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Bilaspur News: एससी-एसटी विकास निधि कानून बनाने की उठाई मांग
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राज्य गठबंधन हिमाचल की बिलासपुर इकाई ने एडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
आबादी के अनुपात में बजट आवंटन की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास निधि कानून बनाने की मांग को लेकर राज्य गठबंधन हिमाचल की जिला इकाई बिलासपुर ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। संगठन के प्रतिनिधियों ने एडीएम बिलासपुर के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर प्रदेश में एससी-एसटी विकास निधि के लिए जल्द कानून बनाने की मांग उठाई। जिला प्रतिनिधि प्रो. केएस धीर ने कहा कि एससी और एसटी की आबादी के अनुपात में बजट का प्रावधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमाचल में भी आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और राजस्थान की तर्ज पर एससी-एसटी विकास निधि कानून बनाया जाए। उन्होंने एससी की करीब 33 और एसटी की करीब आठ प्रतिशत आबादी के अनुपात में कुल योजना बजट में राशि आवंटित करने की मांग की। प्रतिनिधियों ने कहा कि वर्ष 1980 में अनुसूचित जाति घटक योजना और जनजाति उप योजना शुरू होने के बावजूद हिमाचल में इनका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पाया। संगठन का दावा है कि पिछले पांच वर्षों में एससी-एसटी विकास के लिए बजटीय आवंटन करीब पांच प्रतिशत तक सीमित रहा है। उन्होंने आवंटित राशि का निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप पूरा उपयोग नहीं होने का आरोप भी लगाया। प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार ने चुनावी घोषणा पत्र और अहमदाबाद में आयोजित न्याय पथ सम्मेलन में एससी-एसटी विकास निधि कानून बनाने का वादा किया था। उन्होंने आगामी विधानसभा मानसून सत्र में इस कानून को लेकर प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। इस अवसर पर मनसा राम, जोगेंद्र सिंह, राम आसरा, सुखदेव कालिया, चैन सिंह सुमन, बृज लाल, राम लाल, रतन लाल, भोलाराम, भगत राम, रामशरण, श्रवण कुमार, सुंदर राम, सरदार तेग सिंह और मस्तराम दड़ोच समेत अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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आबादी के अनुपात में बजट आवंटन की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास निधि कानून बनाने की मांग को लेकर राज्य गठबंधन हिमाचल की जिला इकाई बिलासपुर ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। संगठन के प्रतिनिधियों ने एडीएम बिलासपुर के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर प्रदेश में एससी-एसटी विकास निधि के लिए जल्द कानून बनाने की मांग उठाई। जिला प्रतिनिधि प्रो. केएस धीर ने कहा कि एससी और एसटी की आबादी के अनुपात में बजट का प्रावधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमाचल में भी आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और राजस्थान की तर्ज पर एससी-एसटी विकास निधि कानून बनाया जाए। उन्होंने एससी की करीब 33 और एसटी की करीब आठ प्रतिशत आबादी के अनुपात में कुल योजना बजट में राशि आवंटित करने की मांग की। प्रतिनिधियों ने कहा कि वर्ष 1980 में अनुसूचित जाति घटक योजना और जनजाति उप योजना शुरू होने के बावजूद हिमाचल में इनका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पाया। संगठन का दावा है कि पिछले पांच वर्षों में एससी-एसटी विकास के लिए बजटीय आवंटन करीब पांच प्रतिशत तक सीमित रहा है। उन्होंने आवंटित राशि का निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप पूरा उपयोग नहीं होने का आरोप भी लगाया। प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार ने चुनावी घोषणा पत्र और अहमदाबाद में आयोजित न्याय पथ सम्मेलन में एससी-एसटी विकास निधि कानून बनाने का वादा किया था। उन्होंने आगामी विधानसभा मानसून सत्र में इस कानून को लेकर प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। इस अवसर पर मनसा राम, जोगेंद्र सिंह, राम आसरा, सुखदेव कालिया, चैन सिंह सुमन, बृज लाल, राम लाल, रतन लाल, भोलाराम, भगत राम, रामशरण, श्रवण कुमार, सुंदर राम, सरदार तेग सिंह और मस्तराम दड़ोच समेत अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।