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अष्टमी को श्री नयनादेवी जी में 8 हजार श्रद्धालुओं ने टेका माथा
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श्री नयनादेवी जी (बिलासपुर)। विश्वविख्यात शक्तिपीठ श्री नयनादेवी जी में करीब 8 हजार श्रद्धालुओं ने शीश नवाकर अष्टमी पूजन किया। शुक्रवार सुबह चार बजे से ही काफी संख्या में श्रद्धालु अष्टमी पूजन के लिए दरबार में पहुंचे। सातवें नवरात्रे को श्री नयना देवी मंदिर में 6.55 लाख रुपये की नकदी, 1.900 ग्राम सोना, 974 ग्राम चांदी चढ़ावे के रूप में चढ़ी।
विश्वविख्यात शक्ति पीठ में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, यूपी, बिहार और अन्य प्रदेशों से भी श्रद्धालु अष्टमी पूजन के लिए मंदिर पहुंचे। कोविड-19 महामारी के चलते हालांकि मंदिर में हवन-यज्ञ करने और कन्या पूजन पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद अष्टमी पर दर्शन करने के लिए श्रद्धालु मंदिर में पहुंच रहे हैं। प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन और मंदिर न्यास ने श्रद्धालुओं की सुविधा के पुख्ता बंदोबस्त किए हैं। श्रद्धालुओं को लंबी-लंबी लाइनों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मंदिर के अंदर भेजा जा रहा है।
मंदिर के पुजारी उमेश शर्मा शर्मा ने कहा कि अष्टमी का दिन माता को सर्वप्रिय है। इसलिए जो भी श्रद्धालु अष्टमी के दिन मां के दीदार करता है, पूजा-अर्चना करता है, मां उसकी मनोकामना पूर्ण करती है। उन्होंने कहा कि अष्टमी के दिन व्रत रखने का भी विशेष महत्व है। इसलिए ज्यादातर श्रद्धालु अष्टमी के दिन व्रत रखते हैं और कड़ाह प्रसाद का भोग माता को लगाते हैं।
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विश्वविख्यात शक्ति पीठ में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, यूपी, बिहार और अन्य प्रदेशों से भी श्रद्धालु अष्टमी पूजन के लिए मंदिर पहुंचे। कोविड-19 महामारी के चलते हालांकि मंदिर में हवन-यज्ञ करने और कन्या पूजन पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद अष्टमी पर दर्शन करने के लिए श्रद्धालु मंदिर में पहुंच रहे हैं। प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन और मंदिर न्यास ने श्रद्धालुओं की सुविधा के पुख्ता बंदोबस्त किए हैं। श्रद्धालुओं को लंबी-लंबी लाइनों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मंदिर के अंदर भेजा जा रहा है।
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मंदिर के पुजारी उमेश शर्मा शर्मा ने कहा कि अष्टमी का दिन माता को सर्वप्रिय है। इसलिए जो भी श्रद्धालु अष्टमी के दिन मां के दीदार करता है, पूजा-अर्चना करता है, मां उसकी मनोकामना पूर्ण करती है। उन्होंने कहा कि अष्टमी के दिन व्रत रखने का भी विशेष महत्व है। इसलिए ज्यादातर श्रद्धालु अष्टमी के दिन व्रत रखते हैं और कड़ाह प्रसाद का भोग माता को लगाते हैं।
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