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जिले को कुष्ठ रोग मुक्त बनाने के लिए किए जा रहे प्रयास : डॉ. प्रवीण

Thu, 04 Jan 2024 11:05 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 04 Jan 2024 11:05 PM IST
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Efforts are being made to make the district leprosy free: Dr. Praveen
-जिले में 12 कुष्ठ रोगियों का चल रहा निशुल्क इलाज
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- अप्रैल 2023 से अब तक सामने आए सात रोगी

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले को कुष्ठ रोग मुक्त बनाने के हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। कुष्ठ रोगियों का इलाज निशुल्क किया जा रहा है। जिले में कुल 12 लोग इस रोग से ग्रस्त हैं। इसमें से सात रोगी अप्रैल 2023 के बाद सामने आए हैं। यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार ने दी।

उन्होंने बताया कि कुष्ठ रोग भी अन्य रोगों की तरह एक इलाज योग्य बीमारी है। यह माइकोबैक्टीरियम लेप्री के कारण होता है। यह कोई अभिशाप, पाप या कोई दैवी प्रकोप के कारण नहीं होता है। यह बीमारी अब एक आम स्वास्थ्य समस्या नहीं है, लेकिन अभी भी इसका विषाणु वातावरण में व्याप्त है। यह बीमारी खांसने छींकने और लंबे समय तक संक्रामक रोगी के साथ रहने से फैलती है। इस दौरान व्यक्ति के शरीर में त्वचा पर हल्के पीले रंग के दाग, तांबे रंग के दाग, जिनमें छूने पर चेतना का एहसास न होना, शरीर के किसी भाग में नसों का मोटा होना, हाथों की उंगलियों की पकड़ कम होना, आंखों की पलकों का बंद न होना, भौंहों के बालों का कम होना, शरीर के घावों का लंबे समय तक ठीक न होना इसके लक्षण हैं। उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से समय-समय पर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके लिए विशेष अभियान चलाए जाते हैं। समाज में इस रोग के बारे में फैली भ्रांतियों को दूर करने के बारे में जागरूक करने के प्रयास लगातार जारी हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी में यह लक्षण पाए जाते हैं तो शीघ्र चिकित्सक को दिखाएं। समाज को इस रोग से पीड़ित मरीजों से किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करना चाहिए। कुष्ठ रोग साध्य रोग है। इसका पूर्ण इलाज छह माह से एक साल करने से मरीज पूर्ण रूप से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करता है। इसकी जैसे ही दवा शुरू की जाती है वैसे ही रोग का जीवाणु दूसरों में संचरण करना बंद हो जाता है। गांव में आशा कार्यकर्ता की अहम भूमिका होती है। आशा कार्यकर्ता यदि रोगी को बिना डिफॉरमेटी के अस्पताल लाती है तो उसे 250 रुपये और डिफॉरमेटी के साथ अस्पताल लाती है तो 200 रुपये प्रति रोगी मिलते हैं। साथ ही 12 माह का इलाज पूरा करवाती हैं तो उन्हें 600 रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में मिलते हैं।
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