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Bilaspur News: क्रोमा होटल के पास गोबिंद सागर झील में हो रहा मलबा डंप
Fri, 19 Sep 2025 11:27 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 19 Sep 2025 11:27 PM IST
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फोरलेन पर क्रोमा होटल के पास झील में मलबा डंप करता टिप्पर। संवाद
एक्सक्लूसिव
हाईकोर्ट के आदेशों के बाद भी नहीं रुक रहा है झील में मलबा डंप करने का मामला
उपायुक्त व डीजीपी सहित कई विभागों को भेजी गई ताजा डंपिंग की शिकायत
पहले दूसरी जगह झील किनारे डाला जा रहा था भूस्खलन से निकलने वाले मलबा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर–नेरचौक फोरलेन पर बरसात के दौरान हो रही लगातार लैंडस्लाइड का मलबा गोबिंद सागर झील में लगातार डंप किया जा रहा है। काम कर रहे ठेकेदार मौजा सुनण तहसील श्री नयना देवी जी से टिपरों में लोड कर यह मलबा मौजा धराड़सानी तहसील झंडूता में क्रोमा होटल के पास सीधे झील में डंप कर रहे हैं। इससे झील का अस्तित्व खतरे में है, पानी भी दूषित हो रहा है, मछली उत्पादन पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा।
उच्च न्यायालय पहले ही झील और उसकी सहायक नदियों-नालों में मलबा डंप करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा चुका है। न्यायालय ने पुलिस, जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस तरह की गतिविधियां रोकने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने के सख्त निर्देश भी दिए थे। बावजूद इसके क्रोमा होटल के पास और फोरलेन के साथ अन्य स्थानों जैसे थापना टनल नंबर-2 पोर्टल-2, ढलयार टनल नंबर-3 पोर्टल-2, जब्बल, सुन्नण, भटेड़, क्यारियां जंगल पेट्रोल पंप, कोठीपुरा (मंडलोऊ) और मौजा छत में भारी मात्रा में मलबे के ढेर जमा किए गए हैं। बरसात के दौरान यह मलबा नालियों, कलवर्ट और पुलों के जरिए सीधे झील में पहुंच रहा है। वहीं अब शुक्रवार को क्रोमा होटल के पास झील में मलबा डाला गया। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने शुक्रवार को ही इस संबंध में तीन महत्वपूर्ण कार्यालयों उपायुक्त बिलासपुर, पुलिस महानिदेशक और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को विस्तृत शिकायत भेजी है। शिकायत में स्पष्ट कहा गया है कि एनएचएआई के अधीन काम कर रही कंपनियां अदालत के आदेशों को नजरअंदाज कर गोबिंद सागर झील और उसके सहायक नालों में मलबा डाल रही हैं। इस डंपिंग से झील की जल गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है और हजारों मछुआरों की आजीविका का स्रोत खतरे में है।
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि 2024 में भी झील में मलबा डंप करने के मामलों पर वन विभाग ने फोरलेन निर्माण में लगी कई कंपनियों पर एफआईआर दर्ज करवाई थी। इसके बावजूद पुराने मलबे को अब तक नहीं हटाया गया और नई डंपिंग का सिलसिला फिर शुरू हो गया है। शिकायत में मौके से ली गई तस्वीरें और वीडियो भी साक्ष्य के तौर पर संलग्न किए हैं। उन्होंने मांग की है कि उपायुक्त, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पुलिस तुरंत संयुक्त रूप से मौके का निरीक्षण करें और हाईकोर्ट के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए और जिम्मेदार लोगों अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करें। लेकिन हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद पुलिस और जिला प्रशासन की निष्क्रियता निराशाजनक है। अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए तो झील की पारिस्थितिकी और मत्स्य पालन को अपूरणीय क्षति हो सकती है।
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हाईकोर्ट के आदेशों के बाद भी नहीं रुक रहा है झील में मलबा डंप करने का मामला
उपायुक्त व डीजीपी सहित कई विभागों को भेजी गई ताजा डंपिंग की शिकायत
पहले दूसरी जगह झील किनारे डाला जा रहा था भूस्खलन से निकलने वाले मलबा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर–नेरचौक फोरलेन पर बरसात के दौरान हो रही लगातार लैंडस्लाइड का मलबा गोबिंद सागर झील में लगातार डंप किया जा रहा है। काम कर रहे ठेकेदार मौजा सुनण तहसील श्री नयना देवी जी से टिपरों में लोड कर यह मलबा मौजा धराड़सानी तहसील झंडूता में क्रोमा होटल के पास सीधे झील में डंप कर रहे हैं। इससे झील का अस्तित्व खतरे में है, पानी भी दूषित हो रहा है, मछली उत्पादन पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा।
उच्च न्यायालय पहले ही झील और उसकी सहायक नदियों-नालों में मलबा डंप करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा चुका है। न्यायालय ने पुलिस, जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस तरह की गतिविधियां रोकने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने के सख्त निर्देश भी दिए थे। बावजूद इसके क्रोमा होटल के पास और फोरलेन के साथ अन्य स्थानों जैसे थापना टनल नंबर-2 पोर्टल-2, ढलयार टनल नंबर-3 पोर्टल-2, जब्बल, सुन्नण, भटेड़, क्यारियां जंगल पेट्रोल पंप, कोठीपुरा (मंडलोऊ) और मौजा छत में भारी मात्रा में मलबे के ढेर जमा किए गए हैं। बरसात के दौरान यह मलबा नालियों, कलवर्ट और पुलों के जरिए सीधे झील में पहुंच रहा है। वहीं अब शुक्रवार को क्रोमा होटल के पास झील में मलबा डाला गया। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने शुक्रवार को ही इस संबंध में तीन महत्वपूर्ण कार्यालयों उपायुक्त बिलासपुर, पुलिस महानिदेशक और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को विस्तृत शिकायत भेजी है। शिकायत में स्पष्ट कहा गया है कि एनएचएआई के अधीन काम कर रही कंपनियां अदालत के आदेशों को नजरअंदाज कर गोबिंद सागर झील और उसके सहायक नालों में मलबा डाल रही हैं। इस डंपिंग से झील की जल गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है और हजारों मछुआरों की आजीविका का स्रोत खतरे में है।
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शिकायत में यह भी उल्लेख है कि 2024 में भी झील में मलबा डंप करने के मामलों पर वन विभाग ने फोरलेन निर्माण में लगी कई कंपनियों पर एफआईआर दर्ज करवाई थी। इसके बावजूद पुराने मलबे को अब तक नहीं हटाया गया और नई डंपिंग का सिलसिला फिर शुरू हो गया है। शिकायत में मौके से ली गई तस्वीरें और वीडियो भी साक्ष्य के तौर पर संलग्न किए हैं। उन्होंने मांग की है कि उपायुक्त, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पुलिस तुरंत संयुक्त रूप से मौके का निरीक्षण करें और हाईकोर्ट के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए और जिम्मेदार लोगों अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करें। लेकिन हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद पुलिस और जिला प्रशासन की निष्क्रियता निराशाजनक है। अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए तो झील की पारिस्थितिकी और मत्स्य पालन को अपूरणीय क्षति हो सकती है।
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