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लाखों रूपये जमा करवाने पर मिल रहे है 2 हजार
Updated Thu, 04 Oct 2018 09:52 PM IST
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लाखों रुपये जमा करवाने के बाद अब मिल रहे मात्र दो हजार
घोटाले के बाद पपलाह कृषि सहकारी सभा के गले की फांस बना खाताधारकों का पैसा वापस करना
बुधवार को करीब 500 लोग पहुंचे सभा के कार्यालय
सभा ने लोगों को दस दिन में पैसा लौटाने का दिया है आश्वासन
अमर उजाला ब्यूरो
बरठीं (बिलासपुर)। दी कृषि सहकारी सभा पपलाह में करोड़ों के घोटाले के बाद अब खाताधारकों का पैसा वापस करना सभा के लिए गले की फांस बन चुका है। यही नहीं लाखों रुपये जमा करवाने वाले खाताधारकों को अब दो-दो हजार रुपये वापस किए जा रहे हैं। बुधवार 3 अक्तूबर को भी करीब 500 लोगों ने तलाई सभा के कार्यालय में धरना बोल दिया। जहां बाद में पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लोगों को शांत किया गया।
उल्लेखनीय है कि सहकारी सभा तलाई के सचिव की ओर से नियमों को ताक पर रख कर प्रदेश में अव्वल स्थान पाने की होड़ में गलत तरीके से गलत लोगों को ऋण दे दिया। इस ऋण की वापस आने की कोई भी उम्मीद नजर नहीं आ रही है। इस कारण 125 करोड़ का दावा करने वाली सोसायटी अब बदहाली की स्थिति में आ चुकी है। खाताधारकों को जब इसकी भनक लगी तो वह अपने पैसे वापस लेने के लिए सहकारी सभा के चक्कर काटने लगे।
सभा के सचिव की ओर से उन्हें पैसे देने के लिए तारीखें निर्धारित की जाने लगीं। जब पानी सिर से ऊपर हो गया तो खाताधारकों का गुस्सा फूट पड़ा। गत दिवस सभा के कार्यालय में लगभग 500 से अधिक खाताधारकों ने धावा बोल दिया। इसमें बचाव करने के लिए पुलिस दल को आना पड़ा।
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खाताधारकों ने सचिव पर आरोप लगाया कि जब-जब वे अपने पैसे वापस लेने के लिए सचिव के पास गए तो उन्होंने पैसे न देकर आगामी दस दिन बाद आने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि जब वे गत दिवस वहां पहुंचे तो सचिव ने उन्हें दो और तीन हजार दिए गए। जबकि उनका लाखों सहकारी सभा में जमा है। सहकारी सभा कमेटी की ओर से भी सभा सचिव से कन्नी काट ली गई है।
अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर सभा सदस्यों ने बताया कि सचिव की ओर से सरकारी मापदंडों का उल्लंघन कर गलत ढंग से लोन दिया है। उसकी भरपाई तो उसी को करनी पड़ेगी।
बाक्स
अब ऑडिट पर भी उठने लगे सवाल
अब सभा के ऑडिट पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। ऐसी क्या वजह है कि 6 माह से चल रहा ऑडिट अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। ये सारे विषय विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगा रहे हैं। फिलहाल खाताधारकों ने सहकारी सभा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। देखना यह है कि सचिव की ओर से जो तय समय सीमा खाताधारकों को दी गई है। उसके अंदर पैसे की अदायगी हो पाती है या नहीं।
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घोटाले के बाद पपलाह कृषि सहकारी सभा के गले की फांस बना खाताधारकों का पैसा वापस करना
बुधवार को करीब 500 लोग पहुंचे सभा के कार्यालय
सभा ने लोगों को दस दिन में पैसा लौटाने का दिया है आश्वासन
अमर उजाला ब्यूरो
बरठीं (बिलासपुर)। दी कृषि सहकारी सभा पपलाह में करोड़ों के घोटाले के बाद अब खाताधारकों का पैसा वापस करना सभा के लिए गले की फांस बन चुका है। यही नहीं लाखों रुपये जमा करवाने वाले खाताधारकों को अब दो-दो हजार रुपये वापस किए जा रहे हैं। बुधवार 3 अक्तूबर को भी करीब 500 लोगों ने तलाई सभा के कार्यालय में धरना बोल दिया। जहां बाद में पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लोगों को शांत किया गया।
उल्लेखनीय है कि सहकारी सभा तलाई के सचिव की ओर से नियमों को ताक पर रख कर प्रदेश में अव्वल स्थान पाने की होड़ में गलत तरीके से गलत लोगों को ऋण दे दिया। इस ऋण की वापस आने की कोई भी उम्मीद नजर नहीं आ रही है। इस कारण 125 करोड़ का दावा करने वाली सोसायटी अब बदहाली की स्थिति में आ चुकी है। खाताधारकों को जब इसकी भनक लगी तो वह अपने पैसे वापस लेने के लिए सहकारी सभा के चक्कर काटने लगे।
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सभा के सचिव की ओर से उन्हें पैसे देने के लिए तारीखें निर्धारित की जाने लगीं। जब पानी सिर से ऊपर हो गया तो खाताधारकों का गुस्सा फूट पड़ा। गत दिवस सभा के कार्यालय में लगभग 500 से अधिक खाताधारकों ने धावा बोल दिया। इसमें बचाव करने के लिए पुलिस दल को आना पड़ा।
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खाताधारकों ने सचिव पर आरोप लगाया कि जब-जब वे अपने पैसे वापस लेने के लिए सचिव के पास गए तो उन्होंने पैसे न देकर आगामी दस दिन बाद आने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि जब वे गत दिवस वहां पहुंचे तो सचिव ने उन्हें दो और तीन हजार दिए गए। जबकि उनका लाखों सहकारी सभा में जमा है। सहकारी सभा कमेटी की ओर से भी सभा सचिव से कन्नी काट ली गई है।
अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर सभा सदस्यों ने बताया कि सचिव की ओर से सरकारी मापदंडों का उल्लंघन कर गलत ढंग से लोन दिया है। उसकी भरपाई तो उसी को करनी पड़ेगी।
बाक्स
अब ऑडिट पर भी उठने लगे सवाल
अब सभा के ऑडिट पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। ऐसी क्या वजह है कि 6 माह से चल रहा ऑडिट अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। ये सारे विषय विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगा रहे हैं। फिलहाल खाताधारकों ने सहकारी सभा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। देखना यह है कि सचिव की ओर से जो तय समय सीमा खाताधारकों को दी गई है। उसके अंदर पैसे की अदायगी हो पाती है या नहीं।