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Bilaspur News: खाकी-खादी की नाक के नीचे पाताल खोद रहा माफिया
Sat, 03 Jan 2026 11:28 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sat, 03 Jan 2026 11:28 PM IST
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घुमारवीं सीर खड्ड में हुआ अवैध खनन। संवाद
विशेष ग्राउंड रिपोर्ट
घुमारवीं में कानून से खेल रहा खनन माफिया का बोलबाला
एसडीएम दफ्तर से 300 मीटर दूर दिनदहाड़े चल रही जेसीबी
महीने भर पहले जिस चेक डैम का हुआ उद्घाटन, अवैध खनन ने उसकी नींव हिलाई
सीर खड्ड में जल स्रोतों पर मंडराया सूखने का खतरा
संजीव शामा
घुमारवीं (बिलासपुर)। प्रदेश में सरकार बदलती है, नियम बदलते हैं और दावे बदलते हैं, लेकिन घुमारवीं में खनन माफिया की किस्मत नहीं बदलती। यहां कानून का खौफ खत्म हो चुका है कि अब माफिया को रात के अंधेरे का इंतजार नहीं करना पड़ता। एसडीएम कार्यालय और पुलिस थाना, जहां से पूरे उपमंडल की कानून व्यवस्था चलती है, वहां से मात्र 300 मीटर की दूरी पर सिथत सीर खड्ड में माफिया बेखौफ खनन कर रहा है। सीधे तौर पर पुलिस और प्रशासन के लिए चुनौती भी दे रहा है।
हैरानी की बात यह है कि इस काले धंधे को सफेद चादर से ढकने की कोशिश की जा रही है। संस्थाओं और जनहित के नाम का सहारा लेकर खड्डों का सीना छलनी किया जा रहा है। चंद रुपयों की मदनी के लिए कुछ रसूखदार लोग प्राकृतिक संसाधनों को दीमक की तरह चाट रहे हैं।
अभी पिछले महीने ही मुख्यमंत्री ने सीर खड्ड में जिस चेक डैम का उद्घाटन बड़े तामझाम के साथ किया था, माफिया ने उसे ही अपना निशाना बना लिया है। चेक डैम से महज 100 मीटर की दूरी पर हो रहा अवैध खनन इस सरकारी संपत्ति को ताश के पत्तों की तरह ढहा सकता है। सरकार ने माइनिंग रोकने के लिए कई विभागों को पावर दी है, लेकिन पुलिस और खनन विभाग के अलावा बाकी सब सो हुए हैं। कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। सवाल यह है कि क्या इन अधिकारियों को दिन के उजाले में चलती जेसीबी नजर नहीं आती? या फिर माफिया के रसूख के आगे अधिकारियों की फाइलें दब गई हैं? यदि आज इन मशीनों के पहिए नहीं थमे, तो घुमारवीं के जल स्रोत इतिहास बन जाएंगे। पेयजल और सिंचाई योजनाएं ठप होने की कगार पर हैं। जनता अब सीधे सवाल पूछ रही है कि साहब, आखिर कब जागेगा प्रशासन?। जहां जनता को दिन दहाड़े माफिया की दादागिरी दिख रही है, वहीं विभाग का कहना है कि हमें कुछ पता ही नहीं है। अब सवाल यह है कि मुख्यमंत्री के उद्घाटन किए गए प्रोजेक्ट के पास खनन होना क्या सरकार को खुली चुनौती नहीं है? क्या एसडीएम और पुलिस की नाक के नीचे बिना ऊपर की सेटिंग के यह संभव है? जल स्रोत सूखने पर जो हाहाकार मचेगा, उसका जिम्मेदार कौन होगा? संवाद
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कोट
मामला अभी ध्यान में नहीं है, लेकिन अगर एसडीएम कार्यालय के पास ऐसा हो रहा है तो यह गंभीर है। आज ही टीम भेजकर छापा मारा जाएगा, जो भी दोषी पाया गया, गाड़ी और मशीन जब्त कर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
