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Bilaspur News: बरमाणा-दाड़ला में ढुलाई की डिमांड घटी, सात हजार ट्रक ऑपरेटरों पर संकट
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बरमाणा में आयोजित बैठक में मौजूद बरमाणा और दाड़ला के ट्रक ऑपरेटर। स्रोत: बीडीटीएस
10-15 हजार से घटकर 2-3 हजार एमटी रह गई डिमांड, दाड़ला में भी काम प्रभावित
समस्या का समाधान न हुआ तो दोनों ट्रक ऑपरेटर संगठन मिलकर करेंगे आंदोलन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बरमाणा के बाद अब दाड़ला सीमेंट फैक्ट्री में भी माल ढुलाई की डिमांड कम होने से ट्रक ऑपरेटरों के सामने काम का संकट खड़ा होने की बात सामने आई है। दोनों सीमेंट फैक्ट्रियों से जुड़े करीब सात हजार ट्रक ऑपरेटरों का कारोबार प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है। बरमाणा में पिछले करीब चार महीने से सीमेंट और क्लिंकर की डिमांड में भारी कमी आई है। वहीं, दाड़ला में भी डिस्पैच कम होने से ट्रांसपोर्ट कारोबार प्रभावित होने की बात कही जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर बरमाणा और दाड़ला के ट्रक ऑपरेटर संगठनों की संयुक्त बैठक बरमाणा में हुई। बैठक में दोनों क्षेत्रों में ढुलाई और डिस्पैच से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की गई। संगठनों ने तय किया कि प्रबंधन स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होने पर मिलकर आगामी रणनीति बनाई जाएगी। दि बिलासपुर जिला ट्रक ऑपरेटर सहकारी सभा सीमित के अनुसार बरमाणा में पहले प्रतिदिन करीब 10 हजार से 15 हजार मीट्रिक टन तक सीमेंट और क्लिंकर की डिमांड मिलती थी। अब यह घटकर करीब दो से तीन हजार मीट्रिक टन रह गई है। इससे बड़ी संख्या में ट्रकों को नियमित ढुलाई नहीं मिल पा रही है। ट्रक ऑपरेटरों का कहना है कि वाहनों की किस्त, बीमा, मरम्मत, टायर, चालक-परिचालक और अन्य खर्च लगातार जारी हैं, जबकि काम कम होने से आमदनी प्रभावित हो रही है। दाड़ला में भी डिस्पैच कम होने से वहां के करीब तीन हजार ट्रक ऑपरेटरों के प्रभावित होने की बात कही जा रही है। बीडीटीएस बरमाणा के महासचिव प्रदीप ठाकुर ने कहा कि दाड़ला और बरमाणा दोनों क्षेत्रों में ट्रांसपोर्ट कारोबार से बड़ी संख्या में परिवार जुड़े हैं। ढुलाई कम होने का असर केवल ट्रक मालिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि चालकों, परिचालकों, मैकेनिकों, टायर और स्पेयर पार्ट्स कारोबारियों समेत अन्य छोटे कारोबारों पर भी पड़ रहा है। संयुक्त बैठक में तय किया गया कि समस्या का समाधान नहीं होने पर दोनों संगठन मिलकर अगला कदम उठाएंगे। बैठक में प्रबंधन की ओर से कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ। बीडीटीएस पदाधिकारियों का कहना है कि ढुलाई की डिमांड में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है। बरमाणा के ट्रक ऑपरेटर पहले ही प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग कर चुके हैं। समस्या का समाधान नहीं होने पर ट्रकों की चाबियां प्रशासन को सौंपने और परिवार सहित अनशन की चेतावनी भी दी जा चुकी है। अब दाड़ला के ऑपरेटरों के साथ संयुक्त रणनीति बनने से मामला दोनों औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े ट्रांसपोर्ट कारोबार का हो गया है।
प्रबंधन से कई बार उठाया मामला
बरमाणा में डिमांड बढ़ाने को लेकर ट्रक ऑपरेटर संगठन की ओर से एसीसी प्रबंधन के समक्ष कई बार मामला उठाया जा चुका है। संगठन ने 17 जुलाई, 10 अगस्त और 21 अगस्त को प्रबंधन को लिखित पत्र देकर डिमांड बढ़ाने का आग्रह किया था। इसके बाद 26 अगस्त और दो सितंबर को प्रबंधन के साथ बैठक भी हुई। संगठन के अनुसार पांच सितंबर तक डिमांड बढ़ाने का आश्वासन मिला था, लेकिन अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई।
