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बिना प्रमाणपत्र लौटे 60 किलोमीटर दूर से आए दिव्यांग

Sat, 06 Mar 2021 12:43 AM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 06 Mar 2021 12:43 AM IST
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Divyang came from 60 km away without a certificate
जिला अस्पताल में दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने आए दिव्यांग मेडिकल विशेषज्ञ का इंतजार करते हुए - फोटो : BILASPUR
बिना प्रमाणपत्र लौटे 60 किलोमीटर दूर से आए दिव्यांग
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चार बजे ड्यूटी छोड़ गए एमडी, नहीं हो दिव्यांगों की जांच
पहले शुक्रवार को प्रमाणपत्र बनाने बैठता है मेडिकल बोर्ड
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार को दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने के लिए मेडिकल बोर्ड बैठाया तो सही लेकिन मेडिकल विशेषज्ञ 4 बजे ओपीडी से चले गए। इससे दूरदराज से आए दिव्यांगों के प्रमाणपत्र नहीं बन पाए। प्रमाणपत्र न बनने से इन दिव्यांगों को शनिवार को दोबारा अस्पताल आना होगा। इसके लिए उन्हें करीब 50 से 60 किमी सफर करना पड़ेगा।

शुक्रवार सुबह प्रमाणपत्र बनाने के लिए चिकित्सकों का बोर्ड दिव्यांगों की जांच कर उन्हें अपंगता प्रतिशत के प्रमाण पत्र जारी कर रहे थे। अस्पताल के कमरा नंबर 203 में दिव्यांगों जांच की गई। वहीं, कमरा 209 के चिकित्सक एमडी अतुल शर्मा शाम के 4 बजेे ओपीडी से चले गए। उनके सुरक्षा कर्मी ने बाहर खड़े मरीजों से चिकित्सक के वार्ड में जाने की बात कही। मरीज 5 बजे तक चिकित्सक का इंतजार करते रहे। लंबे इंतजार के बाद कुछ मरीज अस्पताल से घर चले गए। लेकिन एमडी वापस ओपीडी नहीं आए। बता दें कि कमरा 209 में ज्यादातर लकवाग्रस्त मरीज परेशान थे। कमला देवी मरोतन, निर्मला देवी धनी के खरली गांव, ढलोह से बबली देवी और प्रकाश झंडूता से सुबह से मेडिकल जांच के लिए भूखे प्यासे बैठे रहे। डमली पंचायत वार्ड सदस्य कांता देवी ने बताया कि वे निर्मला देवी को गाड़ी किराये पर लेकर अस्पताल लाई थीं। वहीं, ध्यान सिंह, कांशी राम, अनुराधा ने बताया कि सभी दिव्यांग हैं और वो 50 से 60 किलोमीटर सफर कर जिला अस्पताल प्रमाणपत्र बनवाने आए थे। लेकिन अब प्रमाणपत्र न बनने से उन्हें अगले दिन फिर से जिला अस्पताल आना पड़ेगा। उधर, एमडी डॉ. अतुल शर्मा ने बताया कि उन्हें 10 से 4 बजे तक ही मेडिकल जांच के आदेश हैं। वहीं, सीएमओ बिलासपुर डॉ. प्रकाश दड़ोच ने बताया कि चिकित्सकों को प्रमाणपत्र बनाने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की गई है। जब तक चिकित्सक के ओपीडी के बाहर लोग होंगे, उन्हें काम करना पड़ेगा।
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