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Bilaspur News: पति आय कम बताकर गुजारा भत्ते से बच नहीं सकता
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कोर्ट में आय कम बताने की दलील खारिज, पत्नी को 4000 रुपये गुजारा भत्ता देने के आदेश बरकरार
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, घुमारवीं ने गुजारा भत्ते से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि पति शारीरिक रूप से स्वस्थ है, तो वह अपनी आय कम बताकर पत्नी को भरण-पोषण देने की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता।
अदालत ने निचली अदालत की ओर से निर्धारित 4000 रुपये प्रति माह के गुजारा भत्ते को सही ठहराते हुए पति की अपील खारिज कर दी। उपमंडल घुमारवीं के एक व्यक्ति ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी। उनका तर्क था कि उसकी मासिक आय केवल 6,000 से 7,000 रुपये के बीच है और इतनी राशि देने में वह असमर्थ है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार एक अकुशल मजदूर को भी 425 रुपये प्रतिदिन देती है। इस आधार पर पति द्वारा बताई गई आय पर्याप्त नहीं मानी गई। अदालत ने रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद कहा कि अपीलकर्ता बीमार या काम करने में अक्षम नहीं है। वर्तमान महंगाई के दौर में 4000 रुपये की कुल राशि अत्यधिक नहीं है।
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अदालत ने निचली अदालत के 24 जुलाई 2024 के आदेश में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से इनकार किया और उसे यथावत रखा। दोनों पक्षों को 17 जनवरी 2026 को ट्रायल कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने अपील की फाइल रिकॉर्ड रूम भेजने और ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड वापस भेजने के आदेश भी जारी किए।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, घुमारवीं ने गुजारा भत्ते से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि पति शारीरिक रूप से स्वस्थ है, तो वह अपनी आय कम बताकर पत्नी को भरण-पोषण देने की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता।
अदालत ने निचली अदालत की ओर से निर्धारित 4000 रुपये प्रति माह के गुजारा भत्ते को सही ठहराते हुए पति की अपील खारिज कर दी। उपमंडल घुमारवीं के एक व्यक्ति ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी। उनका तर्क था कि उसकी मासिक आय केवल 6,000 से 7,000 रुपये के बीच है और इतनी राशि देने में वह असमर्थ है।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार एक अकुशल मजदूर को भी 425 रुपये प्रतिदिन देती है। इस आधार पर पति द्वारा बताई गई आय पर्याप्त नहीं मानी गई। अदालत ने रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद कहा कि अपीलकर्ता बीमार या काम करने में अक्षम नहीं है। वर्तमान महंगाई के दौर में 4000 रुपये की कुल राशि अत्यधिक नहीं है।
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अदालत ने निचली अदालत के 24 जुलाई 2024 के आदेश में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से इनकार किया और उसे यथावत रखा। दोनों पक्षों को 17 जनवरी 2026 को ट्रायल कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने अपील की फाइल रिकॉर्ड रूम भेजने और ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड वापस भेजने के आदेश भी जारी किए।