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Bilaspur News: भगवान शिव का विवाह लोगों के लिए रहा आकर्षण का केंद्र
Sun, 05 Oct 2025 11:13 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sun, 05 Oct 2025 11:13 PM IST
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श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर बिलासपुर में चल रही श्रीमद भागवत कथा में मौजूद श्रद्धालु। संवाद
लक्ष्मी नारायण मंदिर डियारा में श्रीमद्भागवत कथा का हुआ आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के डियारा सेक्टर स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही श्रीमदभागवत कथा के तीसरे दिन कथावाचक पंडित भास्करानंद शर्मा ने शिव-पार्वती विवाह के बारे में श्रद्धालुओं को विस्तार से बताया।
उन्होंने कहा कि पार्वती की तरफ से कई उच्च कुलों के राजा, महाराजा और शाही रिश्तेदार इस शादी में शामिल हुए। शिव की ओर से कोई रिश्तेदार मौजूद नहीं था और भगवान शिव के साथ हर प्रकार के प्राणी बारात में आए जिसमें देवी, देवताओं के अलावा राक्षस, किन्नर, गंधर्व, सर्प यहां तक की कीड़े मकोड़े भी आए। पर्वत राज ने अपने कुल की वंशावली के बारे में बताया और शिव से उनकी वंशावली के बारे में पूछा तो शिव मौन होकर शून्य रहे। काफी समय तक इसी बात को लेकर सभा में चर्चा होती रही कि आखिर शिव की ओर से इनके परिवार के बारे कोई क्यो नहीं बोल रहा। नारद मुनि ने बताया कि भगवान स्वयंभू हैं। उनके आगे पीछे कोई नहीं है। इनके मातापिता ही नहीं हैं। इनकी कोई विरासत नहीं है। इनका कोई गोत्र नहीं है। इसके पास कुछ नहीं है। इनके पास अपने खुद के अलावा कुछ नहीं है। पंडित भास्करानंद शर्मा ने बताया कि यह सुन पूरी सभा चकरा गई। पर्वत राज यह सुनकर हैरान रह गए कि वे अपनी पुत्री का हाथ कैसे ऐसे व्यक्ति के हाथों दे सकते हैं। जिसका कोई वंश ही न हो। बारात में आए संगी साथी देख समस्त जनता भयभीत थी और फिर माता पार्वती के कहने पर शिव ने सारी माया को समेटा। नारद ने बताया कि यही समस्त ब्रह्मांड है। भगवान विष्णु और ब्रह्मा भी उन्हीं के द्वारा हैं फिर कहीं दुल्हन के पिता संतुष्ट हुए। ब्रह्मा ने पुरोहित का कार्यभार संभाला और विष्णु पार्वती के भाई बने और यह विवाह संपन्न हुआ।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के डियारा सेक्टर स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही श्रीमदभागवत कथा के तीसरे दिन कथावाचक पंडित भास्करानंद शर्मा ने शिव-पार्वती विवाह के बारे में श्रद्धालुओं को विस्तार से बताया।
उन्होंने कहा कि पार्वती की तरफ से कई उच्च कुलों के राजा, महाराजा और शाही रिश्तेदार इस शादी में शामिल हुए। शिव की ओर से कोई रिश्तेदार मौजूद नहीं था और भगवान शिव के साथ हर प्रकार के प्राणी बारात में आए जिसमें देवी, देवताओं के अलावा राक्षस, किन्नर, गंधर्व, सर्प यहां तक की कीड़े मकोड़े भी आए। पर्वत राज ने अपने कुल की वंशावली के बारे में बताया और शिव से उनकी वंशावली के बारे में पूछा तो शिव मौन होकर शून्य रहे। काफी समय तक इसी बात को लेकर सभा में चर्चा होती रही कि आखिर शिव की ओर से इनके परिवार के बारे कोई क्यो नहीं बोल रहा। नारद मुनि ने बताया कि भगवान स्वयंभू हैं। उनके आगे पीछे कोई नहीं है। इनके मातापिता ही नहीं हैं। इनकी कोई विरासत नहीं है। इनका कोई गोत्र नहीं है। इसके पास कुछ नहीं है। इनके पास अपने खुद के अलावा कुछ नहीं है। पंडित भास्करानंद शर्मा ने बताया कि यह सुन पूरी सभा चकरा गई। पर्वत राज यह सुनकर हैरान रह गए कि वे अपनी पुत्री का हाथ कैसे ऐसे व्यक्ति के हाथों दे सकते हैं। जिसका कोई वंश ही न हो। बारात में आए संगी साथी देख समस्त जनता भयभीत थी और फिर माता पार्वती के कहने पर शिव ने सारी माया को समेटा। नारद ने बताया कि यही समस्त ब्रह्मांड है। भगवान विष्णु और ब्रह्मा भी उन्हीं के द्वारा हैं फिर कहीं दुल्हन के पिता संतुष्ट हुए। ब्रह्मा ने पुरोहित का कार्यभार संभाला और विष्णु पार्वती के भाई बने और यह विवाह संपन्न हुआ।
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