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फोरलेन के बदले प्लान पर सरकार आई हरकत में
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बिलासपुर। केंद्रीय मंत्रालय की तर्ज पर अब राज्य सरकार ने भी प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन टॉलेंड को कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन के स्वीकृत रूट की जांच के आदेश जारी किए हैं। राज्य सरकार ने चार बिंदुओं पर वन विभाग से पूरी रिपोर्ट तलब की है,फोरलेन निर्माण के दौरान बरती गई अनियमितताओं की पूरी रिपोर्ट तैयार की जा सके।
राज्य सरकार ने मुख्य अरण्यपाल से फोरलेन में अपनी सुविधा के अनुसार बदले गए रूट की जांच चार बिंदुओं पर करने को कहा है। जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से स्वीकृत रोड प्लान में अपनी मर्जी से कहां कितना प्लान बदला गया है। इसकी पूरी रिपोर्ट खसरा नबंर सहित देनी होगी। इसके अलावा अपनी मर्जी से बदले गए रोड अलाइनमेंट में किए गए सड़क निर्माण में वन विभाग के कितने पेड़ काटे गए। वहीं स्वीकृत अलाइनमेंट में कितने पेड़ काटे जाने थे। राज्य सरकार ने यह भी पूछा है कि सड़क निर्माण से कितना मलबा निकला और उसे कहां डंप किया गया। इसके अलावा शेष बचे कार्य से कितना मलबा और निकलेगा और उसे कहां डंप किया जाएगा, इसका पूरा प्लान सरकार को दिया जाए। इस संबंध में वन विभाग के संयुक्त सचिव सतपाल धीमान के कार्यालय से पत्र संख्या नंबर एफएफई-बी-ए(3)-3/2017 दिनंाक 5.03.2020 के माध्यम से मुख्य अरण्यपाल वन हॉफ टॉलेंट शिमला को आदेश जारी किए हैं।
इन आदेशों पर फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के उपप्रधान अशोक कुमार, राकेश कुमार, चिंता देवी, सीता राम, जगदीश राम,जगत राम, सुभाष, देवराज तथा समिति महासचिव एवं पूर्व सैनिक मदनलाल शर्मा ने अपनी आपत्ति जताई है कि इस जांच को नियमानुसार करने के लिए न तो मंत्रालय ने समय सीमा निर्धारित की और न ही राज्य सरकार ने। इससे ऐसा प्रतीत होता है उच्चाधिकारी इस संवेदनशील मसले पर गंभीर नहीं हैं और एनएचएआई की ओर से अपनी सुविधा के अनुसार बदले गए इस रूट को हल्के से ले रहे हैं।
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उल्लेखनीय है कि उक्त परियोजना में एनएचएआई ने प्रशासन से मिलकर पहले मकानों का मूल्यांकन करवाया, फिर करोड़ों रुपये के मुआवजे का आवंटन कर दिया। जब मकानों का कब्जा लेने के बारी आई तो सारे रूट को बदल दिया गया। जिस पर अब मंत्रालय ने संज्ञान लिया है।
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राज्य सरकार ने मुख्य अरण्यपाल से फोरलेन में अपनी सुविधा के अनुसार बदले गए रूट की जांच चार बिंदुओं पर करने को कहा है। जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से स्वीकृत रोड प्लान में अपनी मर्जी से कहां कितना प्लान बदला गया है। इसकी पूरी रिपोर्ट खसरा नबंर सहित देनी होगी। इसके अलावा अपनी मर्जी से बदले गए रोड अलाइनमेंट में किए गए सड़क निर्माण में वन विभाग के कितने पेड़ काटे गए। वहीं स्वीकृत अलाइनमेंट में कितने पेड़ काटे जाने थे। राज्य सरकार ने यह भी पूछा है कि सड़क निर्माण से कितना मलबा निकला और उसे कहां डंप किया गया। इसके अलावा शेष बचे कार्य से कितना मलबा और निकलेगा और उसे कहां डंप किया जाएगा, इसका पूरा प्लान सरकार को दिया जाए। इस संबंध में वन विभाग के संयुक्त सचिव सतपाल धीमान के कार्यालय से पत्र संख्या नंबर एफएफई-बी-ए(3)-3/2017 दिनंाक 5.03.2020 के माध्यम से मुख्य अरण्यपाल वन हॉफ टॉलेंट शिमला को आदेश जारी किए हैं।
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इन आदेशों पर फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के उपप्रधान अशोक कुमार, राकेश कुमार, चिंता देवी, सीता राम, जगदीश राम,जगत राम, सुभाष, देवराज तथा समिति महासचिव एवं पूर्व सैनिक मदनलाल शर्मा ने अपनी आपत्ति जताई है कि इस जांच को नियमानुसार करने के लिए न तो मंत्रालय ने समय सीमा निर्धारित की और न ही राज्य सरकार ने। इससे ऐसा प्रतीत होता है उच्चाधिकारी इस संवेदनशील मसले पर गंभीर नहीं हैं और एनएचएआई की ओर से अपनी सुविधा के अनुसार बदले गए इस रूट को हल्के से ले रहे हैं।
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उल्लेखनीय है कि उक्त परियोजना में एनएचएआई ने प्रशासन से मिलकर पहले मकानों का मूल्यांकन करवाया, फिर करोड़ों रुपये के मुआवजे का आवंटन कर दिया। जब मकानों का कब्जा लेने के बारी आई तो सारे रूट को बदल दिया गया। जिस पर अब मंत्रालय ने संज्ञान लिया है।