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नौ करोड़ के सिंथेटिक ट्रैक पर मंडराया खतरा
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लूहणू मैदान में जर्जर डंगे का निरीक्षण करते लोक निर्माण विभाग के कर्मचारी व अन्य।
- फोटो : BILASPUR
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बिलासपुर। बिलासपुर के लूहणू खेल परिसर में नौ करोड़ की लागत से निर्मित एथलेटिक्स खेल के सिंथेटिक ट्रैक पर अभी से खतरा मंडराने लगाने है। हर साल गोविंद सागर में डूबे रहने से मैदान का डंगे पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं। इसके अलावा खेल परिसर के दक्षिणी छोर पर डंगे के पत्थर भी खिसकने लगे हैं। यदि समय रहते इनकी देखभाल नहीं की गई तो लूहणू खेल परिसर में नवनिर्मित सिंथेटिक ट्रैक कभी भी टूट सकता है। इससे खिलाड़ियों की भी उम्मीदों पर पानी फिर सकता है।
गौरतलब है कि लुहणु मेला ग्राउंड के पास कहलूर खेल परिसर का निर्माण किया गया है। इस परिसर में ज्यादा खेल मैदान बनाने के लिए डंगे का निर्माण किया गया। जिसमें क्रेट वायर लगाकर डंगा लगाए गए हैं। लेकिन साल 2005 से लगे इस डंगे का अधिकांश भाग हर साल गोविंद सागर झील की पानी में डूब जाता है। इससे लोहे की तारों को जंग लग गया है और इनकी पकड़ भी ढीली हो गई हैं। इसी कारण पत्थरों का निकलना शुरू हो गया है। हर साल इस झील में पानी चढ़ता है तथा करीब पांच महीने यह डंगा पानी में रहता है। इस डंगे को लगे हुए करीब 15 साल हो चुके हैं। इस डंगे के कारण कबड्डी, वॉलीबाल और नवनिर्मित एथलेटिक्स सिंथेटिक ट्रैक के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है।
बता दें कि अभी हाल में करीब नौ करोड़ रुपये की लागत से इस ट्रैक का निर्माण हुआ है। यदि किसी भी भाग पर एक दरार भी आ जाती है तो एक झटके में नौ करोड़ की मेहनत पर पानी फिर जाएगा। वहीं इसके साथ बनाए गए पैदल ट्रैक पर सुबह शाम सैकड़ों बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सैर करते हुए देखे जा सकते हैं। ऐसे में डंगे का रखरखाव होना बहुत जरूरी है।
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उधर, शुक्रवार को लूहणू मैदान के छात्रावास प्रभारी और हैंडबाल कोच मनोज ठाकुर तथा लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने इस स्थान का मुआयना किया। इनके स्तर से इन डंगे की जर्जर हालत पर चिंता भी जताई। इसके साथ ही खिलाड़ियों को भी सचेत किया।
डंगे के नुकसान का आकलन कर लिया गया है तथा शीघ्र ही डंगे की मरम्मत कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सिंथेटिक ट्रैक इस स्पॉट से दूर हैं। इसलिए नुकसान की आशंका बहुत कम है।-बीडी कुरैशी, कनिष्ठ अभियंता।
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गौरतलब है कि लुहणु मेला ग्राउंड के पास कहलूर खेल परिसर का निर्माण किया गया है। इस परिसर में ज्यादा खेल मैदान बनाने के लिए डंगे का निर्माण किया गया। जिसमें क्रेट वायर लगाकर डंगा लगाए गए हैं। लेकिन साल 2005 से लगे इस डंगे का अधिकांश भाग हर साल गोविंद सागर झील की पानी में डूब जाता है। इससे लोहे की तारों को जंग लग गया है और इनकी पकड़ भी ढीली हो गई हैं। इसी कारण पत्थरों का निकलना शुरू हो गया है। हर साल इस झील में पानी चढ़ता है तथा करीब पांच महीने यह डंगा पानी में रहता है। इस डंगे को लगे हुए करीब 15 साल हो चुके हैं। इस डंगे के कारण कबड्डी, वॉलीबाल और नवनिर्मित एथलेटिक्स सिंथेटिक ट्रैक के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है।
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बता दें कि अभी हाल में करीब नौ करोड़ रुपये की लागत से इस ट्रैक का निर्माण हुआ है। यदि किसी भी भाग पर एक दरार भी आ जाती है तो एक झटके में नौ करोड़ की मेहनत पर पानी फिर जाएगा। वहीं इसके साथ बनाए गए पैदल ट्रैक पर सुबह शाम सैकड़ों बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सैर करते हुए देखे जा सकते हैं। ऐसे में डंगे का रखरखाव होना बहुत जरूरी है।
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उधर, शुक्रवार को लूहणू मैदान के छात्रावास प्रभारी और हैंडबाल कोच मनोज ठाकुर तथा लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने इस स्थान का मुआयना किया। इनके स्तर से इन डंगे की जर्जर हालत पर चिंता भी जताई। इसके साथ ही खिलाड़ियों को भी सचेत किया।
डंगे के नुकसान का आकलन कर लिया गया है तथा शीघ्र ही डंगे की मरम्मत कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सिंथेटिक ट्रैक इस स्पॉट से दूर हैं। इसलिए नुकसान की आशंका बहुत कम है।-बीडी कुरैशी, कनिष्ठ अभियंता।