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Bilaspur News: अवैध मलबा डंपिंग मामले में वन विभाग सख्त
Sun, 18 Jan 2026 11:25 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sun, 18 Jan 2026 11:25 PM IST
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एक्सक्लूसिव
एनएचएआई प्रोजेक्ट डायरेक्टर को थमाया अंतिम नोटिस
लिखा-10 दिन में भुगतान नहीं हुआ तो होगी सख्त कार्रवाई
एक दशक बाद भी 50,400 डैमेज बिल वसूली लंबित
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर–नेरचौक फोरलेन सड़क निर्माण के दौरान गोबिंद सागर झील के सहायक नालों में अवैध रूप से मलबा डंप करने के मामले में अब वन विभाग ने कड़ा रुख अपना लिया है। सुकेत वन मंडल सुंदरनगर ने प्रोजेक्ट डायरेक्टर, पीआईयू–मंडी (बगला) को अंतिम चेतावनी नोटिस जारी करते हुए बकाया डैमेज बिल की राशि 50,400 रुपये 10 दिन के भीतर जमा करवाने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला वर्ष 2015–16 का है, जब बिना स्वीकृत डंपिंग साइट और बिना सुरक्षा दीवार के क्षमता से अधिक मलबा डंप किया गया था। विभागीय जांच में इसे वन अधिनियम और पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन माना गया था। उप वन संरक्षक सुकेत वन मंडल की ओर से जारी पत्र के अनुसार, कांगू रेंज क्षेत्र में अवैध मलबा डंपिंग के चलते 144 घन मीटर मलबे का डैमेज बिल तय किया गया था, जिसकी राशि 50,400 रुपये है। यह राशि सड़क निर्माण कंपनी के माध्यम से एनएचएआई द्वारा जमा की जानी थी, जिसकी जिम्मेदारी परियोजना निदेशक पर तय की गई थी। हैरानी की बात यह है कि विभाग मई 2018, जून 2018, सितंबर 2018, जनवरी 2019, जून 2019 और नवंबर 2019 में लगातार पत्राचार करता रहा, लेकिन इसके बावजूद भुगतान नहीं किया गया। ताजा नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि 10 दिन के भीतर यह राशि रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर, कांगू के पास जमा नहीं करवाई जाती, तो वन विभाग नियमानुसार आगे की सख्त कार्रवाई अमल में लाएगा। इसके साथ ही मामले की सूचना उच्च अधिकारियों और संबंधित कार्यालयों को भी भेजी जाएगी।
इनसेट
आरटीआई में हुई थी पुष्टि
हाल ही में आरटीआई के जरिए यह तथ्य सामने आया था कि 50,400 रुपये की मुआवजा राशि की वसूली अब तक लंबित है। सुकेत वन मंडल सुंदरनगर के जन सूचना अधिकारी एवं अधीक्षक की ओर से दिए गए लिखित जवाब में यह भी स्पष्ट किया गया कि मलबा हटाने या उसे चिह्नित डंपिंग साइट पर डालने से संबंधित कोई रिकॉर्ड विभागीय अभिलेखों में दर्ज नहीं है।
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इनसेट
पर्यावरणीय नुकसान की आशंका
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि वन मंडल कार्यालय सुंदरनगर की लापरवाही से निजी सड़क निर्माण कंपनी को वर्षों तक गैरकानूनी लाभ मिला। गोबिंद सागर झील के सहायक नालों में मलबा डंप होने से पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका है, जो जनहित और पर्यावरण संरक्षण के स्थापित नियमों के विपरीत है।
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एनएचएआई प्रोजेक्ट डायरेक्टर को थमाया अंतिम नोटिस
लिखा-10 दिन में भुगतान नहीं हुआ तो होगी सख्त कार्रवाई
एक दशक बाद भी 50,400 डैमेज बिल वसूली लंबित
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर–नेरचौक फोरलेन सड़क निर्माण के दौरान गोबिंद सागर झील के सहायक नालों में अवैध रूप से मलबा डंप करने के मामले में अब वन विभाग ने कड़ा रुख अपना लिया है। सुकेत वन मंडल सुंदरनगर ने प्रोजेक्ट डायरेक्टर, पीआईयू–मंडी (बगला) को अंतिम चेतावनी नोटिस जारी करते हुए बकाया डैमेज बिल की राशि 50,400 रुपये 10 दिन के भीतर जमा करवाने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला वर्ष 2015–16 का है, जब बिना स्वीकृत डंपिंग साइट और बिना सुरक्षा दीवार के क्षमता से अधिक मलबा डंप किया गया था। विभागीय जांच में इसे वन अधिनियम और पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन माना गया था। उप वन संरक्षक सुकेत वन मंडल की ओर से जारी पत्र के अनुसार, कांगू रेंज क्षेत्र में अवैध मलबा डंपिंग के चलते 144 घन मीटर मलबे का डैमेज बिल तय किया गया था, जिसकी राशि 50,400 रुपये है। यह राशि सड़क निर्माण कंपनी के माध्यम से एनएचएआई द्वारा जमा की जानी थी, जिसकी जिम्मेदारी परियोजना निदेशक पर तय की गई थी। हैरानी की बात यह है कि विभाग मई 2018, जून 2018, सितंबर 2018, जनवरी 2019, जून 2019 और नवंबर 2019 में लगातार पत्राचार करता रहा, लेकिन इसके बावजूद भुगतान नहीं किया गया। ताजा नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि 10 दिन के भीतर यह राशि रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर, कांगू के पास जमा नहीं करवाई जाती, तो वन विभाग नियमानुसार आगे की सख्त कार्रवाई अमल में लाएगा। इसके साथ ही मामले की सूचना उच्च अधिकारियों और संबंधित कार्यालयों को भी भेजी जाएगी।
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आरटीआई में हुई थी पुष्टि
हाल ही में आरटीआई के जरिए यह तथ्य सामने आया था कि 50,400 रुपये की मुआवजा राशि की वसूली अब तक लंबित है। सुकेत वन मंडल सुंदरनगर के जन सूचना अधिकारी एवं अधीक्षक की ओर से दिए गए लिखित जवाब में यह भी स्पष्ट किया गया कि मलबा हटाने या उसे चिह्नित डंपिंग साइट पर डालने से संबंधित कोई रिकॉर्ड विभागीय अभिलेखों में दर्ज नहीं है।
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पर्यावरणीय नुकसान की आशंका
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि वन मंडल कार्यालय सुंदरनगर की लापरवाही से निजी सड़क निर्माण कंपनी को वर्षों तक गैरकानूनी लाभ मिला। गोबिंद सागर झील के सहायक नालों में मलबा डंप होने से पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका है, जो जनहित और पर्यावरण संरक्षण के स्थापित नियमों के विपरीत है।