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बिजली बोर्ड ने किसान को थमा दिया 23 हजार रुपये का बिल
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भराड़ी (बिलासपुर)। उपमंडल घुमारवीं के विद्युत बोर्ड के सब डिवीजन दो के अंतर्गत आने वाले गांव पडयालग के एक किसान को कृषि के उद्देश्य से लगाए गए मीटर का 23 हजार 425 रुपये का बिल थमा दिया गया।
उपभोक्ता लेखराम का कहना है कि उसने करीब 10 साल पहले बिजली बोर्ड से कृषि के उद्देश्य से बिजली का मीटर लगवाया है। इसका बिल प्रतिमाह तीन सौ से चार सौ रुपये आता है। लेकिन जुलाई माह में बिजली बिल को देखकर होश उड़ गए। बिजली बोर्ड ने 22 हजार 749 रुपये का बिल बना दिया है। इस महीने आए बिल को मिला कर 23 हजार 425 रुपये बना दिया। किसान का कहना है कि इससे पहले कभी इतना भारी भरकम बिल नहीं आया। बताया कि बिल के हिसाब से पुरानी मीटर रीडिंग 5450 थी। जबकि नई रीडिंग बिजली 31555 दिखा रहा है। इस हिसाब से 25,805 यूनिट खर्च बताई गई। वहीं उसे 3 रुपये 70 पैसे के हिसाब से प्रति यूनिट का खर्चा दिखाया गया है। बिल में पेमेंट 96 हजार 478 रुपये बना दी गई है। इसके बाद सरकारी उप अनुदान के रूप में 82 हजार 576 रुपये की कटौती भी बताई गई है। इसके बाद एसओपी चार्जेस 13 हजार रुपये तथा 10 फीसदी इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी यानी करीब 9,547 रुपये जोड़कर कुल बिल के करीब 22,749 रुपये बना दिए गए। जबकि इस महीने फिर से बिल करीब 840 रुपये ही बनाया है। किसान ने कहा कि बोर्ड ने एरियर के नाम पर बिल में 22748 जोड़कर उसे 23425 का बिल थमा दिया। उधर, बिजली बोर्ड के अधिशासी अभियंता नसीब चंद ने कहा कि बिल में जो एरियर दिखाया है उसका तो यही मतलब निकलता है कि उपभोक्ता का पिछला बकाया रहता है जो आगे जुड़ गया है। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ है तो यह कोई गलती हो सकती है। अगर कोई गलती हुई होगी तो इसे तुरंत प्रभाव से ठीक कर दिया जाएगा।
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उपभोक्ता लेखराम का कहना है कि उसने करीब 10 साल पहले बिजली बोर्ड से कृषि के उद्देश्य से बिजली का मीटर लगवाया है। इसका बिल प्रतिमाह तीन सौ से चार सौ रुपये आता है। लेकिन जुलाई माह में बिजली बिल को देखकर होश उड़ गए। बिजली बोर्ड ने 22 हजार 749 रुपये का बिल बना दिया है। इस महीने आए बिल को मिला कर 23 हजार 425 रुपये बना दिया। किसान का कहना है कि इससे पहले कभी इतना भारी भरकम बिल नहीं आया। बताया कि बिल के हिसाब से पुरानी मीटर रीडिंग 5450 थी। जबकि नई रीडिंग बिजली 31555 दिखा रहा है। इस हिसाब से 25,805 यूनिट खर्च बताई गई। वहीं उसे 3 रुपये 70 पैसे के हिसाब से प्रति यूनिट का खर्चा दिखाया गया है। बिल में पेमेंट 96 हजार 478 रुपये बना दी गई है। इसके बाद सरकारी उप अनुदान के रूप में 82 हजार 576 रुपये की कटौती भी बताई गई है। इसके बाद एसओपी चार्जेस 13 हजार रुपये तथा 10 फीसदी इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी यानी करीब 9,547 रुपये जोड़कर कुल बिल के करीब 22,749 रुपये बना दिए गए। जबकि इस महीने फिर से बिल करीब 840 रुपये ही बनाया है। किसान ने कहा कि बोर्ड ने एरियर के नाम पर बिल में 22748 जोड़कर उसे 23425 का बिल थमा दिया। उधर, बिजली बोर्ड के अधिशासी अभियंता नसीब चंद ने कहा कि बिल में जो एरियर दिखाया है उसका तो यही मतलब निकलता है कि उपभोक्ता का पिछला बकाया रहता है जो आगे जुड़ गया है। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ है तो यह कोई गलती हो सकती है। अगर कोई गलती हुई होगी तो इसे तुरंत प्रभाव से ठीक कर दिया जाएगा।
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