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Bilaspur News: मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में बीवॉक विद्यार्थियों ने उठाया स्ववित्तपोषित व्यवस्था का मुद्दा
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कहा-स्ववित्तपोषित व्यवस्था से बढ़ेगा आर्थिक बोझ, नियमित रूप से संचालित रखा जाए बीवॉक पाठ्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
गेहड़वीं (बिलासपुर)। झंडूता के धराड़सानी में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में राजकीय महाविद्यालय बिलासपुर के बीवॉक, जीवन विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी के विद्यार्थियों ने प्रभावशाली सहभागिता दर्ज करवाई। विद्यार्थियों के साथ महाविद्यालय का स्टाफ भी कार्यक्रम में मौजूद रहा। बीवॉक विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री से संवाद करते हुए पाठ्यक्रम से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और अपनी चिंताओं को सामने रखा। विद्यार्थियों ने बताया कि बीवॉक कौशल आधारित और रोजगारपरक पाठ्यक्रम है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें व्यावहारिक कौशल प्रदान कर रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ना है। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि बीवॉक में पढ़ने वाले अनेक विद्यार्थी सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। उनके अभिभावक मजदूरी, मिस्त्री कार्य, कृषि और छोटे व्यवसायों से जुड़े हैं। ऐसे परिवारों के विद्यार्थियों के लिए बीवॉक कम खर्च में व्यावहारिक और रोजगारपरक शिक्षा हासिल करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। बीवाॅक पाठ्यक्रमों को स्ववित्तपोषित व्यवस्था में संचालित किए जाने की जानकारी सामने आ रही है। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि पाठ्यक्रम को स्ववित्तपोषित व्यवस्था में न किया जाए। ऐसा होने पर शुल्क बढ़ने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से बीवॉक को मुख्य डिग्री यानी नियमित व्यवस्था के तहत संचालित रखने का आग्रह किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गेहड़वीं (बिलासपुर)। झंडूता के धराड़सानी में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में राजकीय महाविद्यालय बिलासपुर के बीवॉक, जीवन विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी के विद्यार्थियों ने प्रभावशाली सहभागिता दर्ज करवाई। विद्यार्थियों के साथ महाविद्यालय का स्टाफ भी कार्यक्रम में मौजूद रहा। बीवॉक विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री से संवाद करते हुए पाठ्यक्रम से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और अपनी चिंताओं को सामने रखा। विद्यार्थियों ने बताया कि बीवॉक कौशल आधारित और रोजगारपरक पाठ्यक्रम है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें व्यावहारिक कौशल प्रदान कर रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ना है। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि बीवॉक में पढ़ने वाले अनेक विद्यार्थी सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। उनके अभिभावक मजदूरी, मिस्त्री कार्य, कृषि और छोटे व्यवसायों से जुड़े हैं। ऐसे परिवारों के विद्यार्थियों के लिए बीवॉक कम खर्च में व्यावहारिक और रोजगारपरक शिक्षा हासिल करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। बीवाॅक पाठ्यक्रमों को स्ववित्तपोषित व्यवस्था में संचालित किए जाने की जानकारी सामने आ रही है। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि पाठ्यक्रम को स्ववित्तपोषित व्यवस्था में न किया जाए। ऐसा होने पर शुल्क बढ़ने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से बीवॉक को मुख्य डिग्री यानी नियमित व्यवस्था के तहत संचालित रखने का आग्रह किया।