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कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन के इंतकालों पर तत्कालीन कार्यालय कानूनगो ने किया हेरफेर
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बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन के तहत तहसील घुमारवीं के मुहाल बागठेडू़ में अधिकृत की गई भूमि के इंतकाल का मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के बावजूद राजस्व विभाग ने बिना शक्तियों के रिकॉर्ड में दुरुस्ती कर दी है। होना यह था कि कोर्ट से फैसला आने के बाद ही इसमें नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जानी थी। इसकी पुष्टि तहसीलदार घुमारवीं अजय कुमार सिंह और कार्यालय कानूनगो सुरेश कुमार ने आरटीआई में दी जानकारी में की है।
तत्कालीन कानूनगो ने कोर्ट के नियमों की अवहेलना करते हुए खुद से ही इन इंतकालों को उच्च अधिकारियों को बताए बिना दुरुस्ती करने के लिए भेज दिया। जिसका खुलासा आरटीआई से प्राप्त जानकारी में हुआ है। उक्त फोरलेन निर्माण के लिए बागठेडू़ के मूल खसरा नंबर 126 का अधिग्रहण किया गया। जिसका इंतकाल नंबर 336-337 तारीख फैसला 7 नवंबर 2014 को होकर तहसील कार्यालय घुमारवीं में सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी एनएचएआई के तहसीलदार द्वारा दर्ज व तस्दीक कर उक्त तहसील में कार्यालय कानूनगो को जमा करवा दिए गए। उक्त इंतकालों में पाई गई त्रुटियों पर प्रार्थी ने उक्त इकाई में शिकायत दर्ज करवाई। जिस पर इकाई द्वारा तहसील घुमारवीं के तहसीलदार को पत्र लिखकर इंतकालों को अपने कार्यालय में दुरुस्ती करने के लिए मांग की गई। जिस पर तत्कालीन कानूनगो ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए बिना अपने उच्च अधिकारियों को बताए इन इंतकालों को उक्त इकाई के कर्मचारियों को रिसिविंग करवाकर सौंप दिया।
आरटीआई में प्राप्त जानकारी के अनुसार तहसील कार्यालय के पत्र संख्या 1091 में 1 सितंबर 2020 को कार्यालय कानूनगो ने जानकारी दी है कि किसी भी सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी द्वारा तस्दीकशुदा इंतकाल एक बार तहसील व रजिस्टर में दर्ज होकर संबंधित गांव के बस्ते में जमा हो जाने पर तहसील के कार्यालय कानूनगो को ऐसी कोई शक्तियां प्रदान नहीं की गई है कि वह अपनी मर्जी से असल इंतकालों को दोबारा दुरुस्ती करने के लिए समाहर्ता को भेजे। जब तक कि किसी न्यायालय द्वारा इसके लिए मांग नहीं की जाती है। जब इस इंतकाल में दुरुस्ती की गई तब उक्त मामला मंडलायुक्त मंडी में विचाराधीन था। इसके बारे में उक्त इकाई को भी पूरी जानकारी थी। वर्तमान में उक्त मामला फाइनेंस कमिश्नर शिमला के समक्ष विचाराधीन है। जिससे घुमारवीं राजस्व विभाग के तत्कालीन कार्यालय कानूनगो की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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तत्कालीन कानूनगो ने कोर्ट के नियमों की अवहेलना करते हुए खुद से ही इन इंतकालों को उच्च अधिकारियों को बताए बिना दुरुस्ती करने के लिए भेज दिया। जिसका खुलासा आरटीआई से प्राप्त जानकारी में हुआ है। उक्त फोरलेन निर्माण के लिए बागठेडू़ के मूल खसरा नंबर 126 का अधिग्रहण किया गया। जिसका इंतकाल नंबर 336-337 तारीख फैसला 7 नवंबर 2014 को होकर तहसील कार्यालय घुमारवीं में सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी एनएचएआई के तहसीलदार द्वारा दर्ज व तस्दीक कर उक्त तहसील में कार्यालय कानूनगो को जमा करवा दिए गए। उक्त इंतकालों में पाई गई त्रुटियों पर प्रार्थी ने उक्त इकाई में शिकायत दर्ज करवाई। जिस पर इकाई द्वारा तहसील घुमारवीं के तहसीलदार को पत्र लिखकर इंतकालों को अपने कार्यालय में दुरुस्ती करने के लिए मांग की गई। जिस पर तत्कालीन कानूनगो ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए बिना अपने उच्च अधिकारियों को बताए इन इंतकालों को उक्त इकाई के कर्मचारियों को रिसिविंग करवाकर सौंप दिया।
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आरटीआई में प्राप्त जानकारी के अनुसार तहसील कार्यालय के पत्र संख्या 1091 में 1 सितंबर 2020 को कार्यालय कानूनगो ने जानकारी दी है कि किसी भी सहायक समाहर्ता द्वितीय श्रेणी द्वारा तस्दीकशुदा इंतकाल एक बार तहसील व रजिस्टर में दर्ज होकर संबंधित गांव के बस्ते में जमा हो जाने पर तहसील के कार्यालय कानूनगो को ऐसी कोई शक्तियां प्रदान नहीं की गई है कि वह अपनी मर्जी से असल इंतकालों को दोबारा दुरुस्ती करने के लिए समाहर्ता को भेजे। जब तक कि किसी न्यायालय द्वारा इसके लिए मांग नहीं की जाती है। जब इस इंतकाल में दुरुस्ती की गई तब उक्त मामला मंडलायुक्त मंडी में विचाराधीन था। इसके बारे में उक्त इकाई को भी पूरी जानकारी थी। वर्तमान में उक्त मामला फाइनेंस कमिश्नर शिमला के समक्ष विचाराधीन है। जिससे घुमारवीं राजस्व विभाग के तत्कालीन कार्यालय कानूनगो की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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