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Bilaspur News: मनरेगा गड़बड़ी पर हाईकोर्ट सख्त, दोषियों पर तीन माह में फैसला लेने के निर्देश

Tue, 24 Mar 2026 11:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 24 Mar 2026 11:55 PM IST
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high court decession
अदालत से-------------------
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आपदा में मनरेगा का काम किए बिना ही पैसे के भुगतान की है शिकायत
29 जनवरी 2025 को अपीलीय प्राधिकरण ने 15,600 रुपये की रिकवरी के दिए हैं आदेश

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मनरेगा में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रदेश ग्रामीण विकास विभाग के सचिव को अहम निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता की लंबित शिकायत पर तीन माह में निर्णय लेने को कहा है।
जनहित याचिका में मनरेगा के तहत बिना कार्य किए भुगतान किए जाने का आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की थी कि आरोपी अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू की जाए, उनसे 18 प्रतिशत ब्याज सहित राशि की वसूली की जाए, विभागीय जांच कराई जाए और मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाई जाए। साथ ही संबंधित अधिकारियों पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना लगाने की भी मांग की गई थी।
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सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि 29 जनवरी 2025 को अपीलीय प्राधिकरण ने अपने आदेश में संबंधित उत्तरदाताओं से 15,600 रुपये की रिकवरी करने के निर्देश दिए थे। यह राशि सभी संबंधित लोगों से बराबर हिस्सों में वसूलने को कहा गया था, जबकि अपीलकर्ता पर लगाई गई पेनल्टी को हटा दिया गया था। याचिकाकर्ता ने सरकार को दी गई अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि जिस कार्य के लिए भुगतान किया गया, वह किया ही नहीं गया और संबंधित भूमि भी मौजूद नहीं थी। इसके बावजूद सरकारी धन का भुगतान किया गया, जो गंभीर अनियमितता को दर्शाता है। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता की ओर से ग्रामीण विकास विभाग के सचिव को पहले ही विस्तृत प्रतिवेदन दिया जा चुका है, जिसमें वही मुद्दे उठाए गए हैं जो याचिका में शामिल हैं। ऐसे में मामला अभी सरकार के स्तर पर विचाराधीन है। खंडपीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है, इसलिए उचित होगा कि प्रदेश ग्रामीण विकास विभाग के सचिव याचिकाकर्ता के प्रतिवेदन पर तय समय सीमा के भीतर निर्णय लें। अदालत ने इन निर्देशों के साथ जनहित याचिका का निपटारा कर दिया, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि सरकार को मामले की गंभीरता को देखते हुए उचित कार्रवाई करनी होगी।
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