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समस्या का समाधान न हुआ तो दोनों ट्रक ऑपरेटर संगठन मिलकर करेंगे आंदोलन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बरमाणा के बाद अब दाड़ला सीमेंट फैक्ट्री में भी माल ढुलाई की डिमांड कम होने से ट्रक ऑपरेटरों के सामने काम का संकट खड़ा होने की बात सामने आई है। दोनों सीमेंट फैक्ट्रियों से जुड़े करीब सात हजार ट्रक ऑपरेटरों का कारोबार प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है। बरमाणा में पिछले करीब चार महीने से सीमेंट और क्लिंकर की डिमांड में भारी कमी आई है। वहीं, दाड़ला में भी डिस्पैच कम होने से ट्रांसपोर्ट कारोबार प्रभावित होने की बात कही जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर बरमाणा और दाड़ला के ट्रक ऑपरेटर संगठनों की संयुक्त बैठक बरमाणा में हुई। बैठक में दोनों क्षेत्रों में ढुलाई और डिस्पैच से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की गई। संगठनों ने तय किया कि प्रबंधन स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होने पर मिलकर आगामी रणनीति बनाई जाएगी। दि बिलासपुर जिला ट्रक ऑपरेटर सहकारी सभा सीमित के अनुसार बरमाणा में पहले प्रतिदिन करीब 10 हजार से 15 हजार मीट्रिक टन तक सीमेंट और क्लिंकर की डिमांड मिलती थी। अब यह घटकर करीब दो से तीन हजार मीट्रिक टन रह गई है। इससे बड़ी संख्या में ट्रकों को नियमित ढुलाई नहीं मिल पा रही है। ट्रक ऑपरेटरों का कहना है कि वाहनों की किस्त, बीमा, मरम्मत, टायर, चालक-परिचालक और अन्य खर्च लगातार जारी हैं, जबकि काम कम होने से आमदनी प्रभावित हो रही है। दाड़ला में भी डिस्पैच कम होने से वहां के करीब तीन हजार ट्रक ऑपरेटरों के प्रभावित होने की बात कही जा रही है। बीडीटीएस बरमाणा के महासचिव प्रदीप ठाकुर ने कहा कि दाड़ला और बरमाणा दोनों क्षेत्रों में ट्रांसपोर्ट कारोबार से बड़ी संख्या में परिवार जुड़े हैं। ढुलाई कम होने का असर केवल ट्रक मालिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि चालकों, परिचालकों, मैकेनिकों, टायर और स्पेयर पार्ट्स कारोबारियों समेत अन्य छोटे कारोबारों पर भी पड़ रहा है। संयुक्त बैठक में तय किया गया कि समस्या का समाधान नहीं होने पर दोनों संगठन मिलकर अगला कदम उठाएंगे। बैठक में प्रबंधन की ओर से कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ। बीडीटीएस पदाधिकारियों का कहना है कि ढुलाई की डिमांड में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है। बरमाणा के ट्रक ऑपरेटर पहले ही प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग कर चुके हैं। समस्या का समाधान नहीं होने पर ट्रकों की चाबियां प्रशासन को सौंपने और परिवार सहित अनशन की चेतावनी भी दी जा चुकी है। अब दाड़ला के ऑपरेटरों के साथ संयुक्त रणनीति बनने से मामला दोनों औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े ट्रांसपोर्ट कारोबार का हो गया है।
प्रबंधन से कई बार उठाया मामला
बरमाणा में डिमांड बढ़ाने को लेकर ट्रक ऑपरेटर संगठन की ओर से एसीसी प्रबंधन के समक्ष कई बार मामला उठाया जा चुका है। संगठन ने 17 जुलाई, 10 अगस्त और 21 अगस्त को प्रबंधन को लिखित पत्र देकर डिमांड बढ़ाने का आग्रह किया था। इसके बाद 26 अगस्त और दो सितंबर को प्रबंधन के साथ बैठक भी हुई। संगठन के अनुसार पांच सितंबर तक डिमांड बढ़ाने का आश्वासन मिला था, लेकिन अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई।
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