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घराण स्कूल में शिक्षकों का टोटा
Updated Wed, 29 Aug 2018 12:09 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शाहतलाई (बिलासपुर)। झंडूता विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला घराण में हिन्दी, संस्कृत व ड्राइंग पढ़ाने वाला कोई नहीं है। स्कूल में दूसरे विषयों के अध्यापकों को हिन्दी, संस्कृत व ड्राइंग पढ़ाने का कार्य सौंपा गया हैं जिससे एक सवाल यह खड़ा होता है कि ड्राइंग, संस्कृत व हिन्दी विषयों की बारीकियों को विद्यार्थी सिख पाएंगे या नहीं। यह तो प्रदेश का शिक्षा तंत्र ही बता सकता है।
पाठशाला की स्कूल प्रबंधन समीति के अध्यक्ष वीरी सिंह वर्मा, अभिभावक भाग सिंह, सुरेंद्र कुमार, मनोज कुमार, विजय कुमार, सुभाष चंद, देवराज, रमेश चंद, रोशनलाल, अमर चंद, केसरी देवी, लता कुमारी, ज्योति देवी व कविता देवी का कहना है कि आज का युग प्रतियोगिता का युग है एक भी विषय में पिछड़ने से बच्चे के भविष्य पर सवाल खड़े हो जाते हैं। इसके चलते पाठशाला में बच्चों को हिन्दी, संस्कृत व ड्राइंग विषयों के अध्ययन को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि पाठशाला में लिपिक व वरिष्ठ सहायक के पद भी रिक्त चल रहे हैं जिससे भी बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है।
अभिभावकों ने विभाग व सरकार से अनुरोध किया गया है कि रिक्त पदों को अतिशीघ्र भरा जाए ताकि शिक्षा का अधिकार-2009 के नियमों का उल्लंघन न हो और बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो, अन्यथा बच्चों को पाठशाला से निकालने के लिए अभिभावक बाध्य होंगे।
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उधर जब इस संदर्भ में पाठशाला के प्रधानाचार्य सुभाष चड्ढा का कहना है कि विद्यालय में अध्यापकों की कमी है जिसे लेकर समय-समय पर शिक्षा विभाग को रिक्त पदों की रिपोर्ट भेज दी गई है लेकिन अभी तक रिक्त पद नहीं भर पाए हैं।
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शाहतलाई (बिलासपुर)। झंडूता विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला घराण में हिन्दी, संस्कृत व ड्राइंग पढ़ाने वाला कोई नहीं है। स्कूल में दूसरे विषयों के अध्यापकों को हिन्दी, संस्कृत व ड्राइंग पढ़ाने का कार्य सौंपा गया हैं जिससे एक सवाल यह खड़ा होता है कि ड्राइंग, संस्कृत व हिन्दी विषयों की बारीकियों को विद्यार्थी सिख पाएंगे या नहीं। यह तो प्रदेश का शिक्षा तंत्र ही बता सकता है।
पाठशाला की स्कूल प्रबंधन समीति के अध्यक्ष वीरी सिंह वर्मा, अभिभावक भाग सिंह, सुरेंद्र कुमार, मनोज कुमार, विजय कुमार, सुभाष चंद, देवराज, रमेश चंद, रोशनलाल, अमर चंद, केसरी देवी, लता कुमारी, ज्योति देवी व कविता देवी का कहना है कि आज का युग प्रतियोगिता का युग है एक भी विषय में पिछड़ने से बच्चे के भविष्य पर सवाल खड़े हो जाते हैं। इसके चलते पाठशाला में बच्चों को हिन्दी, संस्कृत व ड्राइंग विषयों के अध्ययन को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि पाठशाला में लिपिक व वरिष्ठ सहायक के पद भी रिक्त चल रहे हैं जिससे भी बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है।
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अभिभावकों ने विभाग व सरकार से अनुरोध किया गया है कि रिक्त पदों को अतिशीघ्र भरा जाए ताकि शिक्षा का अधिकार-2009 के नियमों का उल्लंघन न हो और बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो, अन्यथा बच्चों को पाठशाला से निकालने के लिए अभिभावक बाध्य होंगे।
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उधर जब इस संदर्भ में पाठशाला के प्रधानाचार्य सुभाष चड्ढा का कहना है कि विद्यालय में अध्यापकों की कमी है जिसे लेकर समय-समय पर शिक्षा विभाग को रिक्त पदों की रिपोर्ट भेज दी गई है लेकिन अभी तक रिक्त पद नहीं भर पाए हैं।
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