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बहन के घर आकर विजय राम को मिली मौत
Updated Wed, 12 Sep 2018 08:16 PM IST
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बहन के घर आकर विजय राम को मिली मौत
आठ साल पहले भी मंडी भराड़ी में ऐसे ही हुई थी एक की मौत
बिजली बोर्ड, जिला प्रशासन और सरकार की लापरवाही भी आई सामने
खेमराज शर्मा
बिलासपुर। बहन के घर आकर विजय राम को मिली आकस्मिक मौत किसी अचंभे से कम नहीं है। इस मौत का जिम्मेदार अकेले जमीन के मालिक ही नहीं बल्कि बिजली बोर्ड, जिला प्रशासन व वन विभाग भी हैं। अगर लावारिस पशुओं के लिए गोसदन पूरी तरह से तैयार होते तो न विजय राम लावारिस पशुओं को भगाने के लिए खेतों में जाता और न ही वह करंट की चपेट में आता। आठ साल पहले भी इसी तरह का एक हादसा इसी पंचायत के साथ लगती पंचायत मंडी-भराड़ी में भी हो चुका है। यहां पर भी एक व्यक्ति की जान जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए लगाए गए बिजली की तारों में दौड़ रहे करंट से हो गई थी।
यह एक बेहद की दुखद ही विषय है कि हाईकोर्ट के आदेशों के बाद भी लावारिस पशु सड़कों पर घूम रहे हैं। हालांकि लोगों द्वारा स्वयं ही पशुओं को लावारिस छोड़ दिया जाता है, बाद में उनसे ही फसलों को बचाने के लिए वह करंट का प्रयोग करते हैं। इसकी चपेट में इंसान आते हैं और काल का ग्रास बन जाते हैं।
अब सवाल उठता है कि रघुनाथनपुरा में जो बिजली का करंट लगने से व्यक्ति की मौत हुई है उसमें बिजली बोर्ड ने समय रहते उचित कदम क्यों नहीं उठाया। लोगों का कहना है कि काफी समय से यहां पर ऐसे ही बिजली के मुख्य खंभे से करंट लगाकर फसलों को बचाया जा रहा था। वहीं दूसरी और सवाल यह भी है कि वन विभाग भी जंगली सुअरों से निजात दिलवाने के लिए कोई कदम क्यों नहीं उठा रहा है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर गोशालाएं खुल गईं होती तो शायद ऐसा हादसा न होता। अपनी बहन के घर आया विजयराम सकुशल अपने घर वापस चला जाता लेकिन नियति का खेल है कि यहां से उसका मृत शरीर ही घर गया। ऐसे में अब सरकार को भी ऐसे संवेदनशील मामलों में कड़ाई अपनाते हुए पंचायत स्तर पर वह प्रशासन को आदेश देने चाहिए कि घरेलू पशुओं को टेंग किया जाए, ताकि लावारिस छोड़ने पर उनकी पहचान की जा सके। जबकि बिलासपुर में हर साल दो से तीन लोगों की मौत इसी तरह खेतों में लगाए गए करंट से हो जाती है।
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....खेमराज शर्मा।
आठ साल पहले भी मंडी भराड़ी में ऐसे ही हुई थी एक की मौत
बिजली बोर्ड, जिला प्रशासन और सरकार की लापरवाही भी आई सामने
खेमराज शर्मा
बिलासपुर। बहन के घर आकर विजय राम को मिली आकस्मिक मौत किसी अचंभे से कम नहीं है। इस मौत का जिम्मेदार अकेले जमीन के मालिक ही नहीं बल्कि बिजली बोर्ड, जिला प्रशासन व वन विभाग भी हैं। अगर लावारिस पशुओं के लिए गोसदन पूरी तरह से तैयार होते तो न विजय राम लावारिस पशुओं को भगाने के लिए खेतों में जाता और न ही वह करंट की चपेट में आता। आठ साल पहले भी इसी तरह का एक हादसा इसी पंचायत के साथ लगती पंचायत मंडी-भराड़ी में भी हो चुका है। यहां पर भी एक व्यक्ति की जान जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए लगाए गए बिजली की तारों में दौड़ रहे करंट से हो गई थी।
यह एक बेहद की दुखद ही विषय है कि हाईकोर्ट के आदेशों के बाद भी लावारिस पशु सड़कों पर घूम रहे हैं। हालांकि लोगों द्वारा स्वयं ही पशुओं को लावारिस छोड़ दिया जाता है, बाद में उनसे ही फसलों को बचाने के लिए वह करंट का प्रयोग करते हैं। इसकी चपेट में इंसान आते हैं और काल का ग्रास बन जाते हैं।
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अब सवाल उठता है कि रघुनाथनपुरा में जो बिजली का करंट लगने से व्यक्ति की मौत हुई है उसमें बिजली बोर्ड ने समय रहते उचित कदम क्यों नहीं उठाया। लोगों का कहना है कि काफी समय से यहां पर ऐसे ही बिजली के मुख्य खंभे से करंट लगाकर फसलों को बचाया जा रहा था। वहीं दूसरी और सवाल यह भी है कि वन विभाग भी जंगली सुअरों से निजात दिलवाने के लिए कोई कदम क्यों नहीं उठा रहा है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर गोशालाएं खुल गईं होती तो शायद ऐसा हादसा न होता। अपनी बहन के घर आया विजयराम सकुशल अपने घर वापस चला जाता लेकिन नियति का खेल है कि यहां से उसका मृत शरीर ही घर गया। ऐसे में अब सरकार को भी ऐसे संवेदनशील मामलों में कड़ाई अपनाते हुए पंचायत स्तर पर वह प्रशासन को आदेश देने चाहिए कि घरेलू पशुओं को टेंग किया जाए, ताकि लावारिस छोड़ने पर उनकी पहचान की जा सके। जबकि बिलासपुर में हर साल दो से तीन लोगों की मौत इसी तरह खेतों में लगाए गए करंट से हो जाती है।
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....खेमराज शर्मा।