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Bilaspur News: बाइक ठीक करने वाले हाथ अब उगा रहे ड्रैगन फ्रूट
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धरोट में सतनाम सिंह अपने बगीचे में। स्रोत: जागरूक पाठक
धरोट के सतनाम सिंह ने प्राकृतिक खेती से बदली तस्वीर, तीन साल में खड़ा किया बगीचा
किसानों को पारंपरिक खेती के साथ बागवानी अपनाने की सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
गेहड़वीं (बिलासपुर)। मेहनत, संघर्ष और कुछ नया करने का जज्बा हो तो सफलता की नई कहानी लिखी जा सकती है। ग्राम पंचायत धरोट के रहने वाले सतनाम सिंह ने इसे सच कर दिखाया है। कभी बाइक मेकेनिक का काम करने वाले सतनाम सिंह आज ड्रैगन फ्रूट की प्राकृतिक खेती के जरिये अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। उनके बगीचे में तैयार होने वाले ड्रैगन फ्रूट अब जिले ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों में भी पसंद किए जा रहे हैं।
करीब तीन वर्ष पहले उन्होंने ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की। शुरुआत में सीमित स्तर पर पौधे लगाए, लेकिन लगातार मेहनत और प्रयोगों के दम पर खेती का दायरा बढ़ाते गए। आज उनके फार्म में ड्रैगन फ्रूट की कई उन्नत किस्में तैयार हैं और वह लाखों रुपये का उत्पादन बेच चुके हैं। सतनाम सिंह का कहना है कि उनके फार्म में पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से खेती की जाती है। रासायनिक खाद और कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया जाता। इसके बजाय वह स्वयं जीवामृत तैयार कर पौधों में इस्तेमाल करते हैं, जिससे फल की गुणवत्ता बेहतर रहती है और उत्पादन भी अच्छा मिलता है। उन्होंने किसानों से पारंपरिक फसलों के साथ बागवानी को अपनाने की अपील की। उनका कहना है कि गेहूं और मक्की जैसी फसलों में जंगली जानवरों, मौसम और कीटों से नुकसान का खतरा अधिक रहता है, जबकि ड्रैगन फ्रूट की खेती कम जोखिम के साथ बेहतर आय का माध्यम बन सकती है।
सरकारी सहयोग मिले तो बढ़ेगा दायरा
सतनाम सिंह ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू करने के इच्छुक किसान उनसे पौधों और उत्पादन से जुड़ी जानकारी ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक उन्हें सरकार या संबंधित विभाग की ओर से किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं मिली है। यदि सरकारी स्तर पर सहयोग मिले तो वह इस खेती को और बड़े स्तर पर विस्तार दे सकते हैं और अधिक किसानों को ड्रैगन फ्रूट उत्पादन से जोड़ने में मदद कर सकते हैं।
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किसानों को पारंपरिक खेती के साथ बागवानी अपनाने की सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
गेहड़वीं (बिलासपुर)। मेहनत, संघर्ष और कुछ नया करने का जज्बा हो तो सफलता की नई कहानी लिखी जा सकती है। ग्राम पंचायत धरोट के रहने वाले सतनाम सिंह ने इसे सच कर दिखाया है। कभी बाइक मेकेनिक का काम करने वाले सतनाम सिंह आज ड्रैगन फ्रूट की प्राकृतिक खेती के जरिये अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। उनके बगीचे में तैयार होने वाले ड्रैगन फ्रूट अब जिले ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों में भी पसंद किए जा रहे हैं।
करीब तीन वर्ष पहले उन्होंने ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की। शुरुआत में सीमित स्तर पर पौधे लगाए, लेकिन लगातार मेहनत और प्रयोगों के दम पर खेती का दायरा बढ़ाते गए। आज उनके फार्म में ड्रैगन फ्रूट की कई उन्नत किस्में तैयार हैं और वह लाखों रुपये का उत्पादन बेच चुके हैं। सतनाम सिंह का कहना है कि उनके फार्म में पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से खेती की जाती है। रासायनिक खाद और कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया जाता। इसके बजाय वह स्वयं जीवामृत तैयार कर पौधों में इस्तेमाल करते हैं, जिससे फल की गुणवत्ता बेहतर रहती है और उत्पादन भी अच्छा मिलता है। उन्होंने किसानों से पारंपरिक फसलों के साथ बागवानी को अपनाने की अपील की। उनका कहना है कि गेहूं और मक्की जैसी फसलों में जंगली जानवरों, मौसम और कीटों से नुकसान का खतरा अधिक रहता है, जबकि ड्रैगन फ्रूट की खेती कम जोखिम के साथ बेहतर आय का माध्यम बन सकती है।
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सरकारी सहयोग मिले तो बढ़ेगा दायरा
सतनाम सिंह ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू करने के इच्छुक किसान उनसे पौधों और उत्पादन से जुड़ी जानकारी ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक उन्हें सरकार या संबंधित विभाग की ओर से किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं मिली है। यदि सरकारी स्तर पर सहयोग मिले तो वह इस खेती को और बड़े स्तर पर विस्तार दे सकते हैं और अधिक किसानों को ड्रैगन फ्रूट उत्पादन से जोड़ने में मदद कर सकते हैं।
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