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Bilaspur News: सात साल बाद भी अदालत नहीं पहुंचे नयना देवी खैर कटान केस के चालान
Fri, 08 Aug 2025 11:26 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 08 Aug 2025 11:26 PM IST
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- वन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों पर अभियोजन की नहीं मिल रही मंजूरी, फरवरी 2018 में सामने आया था मामला
- विजिलेंस ने 2023 में सभी आपत्तियां दूर कर भेजी है अभियोजन मंजूरी के लिए फाइल
- दो साल से अभियोजन मंजूरी न मिलने से विजिलेंस की कार्रवाई ठप
- वन विभाग के 13 अधिकारी-कर्मचारी और 62 ठेकेदार व एजेंट हैं मामले में आरोपी
सरोज पाठक
बिलासपुर। श्री नयना देवी जी वन रेंज में फरवरी 2018 में उजागर हुए खैर के अवैध कटान केस में सात साल बीत जाने के बाद भी कोर्ट में चालान पेश नहीं हो पाया है। विजिलेंस ने 2023 में जांच पूरी कर फाइल अभियोजन मंजूरी के लिए विभाग के उच्च अधिकारियों को भेज दी थी, लेकिन मंजूरी दो साल से लंबित है। जब तक यह मंजूरी नहीं मिलती, विजिलेंस कोर्ट में चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकती।
मामला वन विभाग के बड़े अधिकारियों और राजनीतिक रसूख रखने वालों से जुड़ा होने की आशंका के कारण शुरू से ही संवेदनशील माना गया है। विजिलेंस ने जांच में वन विभाग के 13 अधिकारियों व कर्मचारियों, 62 ठेकेदारों और खैर कटान से जुड़े ठेकेदारों सहित कुल 75 लोगों को आरोपी बनाया है। जांच में सामने आया कि साल 2015-16 में वन रेंज की पांच बीट सलोआ, भाखड़ा, बड़ोह, कोट और बस्सी में करीब 18 हजार खैर के पेड़ों को काटा गया। इनकी कीमत विभाग ने लगभग 35 करोड़ रुपये आंकी।
25 फरवरी 2018 को अमर उजाला ने मामले का खुलासा किया, जिसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप से यह केस विजिलेंस को सौंपा गया। विजिलेंस ने एफआईआर दर्ज कर वन क्षेत्र की निशानदेही, कटे पेड़ों का निशानदेही और दिल्ली, पंजाब व हरियाणा की कत्था फैक्ट्रियों से रिकॉर्ड जुटाया। जांच पूरी होने के बाद जब फाइल उच्च अधिकारियों को भेजी गई, तो कई आपत्तियां लगाई गईं। आपत्तियां दूर कर साल 2023 में फाइल दोबारा भेजी गई, लेकिन मंजूरी अब भी अटकी है। हैरानी का विषय यह है कि श्री नयना देवी जी खैर कटान के अलावा भी कुछ और मामले हैं, जिनकी विजिलेंस जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन वन विभाग अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को चार्जशीट करने की अनुमति ही नहीं दे रहा है। अब सवाल यह है कि विभाग आरोपी अधिकारियों और कर्मचारियों पर अभियोजन की मंजूरी क्यों नहीं दे रहा है। संवाद
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कोट-- --
विजिलेंस को अभियोजन मंजूरी का इंतजार
विजिलेंस मंडी जोन के एसपी कुलभूषण वर्मा ने बताया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है। चूंकि आरोपियों में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी शामिल हैं, इसलिए अभियोजन मंजूरी जरूरी है। मंजूरी मिलते ही चालान कोर्ट में पेश कर दिया जाएगा।
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- विजिलेंस ने 2023 में सभी आपत्तियां दूर कर भेजी है अभियोजन मंजूरी के लिए फाइल
- दो साल से अभियोजन मंजूरी न मिलने से विजिलेंस की कार्रवाई ठप
- वन विभाग के 13 अधिकारी-कर्मचारी और 62 ठेकेदार व एजेंट हैं मामले में आरोपी
सरोज पाठक
बिलासपुर। श्री नयना देवी जी वन रेंज में फरवरी 2018 में उजागर हुए खैर के अवैध कटान केस में सात साल बीत जाने के बाद भी कोर्ट में चालान पेश नहीं हो पाया है। विजिलेंस ने 2023 में जांच पूरी कर फाइल अभियोजन मंजूरी के लिए विभाग के उच्च अधिकारियों को भेज दी थी, लेकिन मंजूरी दो साल से लंबित है। जब तक यह मंजूरी नहीं मिलती, विजिलेंस कोर्ट में चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकती।
मामला वन विभाग के बड़े अधिकारियों और राजनीतिक रसूख रखने वालों से जुड़ा होने की आशंका के कारण शुरू से ही संवेदनशील माना गया है। विजिलेंस ने जांच में वन विभाग के 13 अधिकारियों व कर्मचारियों, 62 ठेकेदारों और खैर कटान से जुड़े ठेकेदारों सहित कुल 75 लोगों को आरोपी बनाया है। जांच में सामने आया कि साल 2015-16 में वन रेंज की पांच बीट सलोआ, भाखड़ा, बड़ोह, कोट और बस्सी में करीब 18 हजार खैर के पेड़ों को काटा गया। इनकी कीमत विभाग ने लगभग 35 करोड़ रुपये आंकी।
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25 फरवरी 2018 को अमर उजाला ने मामले का खुलासा किया, जिसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप से यह केस विजिलेंस को सौंपा गया। विजिलेंस ने एफआईआर दर्ज कर वन क्षेत्र की निशानदेही, कटे पेड़ों का निशानदेही और दिल्ली, पंजाब व हरियाणा की कत्था फैक्ट्रियों से रिकॉर्ड जुटाया। जांच पूरी होने के बाद जब फाइल उच्च अधिकारियों को भेजी गई, तो कई आपत्तियां लगाई गईं। आपत्तियां दूर कर साल 2023 में फाइल दोबारा भेजी गई, लेकिन मंजूरी अब भी अटकी है। हैरानी का विषय यह है कि श्री नयना देवी जी खैर कटान के अलावा भी कुछ और मामले हैं, जिनकी विजिलेंस जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन वन विभाग अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को चार्जशीट करने की अनुमति ही नहीं दे रहा है। अब सवाल यह है कि विभाग आरोपी अधिकारियों और कर्मचारियों पर अभियोजन की मंजूरी क्यों नहीं दे रहा है। संवाद
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विजिलेंस को अभियोजन मंजूरी का इंतजार
विजिलेंस मंडी जोन के एसपी कुलभूषण वर्मा ने बताया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है। चूंकि आरोपियों में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी शामिल हैं, इसलिए अभियोजन मंजूरी जरूरी है। मंजूरी मिलते ही चालान कोर्ट में पेश कर दिया जाएगा।