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भाषण में कशिश, प्रणवी, संतोष और अक्षिता रही अव्वल
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बिलासपुर। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस कार्यक्रम का आयोजन राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला भगेड़ में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें प्रथम स्थान पर कशिश, द्वितीय स्थान पर प्रणवी, तीसरे स्थान पर संतोष और अक्षिता रही।
मुख्य वक्ता के रूप में स्वास्थ्य शिक्षक कमल कुमार शर्मा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को स्वस्थ रखना आज के समय में हर व्यक्ति के लिए एक चुनौती से कम नहीं है। कोरोना महामारी के बाद से मानसिक रोगों से जूझ रहे लोगों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है। वहीं बच्चे भी इससे अछूते नहीं हैं। यूनिसेफ की साल 2021 की एक रिपोर्ट के अनुसार देश में तकरीबन 14 फीसदी बच्चे भी अवसाद में जी रहे हैं। कोविड-19 महामारी ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि हमारे शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य के बीच गहरा संबंध है। लेकिन अभी भी ज्यादातर लोग इस पर ध्यान नहीं देते। फिजिकल और मेंटल हेल्थ एक ही सिक्के के दो पहलू की तरह हैं। किसी भी एक पहलू को नजरअंदाज करना दूसरे पहलू को नकारात्मक तरीके से प्रभावित करता है। अवसाद की समस्या को छिपाने की जगह उस पर ध्यान देने की जरूरत है।
जन शिक्षा एवं सूचना अधिकारी राकेश बाबू ने कहा कि मानसिक रोग से ग्रस्त बहुत से लोगों का इलाज नहीं हो पाता है। डब्लूएचओ का मानना है कि दुनियाभर में करीब 22 करोड़ लोग डिप्रेशन से पीड़ित हैं जबकि दुनिया के पांच बच्चों में से एक को मानसिक परेशानी है। भारत में हर 12 में से एक बुजुर्ग व्यक्ति में डिप्रेशन के लक्षण हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1992 में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाने की शुरुआत की। इस दिवस को बनाने का उद्देश्य लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को स्वस्थ रखना और उसके बारे में जागरूक करना है।
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मुख्य वक्ता के रूप में स्वास्थ्य शिक्षक कमल कुमार शर्मा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को स्वस्थ रखना आज के समय में हर व्यक्ति के लिए एक चुनौती से कम नहीं है। कोरोना महामारी के बाद से मानसिक रोगों से जूझ रहे लोगों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है। वहीं बच्चे भी इससे अछूते नहीं हैं। यूनिसेफ की साल 2021 की एक रिपोर्ट के अनुसार देश में तकरीबन 14 फीसदी बच्चे भी अवसाद में जी रहे हैं। कोविड-19 महामारी ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि हमारे शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य के बीच गहरा संबंध है। लेकिन अभी भी ज्यादातर लोग इस पर ध्यान नहीं देते। फिजिकल और मेंटल हेल्थ एक ही सिक्के के दो पहलू की तरह हैं। किसी भी एक पहलू को नजरअंदाज करना दूसरे पहलू को नकारात्मक तरीके से प्रभावित करता है। अवसाद की समस्या को छिपाने की जगह उस पर ध्यान देने की जरूरत है।
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जन शिक्षा एवं सूचना अधिकारी राकेश बाबू ने कहा कि मानसिक रोग से ग्रस्त बहुत से लोगों का इलाज नहीं हो पाता है। डब्लूएचओ का मानना है कि दुनियाभर में करीब 22 करोड़ लोग डिप्रेशन से पीड़ित हैं जबकि दुनिया के पांच बच्चों में से एक को मानसिक परेशानी है। भारत में हर 12 में से एक बुजुर्ग व्यक्ति में डिप्रेशन के लक्षण हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1992 में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाने की शुरुआत की। इस दिवस को बनाने का उद्देश्य लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को स्वस्थ रखना और उसके बारे में जागरूक करना है।
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