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Bilaspur News: चिकित्सक की बिना सलाह से कोई दवा न खाएं
Fri, 24 Jan 2025 11:27 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 24 Jan 2025 11:27 PM IST
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-कोठीपुरा स्कूल में ओवर द काउंटर पर कार्यशाला आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कोठीपुरा में राष्ट्रीय आविष्कार अभियान के तहत विद्यार्थियों को सेल्फ मेडिकेशन और ओवर द काउंटर पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर एम्स बिलासपुर के डिपार्टमेंट ऑफ फार्माकोलॉजी की सहायक प्रो. डॉ. यानशीन, सहायक प्रो. डॉ. मीनाक्षी ने विशेष तौर पर शिरकत की।
उन्होंने कहा कि आज के समय में व्यस्त जीवनशैली, बढ़ती महंगाई और इंटरनेट पर बढ़ती निर्भरता के कारण सेल्फ मेडिकेशन लोगों की आदत बन चुकी है। बिना किसी स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लिए लोग फार्मासिस्ट को समस्या के लक्षण बताकर दवा ले लेते हैं। हालांकि यह आदत गंभीर बीमारी को जन्म दे सकती है। ड्रग्स सेल्फ मेडिकेशन या स्व चिकित्सा का मतलब अपनी बीमारियों के बारे में गूगल या इंटरनेट से पता करना और कम से कम जानकारी के आधार पर बिना किसी विशेषज्ञ की देखरेख के दवाएं लेना है। यह सेहत के लिए कई प्रकार से खतरनाक हो सकती है। बीमारियों से बचे रहने के लिए नियमित रूप से स्वास्थ्य की जांच कराते रहना बहुत जरूरी है। इससे समय रहते गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में पता चल जाता है जिससे इलाज प्राप्त करना और ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि हमारे समाज में बीमारियों के इलाज को लेकर बिना चिकित्सक से पूछे खुद से ही दवा लेकर खा लेना सबसे बड़ी खामी है। इसे मेडिकल की भाषा में सेल्फ मेडिकेशन कहते हैं। ओवर द काउंटर दवा लेकर आप फौरी तौर पर समस्या से तो आराम पा लेते हैं। लेकिन दीर्घकालिक रूप से आपकी यह आदत कई प्रकार से नुकसानदायक हो सकती है। कई अध्ययनों में लंबे समय तक पेनकिलर या ओवर द काउंटर मेडिसिन लेने के कारण किडनी और कई अन्य अंगों के फेलियर का खतरा भी देखा जाता रहा है। इसी से संबंधित एक हालिया रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने बताया कि दर्द निवारक दवाओं के बार-बार या अधिक सेवन के कारण हार्ट अटैक और आंतरिक रक्तस्राव होने का जोखिम हो सकता है। इस मौके पर प्रधानाचार्य निर्मला ठाकुर, सभी अध्यापक, प्राध्यापक आदि उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कोठीपुरा में राष्ट्रीय आविष्कार अभियान के तहत विद्यार्थियों को सेल्फ मेडिकेशन और ओवर द काउंटर पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर एम्स बिलासपुर के डिपार्टमेंट ऑफ फार्माकोलॉजी की सहायक प्रो. डॉ. यानशीन, सहायक प्रो. डॉ. मीनाक्षी ने विशेष तौर पर शिरकत की।
उन्होंने कहा कि आज के समय में व्यस्त जीवनशैली, बढ़ती महंगाई और इंटरनेट पर बढ़ती निर्भरता के कारण सेल्फ मेडिकेशन लोगों की आदत बन चुकी है। बिना किसी स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लिए लोग फार्मासिस्ट को समस्या के लक्षण बताकर दवा ले लेते हैं। हालांकि यह आदत गंभीर बीमारी को जन्म दे सकती है। ड्रग्स सेल्फ मेडिकेशन या स्व चिकित्सा का मतलब अपनी बीमारियों के बारे में गूगल या इंटरनेट से पता करना और कम से कम जानकारी के आधार पर बिना किसी विशेषज्ञ की देखरेख के दवाएं लेना है। यह सेहत के लिए कई प्रकार से खतरनाक हो सकती है। बीमारियों से बचे रहने के लिए नियमित रूप से स्वास्थ्य की जांच कराते रहना बहुत जरूरी है। इससे समय रहते गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में पता चल जाता है जिससे इलाज प्राप्त करना और ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि हमारे समाज में बीमारियों के इलाज को लेकर बिना चिकित्सक से पूछे खुद से ही दवा लेकर खा लेना सबसे बड़ी खामी है। इसे मेडिकल की भाषा में सेल्फ मेडिकेशन कहते हैं। ओवर द काउंटर दवा लेकर आप फौरी तौर पर समस्या से तो आराम पा लेते हैं। लेकिन दीर्घकालिक रूप से आपकी यह आदत कई प्रकार से नुकसानदायक हो सकती है। कई अध्ययनों में लंबे समय तक पेनकिलर या ओवर द काउंटर मेडिसिन लेने के कारण किडनी और कई अन्य अंगों के फेलियर का खतरा भी देखा जाता रहा है। इसी से संबंधित एक हालिया रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने बताया कि दर्द निवारक दवाओं के बार-बार या अधिक सेवन के कारण हार्ट अटैक और आंतरिक रक्तस्राव होने का जोखिम हो सकता है। इस मौके पर प्रधानाचार्य निर्मला ठाकुर, सभी अध्यापक, प्राध्यापक आदि उपस्थित रहे।
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