हरविंदर सिंह, खनन अधिकारी, बिलासपुर
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घुमारवीं में कानून से खेल रहा खनन माफिया का बोलबाला
एसडीएम दफ्तर से 300 मीटर दूर दिनदहाड़े चल रही जेसीबी
महीने भर पहले जिस चेक डैम का हुआ उद्घाटन, अवैध खनन ने उसकी नींव हिलाई
सीर खड्ड में जल स्रोतों पर मंडराया सूखने का खतरा
संजीव शामा
घुमारवीं (बिलासपुर)। प्रदेश में सरकार बदलती है, नियम बदलते हैं और दावे बदलते हैं, लेकिन घुमारवीं में खनन माफिया की किस्मत नहीं बदलती। यहां कानून का खौफ खत्म हो चुका है कि अब माफिया को रात के अंधेरे का इंतजार नहीं करना पड़ता। एसडीएम कार्यालय और पुलिस थाना, जहां से पूरे उपमंडल की कानून व्यवस्था चलती है, वहां से मात्र 300 मीटर की दूरी पर सिथत सीर खड्ड में माफिया बेखौफ खनन कर रहा है। सीधे तौर पर पुलिस और प्रशासन के लिए चुनौती भी दे रहा है।
हैरानी की बात यह है कि इस काले धंधे को सफेद चादर से ढकने की कोशिश की जा रही है। संस्थाओं और जनहित के नाम का सहारा लेकर खड्डों का सीना छलनी किया जा रहा है। चंद रुपयों की मदनी के लिए कुछ रसूखदार लोग प्राकृतिक संसाधनों को दीमक की तरह चाट रहे हैं।
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अभी पिछले महीने ही मुख्यमंत्री ने सीर खड्ड में जिस चेक डैम का उद्घाटन बड़े तामझाम के साथ किया था, माफिया ने उसे ही अपना निशाना बना लिया है। चेक डैम से महज 100 मीटर की दूरी पर हो रहा अवैध खनन इस सरकारी संपत्ति को ताश के पत्तों की तरह ढहा सकता है। सरकार ने माइनिंग रोकने के लिए कई विभागों को पावर दी है, लेकिन पुलिस और खनन विभाग के अलावा बाकी सब सो हुए हैं। कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। सवाल यह है कि क्या इन अधिकारियों को दिन के उजाले में चलती जेसीबी नजर नहीं आती? या फिर माफिया के रसूख के आगे अधिकारियों की फाइलें दब गई हैं? यदि आज इन मशीनों के पहिए नहीं थमे, तो घुमारवीं के जल स्रोत इतिहास बन जाएंगे। पेयजल और सिंचाई योजनाएं ठप होने की कगार पर हैं। जनता अब सीधे सवाल पूछ रही है कि साहब, आखिर कब जागेगा प्रशासन?। जहां जनता को दिन दहाड़े माफिया की दादागिरी दिख रही है, वहीं विभाग का कहना है कि हमें कुछ पता ही नहीं है। अब सवाल यह है कि मुख्यमंत्री के उद्घाटन किए गए प्रोजेक्ट के पास खनन होना क्या सरकार को खुली चुनौती नहीं है? क्या एसडीएम और पुलिस की नाक के नीचे बिना ऊपर की सेटिंग के यह संभव है? जल स्रोत सूखने पर जो हाहाकार मचेगा, उसका जिम्मेदार कौन होगा? संवाद
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मामला अभी ध्यान में नहीं है, लेकिन अगर एसडीएम कार्यालय के पास ऐसा हो रहा है तो यह गंभीर है। आज ही टीम भेजकर छापा मारा जाएगा, जो भी दोषी पाया गया, गाड़ी और मशीन जब्त कर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
हरविंदर सिंह, खनन अधिकारी, बिलासपुर