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Bilaspur News: स्कूलों में पेयजल पर संकट, बिलों ने बढ़ाई मुश्किलें

Sat, 21 Feb 2026 11:42 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Sat, 21 Feb 2026 11:42 PM IST
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Drinking water crisis in schools, bills increase difficulties
त्रैमासिक 1700 रुपये तक आने लगा पानी का बिल
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भुगतान न होने पर जलापूर्ति बंद करने का नोटिस

संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। जिले की प्राथमिक पाठशालाओं में इन दिनों बच्चों के पीने के पानी पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। अब तक जिन नलों से मासूमों की प्यास बुझती थी, उन्हीं पर पानी के खर्च के रूप त्रैमासिक करीब 1700 रुपये तक के बिल आने शुरू हो गए हैं। हालत यह है कि जल शक्ति विभाग हिमाचल प्रदेश की ओर से बार-बार रिमाइंडर भेजे जा रहे हैं और समय पर भुगतान न होने की स्थिति में कनेक्शन काटने की चेतावनी भी जारी की जा चुकी है।

हालांकि स्कूलों के लिए यह केवल एक बिल नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था पर सीधा असर डालने वाला मामला बन गया है। यदि पानी का कनेक्शन काट दिया गया तो बच्चों के पीने के पानी, मिड-डे मील व्यवस्था और शौचालयों की स्वच्छता सभी प्रभावित हो सकती है। प्राथमिक स्तर पर पढ़ने वाले छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक मानी जा रही है। जानकारी के अनुसार अधिकांश स्कूलों में जलवाहक की नियुक्ति नहीं है, ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था कर पाना लगभग असंभव है। शिक्षकों का कहना है कि पहले ही सीमित संसाधनों के सहारे स्कूल चलाए जा रहे हैं। हर वर्ष मिलने वाली लगभग 5000 रुपये की कंपोजिट ग्रांट भी सत्र के अंत में मिलती है, जिसमें से करीब 75 प्रतिशत राशि बिजली बिलों में ही खर्च हो जाती है। प्राथमिक शिक्षक संघ बिलासपुर के प्रधान राकेश पटियाल ने बताया कि यदि पानी का बिल नियमित देना पड़ा तो सालाना करीब 7000 रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ स्कूलों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि स्कूलों में किसी भी प्रकार का अतिरिक्त फंड लेना बंद है, ऐसे में यह राशि किस मद से दी जाए यह बड़ा प्रश्न है। शिक्षकों ने सरकार से मांग की है कि स्कूलों के पानी के बिल पहले की तरह माफ किए जाएं या इसके लिए अलग से अनुदान जारी किया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में पेयजल संकट गहराएगा और इसका सीधा असर बच्चों की सेहत और शिक्षा दोनों पर पड़ेगा।
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