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भाखड़ा विस्थापितों की मूलभूत समस्याओं को शीघ्र हल करे सरकार
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बरठीं(बिलासपुर)। ग्रामीण भाखड़ा विस्थापित संगठन जिला संघ की एक बैठक पंचायत प्रधान भजन लाल शर्मा की अध्यक्षता में कुट बांगड़ कोसरियां में हुई जिसमें ग्रामीण भाखड़ा विस्थापित सुधार समिति के जिला प्रधान देशराज शर्मा मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित हुए।
उन्होंने कहा कि भाखड़ा विस्थापितों व प्रभावितों की मूलभूत समस्याओं को आज तक नहीं सुलझाया गया जिसके कारण विस्थापितों में सरकार के प्रति गहरा रोष है। भाखड़ा बांध का निर्माण कार्य 1948 में शुरू हुआ और 1963 को पूर्ण हुआ था। उसके बाद लगातार विस्थापितों का उजड़ना शुरू हो गया और उनके पुनर्वास के लिए न केंद्र सरकार और न ही प्रदेश सरकार ने कोई नीति नहीं बनाई।
शर्मा ने बताया कि ग्रामीण भाखड़ा विस्थापित सुधार समिति ने प्रदेश में रही दोनों दलों की सरकारों के समक्ष अपना दुखड़ा रोया लेकिन आज तक भाजपा व कांग्रेस की किसी भी सरकार ने उनकी समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने बताया कि इसके लिए वह प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्री, चेयरमैन, जिलाधीश, सांसद व विधायकों को पत्र द्वारा सूचित कर चुके हैं लेकिन अभी तक कोई भी कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। उन्होंने बताया कि विस्थापितों के बिजली व पानी के कनेक्शन काट दिए गए हैं जिनको शीघ्र लगाया जाए।
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वहीं संगठन ने कहा कि विस्थापितों के लिए सिंचाई का पानी झील से उपलब्ध करवाना, बच्चों को बीबीएमबी व सरकारी नौकरी में आरक्षण, बिजली उत्पादन का 7.19 प्रतिशत हिस्सा मूलभूत सुविधाओं पर खर्च करना व प्लाट देना, भजवाणी, बैरी दड़ोला, ज्योरीपत्तन, बुखर, गाह, डैहण में पुल निर्माण, मछुवारों के हितों की रक्षा और गोबिंदसागर को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करना उनकी प्रमुख मांगें हैं। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि आज तक विस्थापितों को मात्र सब्जबाग दिखाए हैं यदि जल्दी ही उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो आने वाले समय में आंदोलन खड़ा किया जाएगा जिसकी सारी जिम्मेवारी सरकार की होगी। इस मौके पर स्थानीय यूनिट का गठन किया गया जिसमें तिलक राज शर्मा को अध्यक्ष, अनिता कुमारी उपाध्यक्ष, कर्मचंद को सचिव बनाया गया। बैठक में मस्तराम, नंद लाल शर्मा, दिला राम, सीमा देवी, सुखदेव, तुलसी राम, जितेंद्र, जोगिन्द्र पाल, रणजीत सिंह, कुलदीप सिंह, बिमला देवी, राजकुमार, अश्विनी कुमार, सुमन कुमार सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
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उन्होंने कहा कि भाखड़ा विस्थापितों व प्रभावितों की मूलभूत समस्याओं को आज तक नहीं सुलझाया गया जिसके कारण विस्थापितों में सरकार के प्रति गहरा रोष है। भाखड़ा बांध का निर्माण कार्य 1948 में शुरू हुआ और 1963 को पूर्ण हुआ था। उसके बाद लगातार विस्थापितों का उजड़ना शुरू हो गया और उनके पुनर्वास के लिए न केंद्र सरकार और न ही प्रदेश सरकार ने कोई नीति नहीं बनाई।
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शर्मा ने बताया कि ग्रामीण भाखड़ा विस्थापित सुधार समिति ने प्रदेश में रही दोनों दलों की सरकारों के समक्ष अपना दुखड़ा रोया लेकिन आज तक भाजपा व कांग्रेस की किसी भी सरकार ने उनकी समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने बताया कि इसके लिए वह प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्री, चेयरमैन, जिलाधीश, सांसद व विधायकों को पत्र द्वारा सूचित कर चुके हैं लेकिन अभी तक कोई भी कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। उन्होंने बताया कि विस्थापितों के बिजली व पानी के कनेक्शन काट दिए गए हैं जिनको शीघ्र लगाया जाए।
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वहीं संगठन ने कहा कि विस्थापितों के लिए सिंचाई का पानी झील से उपलब्ध करवाना, बच्चों को बीबीएमबी व सरकारी नौकरी में आरक्षण, बिजली उत्पादन का 7.19 प्रतिशत हिस्सा मूलभूत सुविधाओं पर खर्च करना व प्लाट देना, भजवाणी, बैरी दड़ोला, ज्योरीपत्तन, बुखर, गाह, डैहण में पुल निर्माण, मछुवारों के हितों की रक्षा और गोबिंदसागर को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करना उनकी प्रमुख मांगें हैं। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि आज तक विस्थापितों को मात्र सब्जबाग दिखाए हैं यदि जल्दी ही उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो आने वाले समय में आंदोलन खड़ा किया जाएगा जिसकी सारी जिम्मेवारी सरकार की होगी। इस मौके पर स्थानीय यूनिट का गठन किया गया जिसमें तिलक राज शर्मा को अध्यक्ष, अनिता कुमारी उपाध्यक्ष, कर्मचंद को सचिव बनाया गया। बैठक में मस्तराम, नंद लाल शर्मा, दिला राम, सीमा देवी, सुखदेव, तुलसी राम, जितेंद्र, जोगिन्द्र पाल, रणजीत सिंह, कुलदीप सिंह, बिमला देवी, राजकुमार, अश्विनी कुमार, सुमन कुमार सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।