओं पर भाड़ा, लोडिंग-अनलोडिंग और नुकसान को शामिल करते हुए 24 फीसदी तक मार्जिन निर्धारित किया गया है। अन्य जल्द खराब होने वाली सब्जियों पर खुदरा विक्रेता अधिकतम 39 फीसदी लाभ ले सकेंगे।
एलपीजी, केरोसिन, मांस, चिकन, मछली, दूध, दही, पनीर और पके हुए भोजन की बिक्री जिला मजिस्ट्रेट की ओर से समय-समय पर तय दरों के अनुसार ही करनी होगी। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि थोक और खुदरा दोनों तरह का कारोबार करने वाला व्यापारी किसी वस्तु पर निर्धारित लाभ मार्जिन केवल एक ही स्थान और एक ही स्तर पर ले सकेगा। सचिव एपीएमसी को फॉर्म-आर और फॉर्म-क्यू जारी करवाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला दंडाधिकारी ने सभी एसडीएम, उप पुलिस अधीक्षकों, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले निरीक्षकों और एपीएमसी सचिव को आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
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सब्जियों पर 24 से 39 फीसदी तक लाभ की सीमा, उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जरूरी सामान की बिक्री पर दुकानदार अब मनमाना मुनाफा नहीं कमा सकेंगे। जिला दंडाधिकारी राहुल कुमार ने हिमाचल प्रदेश जमाखोरी और मुनाफाखोरी निवारण आदेश, 1977 के तहत जिले में विभिन्न आवश्यक वस्तुओं के लिए थोक और खुदरा बिक्री की अधिकतम लाभ सीमा तय कर दी है। साथ ही सभी खुदरा विक्रेताओं को दुकानों में ऐसी जगह मूल्य सूची लगाने के निर्देश दिए हैं, जहां ग्राहक उसे आसानी से देख सकें।
नई व्यवस्था के तहत गेहूं, चना, जौ, चावल, गुड़, शक्कर, खांडसारी, चीनी, दालें, कागज, मोटे ऊनी कपड़े और चाय पत्ती की थोक बिक्री पर अधिकतम 2.5 फीसदी और खुदरा बिक्री पर 5.5 फीसदी तक लाभ लिया जा सकेगा। कॉपियों और अभ्यास पुस्तिकाओं पर थोक में चार और खुदरा में 7.5 फीसदी मार्जिन तय किया गया है। अंडों पर थोक में पांच और खुदरा में 7.5 फीसदी लाभ सीमा रहेगी। ब्रेड की बिक्री में थोक विक्रेता अधिकतम 7.5 फीसदी और खुदरा विक्रेता 8.5 फीसदी या अंकित मूल्य, जो भी लागू हो, के अनुसार ही कीमत वसूल सकेंगे। प्याज, आलू, लहसुन, अदरक, अरबी और जिमीकंद जैसी फल एवं जल्द खराब न होने वाली सब्जियों पर थोक विक्रेताओं के लिए पांच फीसदी लाभ मार्जिन तय किया गया है। इसमें एक फीसदी बाजार शुल्क भी शामिल होगा। खुदरा विक्रेताओं के लिए इन वस्तुओं पर भाड़ा, लोडिंग-अनलोडिंग और नुकसान को शामिल करते हुए 24 फीसदी तक मार्जिन निर्धारित किया गया है। अन्य जल्द खराब होने वाली सब्जियों पर खुदरा विक्रेता अधिकतम 39 फीसदी लाभ ले सकेंगे।
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एलपीजी, केरोसिन, मांस, चिकन, मछली, दूध, दही, पनीर और पके हुए भोजन की बिक्री जिला मजिस्ट्रेट की ओर से समय-समय पर तय दरों के अनुसार ही करनी होगी। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि थोक और खुदरा दोनों तरह का कारोबार करने वाला व्यापारी किसी वस्तु पर निर्धारित लाभ मार्जिन केवल एक ही स्थान और एक ही स्तर पर ले सकेगा। सचिव एपीएमसी को फॉर्म-आर और फॉर्म-क्यू जारी करवाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला दंडाधिकारी ने सभी एसडीएम, उप पुलिस अधीक्षकों, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले निरीक्षकों और एपीएमसी सचिव को आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
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