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कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन: 28.36 हेक्टेयर वन भूमि की अनुपालना रिपोर्ट लंबित, परियोजना में देरी

Fri, 12 Jun 2026 10:51 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Fri, 12 Jun 2026 10:51 PM IST
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Kiratpur-Nerchowk Four-lane: Compliance report for 28.36 hectares of forest land pending; project delayed.
पर्यावरण मंत्रालय ने शिमला कार्यालय से मांगा मामले को लेकर जवाब
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मूल अलाइनमेंट में बदलाव के बावजूद संशोधित वन स्वीकृति नहीं लेने का दावा -
वन विभाग, एनएचएआई अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल, कार्रवाई रिपोर्ट अब तक नहीं भेजी गई
बदले हुए अलाइनमेंट पर निर्माण कार्य पूरा, परियोजना व्यावसायिक संचालन में पहुंची
सरोज पाठक
बिलासपुर। शिमला। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना के लिए आवश्यक 28.36 हेक्टेयर वन भूमि से संबंधित अनुपालना रिपोर्ट अभी भी लंबित है। इस देरी के कारण परियोजना के निर्माण कार्य पर असर पड़ रहा है। यह मामला राष्ट्रीय राजमार्ग के महत्वपूर्ण खंड से जुड़ा है।
वन विभाग को यह रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजनी है। रिपोर्ट में वन भूमि के उपयोग के लिए निर्धारित शर्तों के पालन की जानकारी होती है। इन शर्तों में क्षतिपूरक वनीकरण और नेट प्रेजेंट वैल्यू का भुगतान शामिल है। परियोजना के लिए वन स्वीकृति पहले ही मिल चुकी है। हालांकि, अंतिम अनुपालना रिपोर्ट के बिना आगे की प्रक्रिया बाधित है। अधिकारियों के अनुसार, रिपोर्ट तैयार करने में कुछ तकनीकी अड़चनें आ रही हैं। इस कारण परियोजना के निर्धारित समय पर पूरा होने में संदेह पैदा हो गया है। स्थानीय लोगों और यात्रियों को इस फोरलेन का बेसब्री से इंतजार है।
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वन स्वीकृति और शर्तें
कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना को पर्यावरण मंत्रालय से वन स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। यह स्वीकृति कुछ अनिवार्य शर्तों के साथ दी गई थी। इन शर्तों में प्रभावित वन क्षेत्र के बदले अन्य स्थान पर वनीकरण करना शामिल है। साथ ही, वन भूमि के मूल्य के बराबर राशि का भुगतान भी करना होता है। अनुपालना रिपोर्ट में इन्हीं शर्तों के पूरा होने का विवरण दिया जाता है।
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परियोजना पर प्रभाव
अनुपालना रिपोर्ट लंबित होने से फोरलेन परियोजना के कार्य में बाधा आ रही है। भूमि अधिग्रहण और निर्माण संबंधी कई कार्य रुके हुए हैं। इससे परियोजना की लागत बढ़ने की आशंका भी है। सरकार और संबंधित विभागों को इस मामले को प्राथमिकता से निपटाना होगा। समय पर रिपोर्ट जमा होने से परियोजना को गति मिल सकेगी।
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