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सिस्टम की क्रूरता : बरोटा में बीमार पत्नी को कंधे पर ढोने को मजबूर पति

Thu, 19 Feb 2026 11:47 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Thu, 19 Feb 2026 11:47 PM IST
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Cruelty of the system: Husband forced to carry sick wife on his shoulders in Barota
घुमारवीं के बरोटा गांव में मरीज को चारपाई पर ले जाते हुए। संवाद
राह रोक रहा अवैध कब्जा, कोर्ट से स्टे हटने के बाद भी नहीं बना एंबुलेंस मार्ग
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पीड़ित ने कानूनगो पर लगाए डराने के आरोप, तहकीकात में अवैध कब्जा साबित, फिर भी कार्रवाई नहीं

संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। डिजिटल इंडिया और सुगम सड़कों के बड़े-बड़े दावों के बीच उपमंडल घुमारवीं के गांव बरोटा से मानवता को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां एक बेबस पति अपनी बीमार पत्नी को उपचार के लिए अस्पताल ले जाने के लिए आज भी उसे कंधों और पालकी पर लादकर मुख्य सड़क तक पहुंचाने को विवश है।
एंबुलेंस मार्ग के निर्माण में रोड़ा बने अवैध कब्जे और राजस्व विभाग के एक अधिकारी की कथित मिलीभगत ने इस परिवार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पीड़ित ग्रामीण ने एसडीएम घुमारवीं को शिकायत पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। शिकायत में न केवल सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की बात कही गई है, बल्कि एक कानूनगो पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि वह कथित कब्जाधारी के साथ मिलकर उसे डराने-धमकाने का काम कर रहा है। शिकायतकर्ता के अनुसार, गांव तक एंबुलेंस मार्ग का निर्माण एक स्थानीय व्यक्ति की ओर से सरकारी भूमि पर किए गए अवैध कब्जे के कारण अधूरा पड़ा है। राजस्व विभाग की पूर्व में हुई जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि संबंधित भूमि सरकारी है। मामला बंदोबस्त न्यायालय में विचाराधीन था और 16 फरवरी 2026 को सिविल न्यायालय द्वारा विपक्षी पक्ष को मिला स्थगन आदेश भी निरस्त कर दिया गया था। इसके बावजूद, धरातल पर मार्ग निर्माण को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पीड़ित ने आरोप लगाया कि 17 फरवरी को जब बंदोबस्त विभाग की टीम निरीक्षण के लिए आई, तो वहां मौजूद एक कानूनगो ने उपायुक्त और एसडीएम कार्यालय के आदेशों का गलत हवाला देकर काम में हस्तक्षेप किया। आरोप है कि अधिकारी उसे डरा-धमका रहे हैं ताकि वह सड़क की मांग छोड़ दे। कहा कि मेरी पत्नी की हालत नाजुक रहती है और महीने में कई बार उसे अस्पताल ले जाना पड़ता है। एंबुलेंस घर तक नहीं पहुंच पाती, इसलिए हर बार मुझे उसे कंधे पर उठाकर सड़क तक लाना पड़ता है। आपात स्थिति में यह देरी जानलेवा साबित हो सकती है।
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कोट
मामला हमारे ध्यान में है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने अब आगामी सप्ताह की तारीख तय की है। सेटलमेंट इकाई की रिपोर्ट के आधार पर ही आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। यह प्रकरण राजस्व विभाग की सेटलमेंट इकाई के पास विचाराधीन है, जिस पर 26 फरवरी को अंतिम निर्णय लिया जाएगा। विभाग की जो भी रिपोर्ट आएगी, उसके आधार पर ही आगामी कार्रवाई की जाएगी।
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गौरव चौधरी, एसडीएम, घुमारवीं
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