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सहकारी सभा तलाई में 33 करोड़ रुपये का घोटाला
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मंगल ठाकुर
बरठीं(बिलासपुर)। उत्तरी भारत की सहकारी सभाओं का सबसे बड़ा घोटाला सहकारी सभा तलाई में उजागर होने के बाद जहां पुलिस ने अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं विभाग की ओर से भी सहकारी सभा में हुए घोटाले में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ कमेटी बनाकर जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
गत दिनों उजागर हुए सहकारी सभा तलाई में लगभग 33 करोड़ के घोटाले के बाद विभागीय अधिकारियों की ओर से थाना तलाई में भादंसं की धारा 420 और 406 के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं विभाग ने भी मामला दर्ज होने के दो दिन बाद सभा में ऑडिट कर रहे अधिकारियों व लापरवाह कमेटी के खिलाफ जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
यह सभा 1956 से कार्य कर रही है। हिमाचल प्रदेश सहकारी सभा अधिनियम के तहत सभी कृषि सभाओं को किसानों के हितों को ध्यान में कार्य करना होता है लेकिन सहकारी सभा तलाई द्वारा धनाड्य व्यक्तियों को बैंकों से दो गुणा ब्याज देकर लाभ पहुंचा कर साहुकारी प्रथा को बढ़ावा दिया जा रहा था।
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दूसरी तरफ किसानों को भारी भरकम ब्याज पर ऋण देकर उनकी आर्थिक स्थिति को कमजोर करने का कार्य किया जा रहा था। सभा ने पूरे प्रदेश से जमा पूंजी जमा कर 9 प्रतिशत से 12 प्रतिशत तक ब्याज दिया और जमा पूंजी एकत्रित करने में सहयोग करने वाले एजेंट को 2 प्रतिशत अतिरिक्त कमीशन के रूप में दिया जाता था जिससे साफ पता चलता है कि सभा ने नियमों को ताक पर रखकर अपनी मर्जी से बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 का उल्लंघन किया गया। सहकारी विभाग की पत्र संख्या सीएस 5-60/91 दिनांक 4 जनवरी 2006 की भी पूर्ण रूप से अवहेलना की गई है। ऑडिट में पता चला कि सभा सचिव ने जमा पूंजी में से लगभग 33 करोड़ ऐसे लोगों के नाम लोन बना रखे हैं जो क्षेत्र में है ही नहीं जिसका खुलासा डाक विभाग ने किया है। डाक विभाग द्वारा जब नोटिस दिए जा रहे थे तो लगभग 100 से अधिक ऐसे व्यक्ति सामने आए जिनका फर्जी नाम व पता है और उनके नाम से लाखों के लोन दिए गए हैं।
जिला पंजीयक अधिकारी रमेश कुमार ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि उतरी भारत का यह सबसे बड़ा घोटाला है। यह सभा राष्ट्रीय स्तर तक पुरस्कृत की जा चुकी है। गत वर्षों में हुए ऑडिट को किस तरह से सही ठहरा दिया गया और सभा समिति ने किस प्रकार इस पर मोहर लगा दी इसकी जांच की जाएगी।
बताया कि ऐसा प्रतीत होता है कि गत वर्षों में रही समितियां व अंकेक्षण अधिकारियों की मिलीभगत से यह मामला घटित हुआ है, जांच के दौरान जो भी इसमें संलिप्त पाया जाएगा उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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बरठीं(बिलासपुर)। उत्तरी भारत की सहकारी सभाओं का सबसे बड़ा घोटाला सहकारी सभा तलाई में उजागर होने के बाद जहां पुलिस ने अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं विभाग की ओर से भी सहकारी सभा में हुए घोटाले में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ कमेटी बनाकर जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
गत दिनों उजागर हुए सहकारी सभा तलाई में लगभग 33 करोड़ के घोटाले के बाद विभागीय अधिकारियों की ओर से थाना तलाई में भादंसं की धारा 420 और 406 के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं विभाग ने भी मामला दर्ज होने के दो दिन बाद सभा में ऑडिट कर रहे अधिकारियों व लापरवाह कमेटी के खिलाफ जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
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यह सभा 1956 से कार्य कर रही है। हिमाचल प्रदेश सहकारी सभा अधिनियम के तहत सभी कृषि सभाओं को किसानों के हितों को ध्यान में कार्य करना होता है लेकिन सहकारी सभा तलाई द्वारा धनाड्य व्यक्तियों को बैंकों से दो गुणा ब्याज देकर लाभ पहुंचा कर साहुकारी प्रथा को बढ़ावा दिया जा रहा था।
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दूसरी तरफ किसानों को भारी भरकम ब्याज पर ऋण देकर उनकी आर्थिक स्थिति को कमजोर करने का कार्य किया जा रहा था। सभा ने पूरे प्रदेश से जमा पूंजी जमा कर 9 प्रतिशत से 12 प्रतिशत तक ब्याज दिया और जमा पूंजी एकत्रित करने में सहयोग करने वाले एजेंट को 2 प्रतिशत अतिरिक्त कमीशन के रूप में दिया जाता था जिससे साफ पता चलता है कि सभा ने नियमों को ताक पर रखकर अपनी मर्जी से बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 का उल्लंघन किया गया। सहकारी विभाग की पत्र संख्या सीएस 5-60/91 दिनांक 4 जनवरी 2006 की भी पूर्ण रूप से अवहेलना की गई है। ऑडिट में पता चला कि सभा सचिव ने जमा पूंजी में से लगभग 33 करोड़ ऐसे लोगों के नाम लोन बना रखे हैं जो क्षेत्र में है ही नहीं जिसका खुलासा डाक विभाग ने किया है। डाक विभाग द्वारा जब नोटिस दिए जा रहे थे तो लगभग 100 से अधिक ऐसे व्यक्ति सामने आए जिनका फर्जी नाम व पता है और उनके नाम से लाखों के लोन दिए गए हैं।
जिला पंजीयक अधिकारी रमेश कुमार ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि उतरी भारत का यह सबसे बड़ा घोटाला है। यह सभा राष्ट्रीय स्तर तक पुरस्कृत की जा चुकी है। गत वर्षों में हुए ऑडिट को किस तरह से सही ठहरा दिया गया और सभा समिति ने किस प्रकार इस पर मोहर लगा दी इसकी जांच की जाएगी।
बताया कि ऐसा प्रतीत होता है कि गत वर्षों में रही समितियां व अंकेक्षण अधिकारियों की मिलीभगत से यह मामला घटित हुआ है, जांच के दौरान जो भी इसमें संलिप्त पाया जाएगा उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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