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जगदीश ने 40 किलो से 50 क्विंटल पहुंचाया मशरूम का उत्पादन

Sun, 10 Feb 2019 10:59 PM IST
Devender Devender Kumar Kumar
Updated Sun, 10 Feb 2019 10:59 PM IST
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जगदीश ने 40 किलो से 50 क्विंटल पहुंचाया मशरूम का उत्पादन
अमर उजाला ब्यूरो
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बिलासपुर। मन में अगर कुछ कर गुजरने की चाह हो तो परिश्रम के बल पर पत्थरिली चट्टानों पर भी सोना उगाया जा सकता है। ऐसा ही कर दिखाया है उपमंडल झंडूता की बलघाड़ पंचायत के गांव पराहू के जगदीश चंद वर्मा ने। 40 किलो मशरूम उत्पादन से शुरू का कार्य आज 40 से 50 क्विंटल तक पहुंच गया है।
वहीं इस पूरे कार्य के लिए उन्होंने सरकार से भी मदद ली जिसमें 20 लाख के इस प्रोजेक्ट में सरकार की ओर से आठ लाख रुपये का उपदान भी दिया गया है। वहीं जगदीश का यह प्रोजेक्ट क्षेत्र के अन्य बेरोजगार युवाओं के लिए भी प्रेरणा बना हुआ है।
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5 मई 1969 को स्व. प्रेम दास के घर पैदा हुए जगदीश चंद वर्मा का बचपन किसी भी दृष्टि से खुशहाल नहीं माना जा सकता। खेती के लिए पर्याप्त जमीन होने के बावजूद सिंचाई सुविधा न होने के चलते अभावग्रस्त जीवन जीने को मजबूर उनके परिवार को पीने के लिए भी कोसों दूर से पानी लाना पड़ता।
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इस दौरान 2008 में उद्यान विभाग के तत्कालीन विषय विशेषज्ञ एवं वर्तमान उपनिदेशक उद्यान विभाग बिलासपुर विनोद कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने जगदीश चंद को राष्ट्रीय खुंब अनुसंधान केंद्र सोलन में मशरूम उत्पादन के प्रशिक्षण के लिए भेजा। वर्ष 2009 में आत्मा परियोजना व कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से उन्होंने मात्र 20 बैग से मशरूम उत्पादन कार्य आरंभ किया। पहले साल 40 किलो के मशरूम उत्पादन हुआ। इसके बाद कड़ी मेहनत से अब उत्पादन 40 से 50 क्विंटल हो चुका है।
वर्मा मशरूम इकाई में वर्तमान में तीन बडे़ हॉल्ज में 1725 बैगों में केवल बटन मशरूम को ही उगाया जा रहा है। जगदीश वर्मा अगले वर्ष डिंगरी व ब्राउन मशरूम को भी उगाने की योजना बना रहे है। जबकि औषधि के रूप में प्रयुक्त की जाने वाली सबसे महंगी स्टाके मशरूम उगाने की विधि व मार्केटिंग ज्ञान के लिए वह चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर से प्रशिक्षण पाने के लिए संपर्क साधे हैं।

कहा कि मशरूम उत्पादन सीजन में 12 से 18 घंटे तक निरंतर अथाह परिश्रम करते हैं। इस कार्य में उनकी पत्नी बीना देवी, बेटा आशीष, रोहित व बेटी नेहा के अतिरिक्त उनके भाई का परिवार भी इस कार्य में हाथ बटाता है। जबकि इस व्यवसाय के माध्यम से वह गांव की महिलाओं को भी रोजग़ार देते हैं। जगदीश चंद वर्मा ने कहा कि आज के परिवेश में आवश्यक है कि युवा पीढ़ी सरकारी नौकरियों के पीछे भागने के बदले सरकार द्वारा स्वरोजगार के क्षेत्र में उपलब्ध करवाए जा रहे संसाधनों का लाभ उठाकर अपना जीवन स्तर ऊपर उठाए।
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