{"_id":"69761be0cb572de1e90d86eb","slug":"implement-the-principle-of-one-secretary-one-panchayat-neeraj-bilaspur-news-c-92-1-ssml1001-152858-2026-01-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक सचिव-एक पंचायत का सिद्धांत लागू करें : नीरज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक सचिव-एक पंचायत का सिद्धांत लागू करें : नीरज
विज्ञापन
बोले-एक सचिव को दो-तीन पंचायतों को देखना पड़ रहा काम
पंचायतीराज के अलावा दूसरे विभागों का भी सौंपा गया है जिम्मा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। प्रदेश में पंचायत सचिवों पर लगातार बहु-विभागीय काम बढ़ता जा रहा है। एक सचिव को दो-तीन पंचायतों का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने से वे मानसिक, शारीरिक रूप से परेशान हैं। इसको लेकर पंचायत सचिव संघ ने प्रदेश सरकार से उनकी ओर ध्यान देने की मांग की है। इस संबंध में पंचायत सचिव संघ की ओर से मुख्यमंत्री, पंचायतीराज मंत्री, पंचायतीराज विभाग के सचिव और निदेशक को प्रतिवेदन सौंपा है।
पंचायत सचिव संघ के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष नीरज शर्मा ने कहा कि पंचायत सचिव प्रदेश की ग्राम पंचायत व्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन अत्यधिक दबाव, संसाधनों की कमी और असहनीय कार्यभार के कारण वे गंभीर तनाव में कार्य करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत सचिवों की भूमिका अब केवल पंचायतीराज विभाग तक सीमित नहीं रही है, बल्कि राज्य सरकार के लगभग सभी विभागों का कार्य पंचायत सचिवों से कराया जा रहा है।
प्रतिवेदन में उल्लेख किया है कि पंचायत सचिवों से पंचायतीराज विभाग के अंतर्गत ग्राम सभा और पंचायत बैठकों की कार्यवाही, रजिस्टर एवं रिकॉर्ड संधारण, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, पंचायत संपत्ति का रिकॉर्ड, लेखा संधारण, ऑडिट आपत्तियों का निपटारा तथा ई-ग्राम स्वराज और पीएफएमएस पोर्टल से संबंधित कार्य कराए जा रहे हैं।
विज्ञापन
इसके अतिरिक्त मनरेगा के तहत जॉब कार्ड, मस्टररोल, मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी, मजदूरी भुगतान, सोशल ऑडिट और जियो-टैगिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी सचिवों की जिम्मेदारी हैं। वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के राशन कार्ड, एनएफएसए सत्यापन, ई-केवाईसी, कृषि विभाग की पीएम-किसान योजना, पशुपालन विभाग की पशु गणना, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला-बाल विकास और सामाजिक न्याय विभाग की पेंशन योजनाएं, निर्वाचन कार्य, आपदा प्रबंधन तथा आरटीआई से संबंधित कार्य भी पंचायत सचिवों से कराए जा रहे हैं।
संघ ने बताया कि पंचायत सचिवों पर प्रतिदिन पोर्टलों, ई-मेल और व्हाट्सएप से साप्ताहिक, मासिक और आकस्मिक रिपोर्ट भेजने का अतिरिक्त दबाव बना रहता है। विशेष चिंता इस बात को लेकर जताई गई है कि कई स्थानों पर एक पंचायत सचिव को दो या तीन पंचायतों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, जिससे न तो पंचायतों में नियमित उपस्थिति संभव हो पा रही है और न ही ग्राम सभाओं का समय पर आयोजन हो पा रहा है।
पंचायत सचिव संघ ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि पंचायत सचिवों के कार्यभार का युक्तिसंगत पुनर्निर्धारण किया जाए। एक सचिव-एक पंचायत का सिद्धांत लागू किया जाए तथा पंचायत स्तर पर सहायक स्टाफ की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
विज्ञापन
पंचायतीराज के अलावा दूसरे विभागों का भी सौंपा गया है जिम्मा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। प्रदेश में पंचायत सचिवों पर लगातार बहु-विभागीय काम बढ़ता जा रहा है। एक सचिव को दो-तीन पंचायतों का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने से वे मानसिक, शारीरिक रूप से परेशान हैं। इसको लेकर पंचायत सचिव संघ ने प्रदेश सरकार से उनकी ओर ध्यान देने की मांग की है। इस संबंध में पंचायत सचिव संघ की ओर से मुख्यमंत्री, पंचायतीराज मंत्री, पंचायतीराज विभाग के सचिव और निदेशक को प्रतिवेदन सौंपा है।
पंचायत सचिव संघ के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष नीरज शर्मा ने कहा कि पंचायत सचिव प्रदेश की ग्राम पंचायत व्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन अत्यधिक दबाव, संसाधनों की कमी और असहनीय कार्यभार के कारण वे गंभीर तनाव में कार्य करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत सचिवों की भूमिका अब केवल पंचायतीराज विभाग तक सीमित नहीं रही है, बल्कि राज्य सरकार के लगभग सभी विभागों का कार्य पंचायत सचिवों से कराया जा रहा है।
विज्ञापन
प्रतिवेदन में उल्लेख किया है कि पंचायत सचिवों से पंचायतीराज विभाग के अंतर्गत ग्राम सभा और पंचायत बैठकों की कार्यवाही, रजिस्टर एवं रिकॉर्ड संधारण, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, पंचायत संपत्ति का रिकॉर्ड, लेखा संधारण, ऑडिट आपत्तियों का निपटारा तथा ई-ग्राम स्वराज और पीएफएमएस पोर्टल से संबंधित कार्य कराए जा रहे हैं।
विज्ञापन
इसके अतिरिक्त मनरेगा के तहत जॉब कार्ड, मस्टररोल, मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी, मजदूरी भुगतान, सोशल ऑडिट और जियो-टैगिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी सचिवों की जिम्मेदारी हैं। वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के राशन कार्ड, एनएफएसए सत्यापन, ई-केवाईसी, कृषि विभाग की पीएम-किसान योजना, पशुपालन विभाग की पशु गणना, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला-बाल विकास और सामाजिक न्याय विभाग की पेंशन योजनाएं, निर्वाचन कार्य, आपदा प्रबंधन तथा आरटीआई से संबंधित कार्य भी पंचायत सचिवों से कराए जा रहे हैं।
संघ ने बताया कि पंचायत सचिवों पर प्रतिदिन पोर्टलों, ई-मेल और व्हाट्सएप से साप्ताहिक, मासिक और आकस्मिक रिपोर्ट भेजने का अतिरिक्त दबाव बना रहता है। विशेष चिंता इस बात को लेकर जताई गई है कि कई स्थानों पर एक पंचायत सचिव को दो या तीन पंचायतों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, जिससे न तो पंचायतों में नियमित उपस्थिति संभव हो पा रही है और न ही ग्राम सभाओं का समय पर आयोजन हो पा रहा है।
पंचायत सचिव संघ ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि पंचायत सचिवों के कार्यभार का युक्तिसंगत पुनर्निर्धारण किया जाए। एक सचिव-एक पंचायत का सिद्धांत लागू किया जाए तथा पंचायत स्तर पर सहायक स्टाफ की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।