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Bilaspur News: बंदला रूट पर खटारा बसों से हादसे की आशंका
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पंचायत प्रधान बोले, निगम नई बसें भेजे, वरना आंदोलन करेंगे
2011 के हादसे के बाद भी परिवहन निगम ने नहीं लिया सबक
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बिलासपुर-बंदला रूट पर चलने वाली खस्ताहाल बसों को लेकर बंदला और सिहड़ा पंचायत ने रोष जताया है। दोनों पंचायत के प्रधान ने कहा कि अगर परिवहन निगम का यही रवैया रहा तो दोनों पंचायतों के लोग सड़कों पर उतरेंगे।
बंदला के प्रधान सतीश ठाकुर और सिहड़ा पंचायत के प्रधान सरोज कुमार ने कहा बंदला रूट पर 2011 में हुए के हादसे के बावजूद परिवहन निगम ने सबक नहीं लिया है। इस हादसे में 32 लोगों ने जान गंवाई थी। उन्होंने कहा कि इस रूट पर बस हादसों का शिकार होना आम बात हो गई है। खटारा बसों को रूट पर भेजकर लोगों की जान को दांव पर लगाया जा रहा है। इस रूट पर कभी बस की ब्रेक फेल होती है तो कभी प्रेशर पाइप फट जाता है। रूट पर चलने वाली सभी बसों में काफी संख्या में यात्री होते हैं। विशेष रूप से जो बसें शाम के समय चलती हैं उनमें कॉलेज और स्कूल विद्यार्थियों सहित लोग हर दिन सफर करते हैं।
प्रधानों ने कहा कि निगम इस बात से भली भांति परिचित है कि बिलासपुर से लेकर बंदला तक 13 किलोमीटर चढ़ाई है। साथ ही बसों में क्षमता से अधिक सवारियां बस में होती हैं। इसके बावजूद पुरानी ही बसों को इस रूट पर भेजना कहां तक सही है। उन्होंने बताया कि सोमवार को बंदला रूट पर हादसे का शिकार हुई बस इसका साफ उदाहरण है। परिवहन निगम को लोगों की कोई परवाह नहीं है। सोमवार को 4:15 बजे चलने वाली बस खराब हुई। इसके बाद शाम 6:15 बजे बस बड़े हादसे का शिकार होने से बची। उन्होंने प्रशासन और निगम से आग्रह किया कि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए नई बसों को रूट पर भेजा जाए, ताकि लोगों को परेशानी न उठाने पड़े।
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उपमंडलाधिकारी सदर अभिषेक कुमार गर्ग ने कहा कि इसको लेकर परिवहन निगम से बात की जाएगी और उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।
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2011 के हादसे के बाद भी परिवहन निगम ने नहीं लिया सबक
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बिलासपुर-बंदला रूट पर चलने वाली खस्ताहाल बसों को लेकर बंदला और सिहड़ा पंचायत ने रोष जताया है। दोनों पंचायत के प्रधान ने कहा कि अगर परिवहन निगम का यही रवैया रहा तो दोनों पंचायतों के लोग सड़कों पर उतरेंगे।
बंदला के प्रधान सतीश ठाकुर और सिहड़ा पंचायत के प्रधान सरोज कुमार ने कहा बंदला रूट पर 2011 में हुए के हादसे के बावजूद परिवहन निगम ने सबक नहीं लिया है। इस हादसे में 32 लोगों ने जान गंवाई थी। उन्होंने कहा कि इस रूट पर बस हादसों का शिकार होना आम बात हो गई है। खटारा बसों को रूट पर भेजकर लोगों की जान को दांव पर लगाया जा रहा है। इस रूट पर कभी बस की ब्रेक फेल होती है तो कभी प्रेशर पाइप फट जाता है। रूट पर चलने वाली सभी बसों में काफी संख्या में यात्री होते हैं। विशेष रूप से जो बसें शाम के समय चलती हैं उनमें कॉलेज और स्कूल विद्यार्थियों सहित लोग हर दिन सफर करते हैं।
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प्रधानों ने कहा कि निगम इस बात से भली भांति परिचित है कि बिलासपुर से लेकर बंदला तक 13 किलोमीटर चढ़ाई है। साथ ही बसों में क्षमता से अधिक सवारियां बस में होती हैं। इसके बावजूद पुरानी ही बसों को इस रूट पर भेजना कहां तक सही है। उन्होंने बताया कि सोमवार को बंदला रूट पर हादसे का शिकार हुई बस इसका साफ उदाहरण है। परिवहन निगम को लोगों की कोई परवाह नहीं है। सोमवार को 4:15 बजे चलने वाली बस खराब हुई। इसके बाद शाम 6:15 बजे बस बड़े हादसे का शिकार होने से बची। उन्होंने प्रशासन और निगम से आग्रह किया कि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए नई बसों को रूट पर भेजा जाए, ताकि लोगों को परेशानी न उठाने पड़े।
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उपमंडलाधिकारी सदर अभिषेक कुमार गर्ग ने कहा कि इसको लेकर परिवहन निगम से बात की जाएगी और उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।