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माता-पिता का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता : गौतम
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-श्रीमद्भागवत कथा में सुनाए श्री कृष्ण जीवन से जुड़े प्रसंग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। माता-पिता का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता। मां-बाप अपने बच्चों के पालन-पोषण में कोई कमी नहीं छोड़ते हैं। खुद तंगी में रहते हुए भी वे उन्हें शिक्षित बनाने और उनकी हर जरूरत पूरी करने का भरसक प्रयास करने के साथ उन्हें अच्छे संस्कार भी देते हैं।
समय आने पर बच्चों को भी अपने माता-पिता की सेवा करते हुए उनके बुढ़ापे की लाठी बनना चाहिए। यह उद्गार कथा व्यास पंडित पंकज गौतम ने दनोह-कुनाला में गोपाल मंदिर में आयोजित किए जा रहे श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह में प्रवचन करते हुए शुक्रवार को प्रकट किए।
श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े प्रसंग सुनाते हुए पंकज गौतम ने कहा कि उन्होंने अपने माता-पिता को न केवल कंस की जेल से मुक्त करवाया, बल्कि कंस के साथ ही पूतना, जय, विजय, कालिया नाग व तृष्णा व्रत जैसे कई राक्षसों का उद्धार भी किया। उन्होंने श्रीकृष्ण की माखन और गोपियों के वस्त्र चुराने और गऊओं को चराने जैसी कई लीलाओं का वर्णन भी किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की हर लीला सारगर्भित संदेश देती है। सुदामा के साथ उनकी मित्रता का उदाहरण सदियों से दिया जाता है। इस मित्रता से उन्होंने यह संदेश दिया है कि भगवान जिसे अपना बना लेते हैं, वे उसका हमेशा ध्यान रखते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। माता-पिता का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता। मां-बाप अपने बच्चों के पालन-पोषण में कोई कमी नहीं छोड़ते हैं। खुद तंगी में रहते हुए भी वे उन्हें शिक्षित बनाने और उनकी हर जरूरत पूरी करने का भरसक प्रयास करने के साथ उन्हें अच्छे संस्कार भी देते हैं।
समय आने पर बच्चों को भी अपने माता-पिता की सेवा करते हुए उनके बुढ़ापे की लाठी बनना चाहिए। यह उद्गार कथा व्यास पंडित पंकज गौतम ने दनोह-कुनाला में गोपाल मंदिर में आयोजित किए जा रहे श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह में प्रवचन करते हुए शुक्रवार को प्रकट किए।
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श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े प्रसंग सुनाते हुए पंकज गौतम ने कहा कि उन्होंने अपने माता-पिता को न केवल कंस की जेल से मुक्त करवाया, बल्कि कंस के साथ ही पूतना, जय, विजय, कालिया नाग व तृष्णा व्रत जैसे कई राक्षसों का उद्धार भी किया। उन्होंने श्रीकृष्ण की माखन और गोपियों के वस्त्र चुराने और गऊओं को चराने जैसी कई लीलाओं का वर्णन भी किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की हर लीला सारगर्भित संदेश देती है। सुदामा के साथ उनकी मित्रता का उदाहरण सदियों से दिया जाता है। इस मित्रता से उन्होंने यह संदेश दिया है कि भगवान जिसे अपना बना लेते हैं, वे उसका हमेशा ध्यान रखते हैं।
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