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कंपनी ने पांच हजार लोगों से की करोड़ों की ठगी

Thu, 25 May 2017 11:00 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिलासपुर
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिलासपुर Updated Thu, 25 May 2017 11:00 PM IST
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company fraud in the name of lottery with five thousands people
FRAUD SHIMLA - फोटो : demo pic

लाटरी के नाम पर बीआईपी थ्री-डी इलेक्ट्रानिक्स कंपनी ने बिलासपुर के अलावा मंडी और सोलन जिला के दाड़लाघाट के लोगों को भी ठगी का शिकार बनाया है। पुलिस जांच में पता चला है कि कंपनी ने नेरचौक में भी अपना कार्यालय खोला था। कंपनी ने वहां दो तरह की लॉटरी शुरू की थी। इसमें 1390 और 894 मेंबर बनाए गए थे। इस बारे में अधिवक्ता परवेश चंदेल और ठगी का शिकार हुए मंडी जिला के बल्ह-नेरचौक निवासी नरेश कुमार ने किया।

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नरेश कुमार के बताया कि उसने कंपनी के दाड़लाघाट पीएनबी बैंक के खाते में 29 दिसंबर, 2014 से लेकर 31 दिसंबर, 2015 तक 48 लाख 68 हजार 67 रुपए जमा करवाए। इसी प्रकार 7 जनवरी, 2016 से लेकर 21 सिबंर 2016 तक की अवधि के दौरान 27 लाख 42 हजार 403 खाते में जमा करवाए। इस खाते में पैसा जमा हुआ वह खाता कंपनी की निदेशक मंजूबाला के नाम था। इसके अतिरिक्त उसने एक लाख 86 हजार लोगों को अपनी जेब से दिए।
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नरेश कुमार के बताया कंपनी ने वहां पर भी कोई ड्रॉ नहीं निकाला और लोगों को सिर्फ आश्वासन ही दिए। इसी प्रकार दाड़लाघाट के घनश्याम शर्मा ने बताया कि कंपनी ने दाड़लाघाट में भी अपनी शाखा खोली थी। यहां पर कंपनी ने एक लाटरी 500 महीना और दूसरी एक हजार महीना के हिसाब चलाई थी।
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यहां करीब सात सौ लोग ठगी का शिकार हुए हैं। घनश्याम शर्मा ने बताया कि उसे कंपनी ने ड्रा में एक स्विफ्ट कार निकाली थी जोकि उसे आज तक नहीं मिली है। वकील परवेश चंदेल ने बताया कि इस कंपनी ने इन तीन जिलों में करीब 5084 लोगों के साथ धोखाधड़ी की है। उन्होंने बताया कि माननीय न्यायालय ने भी एक केस में ऐसे मामलों को क्रिमनल केस से ज्यादा खतरनाक बताया था।


उन्होंने बताया कि कंपनी के दोनों निदेशकों को माननीय अदालत तीन बार पुलिस रिमांड दे चुकी है। मगर इसके बावजूद भी आरोपियों द्वारा लाटरी के नाम पर एकत्रित की गई धनराशि का पता नहीं चल पाया है। कंपनी के खाते से 2 करोड़ निकाले गए हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी के निदेशकों संजीव कुमार और मंजुबाला की चल व अंचल संपत्तियों को पुलिस को तुरंत अटैच करना चाहिए और कंपनी के अकाटेंट को भी गिरफ्तार करना चाहिए।

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