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Bilaspur News: मानसिक रोगियों के अनुभव सुनें, भेदभाव मिटाएं
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एम्स बिलासपुर में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत करते प्रशिक्षु डॉक्टर। स
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर एम्स में जागरूकता कार्यक्रम, 33 विद्यार्थियों ने पोस्टर प्रतियोगिता में लिया भाग
नुक्कड़ नाटक से दिया जागरूकता का संदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को समझने के लिए मरीजों के अनुभव सुनना और उनके प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाना जरूरी है। मानसिक बीमारी की शुरुआती पहचान और समय पर उपचार से मरीजों को बेहतर सहायता मिल सकती है। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर एम्स बिलासपुर के मनोचिकित्सा विभाग और कॉलेज ऑफ नर्सिंग की ओर से आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया। इस वर्ष दिवस की थीम लिव्ड एक्सपीरियंसेज हर्ड : रियल वॉयसेज, रियल चेंज यानी अनुभवों को सुना जाए, वास्तविक आवाजों से वास्तविक बदलाव आए रखी गई। कार्यक्रम में एक मरीज और उसकी देखभाल करने वाले व्यक्ति ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों को समझने और मरीजों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार अपनाने के महत्व को सामने रखा। कार्यक्रम के तहत बीएससी नर्सिंग तृतीय वर्ष के 13 विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। इसके माध्यम से मानसिक बीमारी के शुरुआती लक्षणों की पहचान, समय पर उपचार और जरूरत पड़ने पर मदद लेने का संदेश दिया गया। विद्यार्थियों ने लोगों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को गंभीरता से लेने के प्रति जागरूक किया।
पोस्टर प्रतियोगिता में आयुषी प्रथम
जागरूकता कार्यक्रम के तहत आयोजित पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता में नर्सिंग के 30 और पैरामेडिकल के तीन विद्यार्थियों सहित कुल 33 विद्यार्थियों ने भाग लिया। विद्यार्थियों ने पोस्टर के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और कार्यक्रम की थीम से जुड़े संदेशों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में बीएससी नर्सिंग चतुर्थ वर्ष के 2023 बैच की आयुषी ने पहला स्थान हासिल किया। बीएससी नर्सिंग तृतीय वर्ष के 2024 बैच की वंशिका दूसरे और द्वितीय वर्ष के 2025 बैच की शालिनी तीसरे स्थान पर रहीं। पोस्टर प्रतियोगिता का मूल्यांकन बाल रोग एवं मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रो. डॉ. श्रीराम पोथाप्रेगडा, मनोचिकित्सा विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ज्योति गुप्ता और कॉलेज ऑफ नर्सिंग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वरिंदर कौर के पैनल ने किया।
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नुक्कड़ नाटक से दिया जागरूकता का संदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को समझने के लिए मरीजों के अनुभव सुनना और उनके प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाना जरूरी है। मानसिक बीमारी की शुरुआती पहचान और समय पर उपचार से मरीजों को बेहतर सहायता मिल सकती है। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर एम्स बिलासपुर के मनोचिकित्सा विभाग और कॉलेज ऑफ नर्सिंग की ओर से आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया। इस वर्ष दिवस की थीम लिव्ड एक्सपीरियंसेज हर्ड : रियल वॉयसेज, रियल चेंज यानी अनुभवों को सुना जाए, वास्तविक आवाजों से वास्तविक बदलाव आए रखी गई। कार्यक्रम में एक मरीज और उसकी देखभाल करने वाले व्यक्ति ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों को समझने और मरीजों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार अपनाने के महत्व को सामने रखा। कार्यक्रम के तहत बीएससी नर्सिंग तृतीय वर्ष के 13 विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। इसके माध्यम से मानसिक बीमारी के शुरुआती लक्षणों की पहचान, समय पर उपचार और जरूरत पड़ने पर मदद लेने का संदेश दिया गया। विद्यार्थियों ने लोगों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को गंभीरता से लेने के प्रति जागरूक किया।
पोस्टर प्रतियोगिता में आयुषी प्रथम
जागरूकता कार्यक्रम के तहत आयोजित पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता में नर्सिंग के 30 और पैरामेडिकल के तीन विद्यार्थियों सहित कुल 33 विद्यार्थियों ने भाग लिया। विद्यार्थियों ने पोस्टर के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और कार्यक्रम की थीम से जुड़े संदेशों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में बीएससी नर्सिंग चतुर्थ वर्ष के 2023 बैच की आयुषी ने पहला स्थान हासिल किया। बीएससी नर्सिंग तृतीय वर्ष के 2024 बैच की वंशिका दूसरे और द्वितीय वर्ष के 2025 बैच की शालिनी तीसरे स्थान पर रहीं। पोस्टर प्रतियोगिता का मूल्यांकन बाल रोग एवं मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रो. डॉ. श्रीराम पोथाप्रेगडा, मनोचिकित्सा विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ज्योति गुप्ता और कॉलेज ऑफ नर्सिंग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वरिंदर कौर के पैनल ने किया।
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