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प्रदेश में 350 से अधिक पाठशालाओं में नहीं मुखिया : सुरेश
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बरठीं(बिलासपुर)। हिमाचल प्रदेश मुख्याध्यापक एवं प्रधानाचार्य अधिकारी संघ जिला बिलासपुर इकाई की बैठक प्रधान सुरेश ठाकुर की अध्यक्षता में राजकीय उच्च पाठशाला अंद्ररोली में हुई जिसमें संघ के लगभग 40 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक में इस बात पर कड़ा रोष जताया गया कि हिमाचल प्रदेश में लगभग 350 से अधिक राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बिना मुखिया से ही चल रहे हैं। एक ओर जहां सरकार शिक्षा में गुणवत्ता की बात करती है दूसरी ओर प्रधानाचार्य के बिना पाठशालाएं किस प्रकार चल रही हैं।
सुरेश ठाकुर ने कहा कि मुख्याध्यापक बनने के लिए ही एक टीजीटी को लगभग 28 से 30 वर्ष लग जाते हैं। उसके उपरांत प्रधानाचार्य की पदोन्नति के लिए भी मुख्य अध्यापक को लगभग 4 से 5 वर्ष का इंतजार करना पड़ता है। यह विभाग की ढुलमुल नीति का ही परिणाम है कि लगभग 1.5 वर्ष का समय बीत जाने के बाद भी प्रधानाचार्य पदोन्नति की सूची नहीं निकली है।
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सुरेश ठाकुर ने कहा कि आज लोग 30 वर्ष के सेवाकाल के बाद भी प्रधानाचार्य पदोन्नत नहीं हो पा रहे हैं। कुछ तो मुख्य अध्यापक पद से ही सेवानिवृत्त हो गए हैं या होने वाले हैं। बैठक में शिक्षा विभाग की लेटलतीफी पर कड़ा एतराज जताया है। यह भी मांग की गई की यदि विभाग ने प्रधानाचार्य की पदोन्नति की सूची अगले सप्ताह तक नहीं निकाली तो संघ को मजबूरन संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ेगा जिसके लिए शिक्षा विभाग ही जिम्मेदार होगा।
संघ ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भी मांग रखी की वह इस मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करते हुए जो भी इस लेटलतीफी के लिए जिम्मेदार है उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाए तथा प्रधानाचार्य पदोन्नति सूची शीघ्र निकाली जाए। बैठक में जिला महासचिव संजीव शर्मा, जिला कोषाध्यक्ष सुशील, राजकुमार, मनोज कुमार, अनिल शर्मा, राजीव गौतम, रमेश कुमार, पवन शर्मा आदि 40 पदाधिकारियों ने भाग लिया।
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बैठक में इस बात पर कड़ा रोष जताया गया कि हिमाचल प्रदेश में लगभग 350 से अधिक राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बिना मुखिया से ही चल रहे हैं। एक ओर जहां सरकार शिक्षा में गुणवत्ता की बात करती है दूसरी ओर प्रधानाचार्य के बिना पाठशालाएं किस प्रकार चल रही हैं।
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सुरेश ठाकुर ने कहा कि मुख्याध्यापक बनने के लिए ही एक टीजीटी को लगभग 28 से 30 वर्ष लग जाते हैं। उसके उपरांत प्रधानाचार्य की पदोन्नति के लिए भी मुख्य अध्यापक को लगभग 4 से 5 वर्ष का इंतजार करना पड़ता है। यह विभाग की ढुलमुल नीति का ही परिणाम है कि लगभग 1.5 वर्ष का समय बीत जाने के बाद भी प्रधानाचार्य पदोन्नति की सूची नहीं निकली है।
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सुरेश ठाकुर ने कहा कि आज लोग 30 वर्ष के सेवाकाल के बाद भी प्रधानाचार्य पदोन्नत नहीं हो पा रहे हैं। कुछ तो मुख्य अध्यापक पद से ही सेवानिवृत्त हो गए हैं या होने वाले हैं। बैठक में शिक्षा विभाग की लेटलतीफी पर कड़ा एतराज जताया है। यह भी मांग की गई की यदि विभाग ने प्रधानाचार्य की पदोन्नति की सूची अगले सप्ताह तक नहीं निकाली तो संघ को मजबूरन संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ेगा जिसके लिए शिक्षा विभाग ही जिम्मेदार होगा।
संघ ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भी मांग रखी की वह इस मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करते हुए जो भी इस लेटलतीफी के लिए जिम्मेदार है उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाए तथा प्रधानाचार्य पदोन्नति सूची शीघ्र निकाली जाए। बैठक में जिला महासचिव संजीव शर्मा, जिला कोषाध्यक्ष सुशील, राजकुमार, मनोज कुमार, अनिल शर्मा, राजीव गौतम, रमेश कुमार, पवन शर्मा आदि 40 पदाधिकारियों ने भाग लिया।