{"_id":"69eb6f68687a434972047812","slug":"discussion-on-official-language-hindi-in-bilaspur-challenges-and-solutions-enumerated-in-the-seminar-bilaspur-news-c-92-1-ssml1001-158610-2026-04-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: बिलासपुर में राजभाषा हिंदी पर मंथन, संगोष्ठी में गिनाईं चुनौतियां और समाधान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bilaspur News: बिलासपुर में राजभाषा हिंदी पर मंथन, संगोष्ठी में गिनाईं चुनौतियां और समाधान
Fri, 24 Apr 2026 11:54 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 24 Apr 2026 11:54 PM IST
विज्ञापन
बिलासपुर में आयोजित राजभाषा कार्यान्वयन समिति की ओर से आयोजित संगोष्ठी में मौजूद अधिकारी और कर्
कार्यालयों में हिंदी के प्रभावी प्रयोग पर जोर, मेधावी विद्यार्थियों को किया सम्मानित
राजभाषा नीति के क्रियान्वयन से प्रशासनिक कामकाज को सरल बनाने पर बल
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर में शुक्रवार को नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास) की ओर से हुई संगोष्ठी में केंद्रीय कार्यालयों में हिंदी के प्रयोग की स्थिति, चुनौतियों और समाधान पर विस्तार से मंथन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों, बैंकों और सार्वजनिक उपक्रमों के अधिकारियों व कर्मचारियों ने भाग लेकर अपने अनुभव साझा किए।
संगोष्ठी का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद नराकास अध्यक्ष ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि हिंदी के प्रति प्रीतिभाव अपनाने और कार्यालयीन कार्यों में इसके अधिकाधिक उपयोग की जरूरत है। संगोष्ठी में जेके मंडल ने मुख्य वक्ता के रूप में केंद्रीय कार्यालयों में हिंदी के प्रयोग की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला।
वहीं प्रेम सिंह ने राजभाषा नीति का कार्यान्वयन सिद्धांत से व्यवहार तक विषय पर व्याख्यान देते हुए प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के प्रभावी उपयोग पर जोर दिया। नराकास अध्यक्ष एवं अग्रणी जिला प्रबंधक चंद्र शेखर यादव ने कहा कि हिंदी न केवल राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक है, बल्कि यह प्रशासनिक कार्यों को आमजन तक सरल और सहज तरीके से पहुंचाने का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से अधिकारियों को आत्ममंथन का अवसर मिलता है। कार्यक्रम के दौरान एक पहल के तहत 10वीं कक्षा में हिंदी विषय में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने वाले नवोदय विद्यालय और केंद्रीय विद्यालय घुमारवीं के विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। संगोष्ठी में एनटीपीसी, आयकर विभाग, जीएसटी सहित विभिन्न केंद्रीय कार्यालयों, बैंकों और बीमा संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने हिंदी के प्रगतिशील प्रयोग को लेकर सुझाव भी प्रस्तुत किए। अंत में यह संकल्प लिया गया कि कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के प्रयोग को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन
राजभाषा नीति के क्रियान्वयन से प्रशासनिक कामकाज को सरल बनाने पर बल
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर में शुक्रवार को नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास) की ओर से हुई संगोष्ठी में केंद्रीय कार्यालयों में हिंदी के प्रयोग की स्थिति, चुनौतियों और समाधान पर विस्तार से मंथन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों, बैंकों और सार्वजनिक उपक्रमों के अधिकारियों व कर्मचारियों ने भाग लेकर अपने अनुभव साझा किए।
संगोष्ठी का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद नराकास अध्यक्ष ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि हिंदी के प्रति प्रीतिभाव अपनाने और कार्यालयीन कार्यों में इसके अधिकाधिक उपयोग की जरूरत है। संगोष्ठी में जेके मंडल ने मुख्य वक्ता के रूप में केंद्रीय कार्यालयों में हिंदी के प्रयोग की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला।
विज्ञापन
वहीं प्रेम सिंह ने राजभाषा नीति का कार्यान्वयन सिद्धांत से व्यवहार तक विषय पर व्याख्यान देते हुए प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के प्रभावी उपयोग पर जोर दिया। नराकास अध्यक्ष एवं अग्रणी जिला प्रबंधक चंद्र शेखर यादव ने कहा कि हिंदी न केवल राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक है, बल्कि यह प्रशासनिक कार्यों को आमजन तक सरल और सहज तरीके से पहुंचाने का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से अधिकारियों को आत्ममंथन का अवसर मिलता है। कार्यक्रम के दौरान एक पहल के तहत 10वीं कक्षा में हिंदी विषय में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने वाले नवोदय विद्यालय और केंद्रीय विद्यालय घुमारवीं के विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। संगोष्ठी में एनटीपीसी, आयकर विभाग, जीएसटी सहित विभिन्न केंद्रीय कार्यालयों, बैंकों और बीमा संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने हिंदी के प्रगतिशील प्रयोग को लेकर सुझाव भी प्रस्तुत किए। अंत में यह संकल्प लिया गया कि कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के प्रयोग को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
विज्ञापन