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Bilaspur News: श्री कृष्ण की बाल लीलाएं सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु

Fri, 10 Apr 2026 11:00 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Fri, 10 Apr 2026 11:00 PM IST
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Devotees were moved to tears after listening to the childhood pranks of Shri Krishna.
लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही भागवत कथा का श्रवण करते हुए श्रद्धालु। स्रोत: जागरूक पाठक।
लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही भागवत के पांचवें दिन की कथा
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शहर के डियारा सेक्टर में स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही श्रीमदभागवत कथा के पांचवें दिन पंडित संदीपन वशिष्ठ ने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का विवेचन कर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया।


उन्होंने कहा कि भगवान ने आम जन को भय मुक्त करने के लिए तमाम दुखों और कष्टों को अपने आप पर झेला है। जो अपने बच्चों को यश देती है वह यशोदा है और जो आनंद देते हैं वह नंद यानि नंद बाबा है। उन्होंने कहा कि जब कंस को यह पता चल गया कि उसकी मृत्यु का कारण देवकी के गर्भ से पैदा हो चुका है और सुरक्षित निकल भी गया है तो वह अत्यंत क्रोधित हुआ एवं बाल कृष्ण की हत्या करने की योजनाएं तैयार करने लगा। इतने में उसने अपनी सहोदरा पूतना को भेजा। पूतना अपने स्तनों पर विष लगाकर योजनाबद्ध तरीके से नंद बाबा के घर तक पहुंच गई। जहां पर उसने माता यशोदा से कान्हा से मिलने की इच्छा व्यक्त की। सरल स्वभाव की यशोदा ने भी ज्यादा प्रश्न न करते हुए कान्हा को उसे सौंप दिया। भगवान श्री कृष्ण को ज्ञात था कि यह स्त्री कौन है। पंडित जी ने बताया कि जैसे ही पूतना ने कान्हा को गोद में लिया तो उन्होंने अपनी आंखें बंद कर ली। उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण की आंखें बंद करने के पीछे रहस्य यह था कि यदि उनके नयन पूतना के नयनों से मिलते तो कहीं प्रेम न हो जाता, जिससे उसका वध करने में यही प्रेम आड़े आता। धोखे से पूतना ने कान्हा को अपने स्तनों से दूध पिलाना शुरू किया। कान्हा ने पहले दूध पिया फिर विष पान किया। विष पान करने से पूर्व कान्हा ने नीलकंठ महादेव को स्मरण किया। विष पान के बाद जब कान्हा उसके प्राणों का पान करने लगे तो भयंकर नाद करती हुई पूतना अपने वास्तविक रूप में आ गई। गांव में कोलाहल मच गया। धीरे-धीरे कान्हा ने पूतना का वध कर दिया। वहीं कथावाचक ने श्रद्धालुओं को यह भी समझाया कि कोई अज्ञात व्यक्ति मिले तो एकदम से उस पर विश्वास नहीं कर लेना चाहिए। कई बार यह घातक साबित होता है।
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